Saturday, September 19, 2020
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अपराधियों के प्रकार

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वर्तमान काल मे अपराधियों द्वारा किये जाने वाले अपराधों तथा उनकी मनोवृत्तियों के आधार पर अपराध को निम्नाकित भागों में बांटा गया है :-

(1) आकस्मिक अपराधी – इसमे वे अपराधी आते है जो कि अकस्मात क्रोध, उत्तेजना या किसी के बहकावे में आकर अपराध कारित करते हैं। अपराध करने के बाद पछतावा होता है ।इनका कोई आपराधिक इतिहास नही होता। इनमे सुधार की काफी सम्भावना होती है । इस प्रकार के अपराधी अपराध करने के अभ्यस्त नही होते।

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(2) यौन अपराधी – महिलाओं एवं बालकों के साथ ब्लात्कार एवं छेड़छाड़ करने का अपराध करते हैं। यहां पर बालकों का तातपर्य नाबालिग लड़के,लड़कियों से है।

(3) पेशेवर अपराधी – इस वर्ग में ऐसे अपराधी आते हैं जो किसी अपराध करने के अभ्यस्त होते है। जैसे -किराये पर हत्या करने वाले, मादक द्रव्यों की तस्करी/व्यापार करने वाले,ठगी करने वाले, जेबकतरे, जुआ खेलने/खेलाने वाले,रेलगाड़ी का डिब्बों में चोरी करने वाले,लूट करने वाले आदि।

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(4) बाल अपराधी – इसमें 18 वर्ष से कम उम्र के बालक,बालिकायें से सम्मिलित होते हैं। बाल अपराधो की विवेचना, न्यायालय तथा दन्ड वयस्क अपराधियों द्वारा किये जाने वाले अपराधों से भिन्न हैं।इनके द्वारा किये जाने वाले अपराधों का विचारण किशोर न्याय बोर्ड द्वारा किया जाता है। ऐसे अपराधियों के सुधरने की सम्भावना सर्वाधिक होती है।

(5) संगठित अपराध – इनका एक संगठन होता है जिसमें एक लीडर तथा अन्य लोग सदस्य होते हैं। इनका उद्देश्य अपराध करके धन अर्जित करना होता है ।इनके द्वारा अपहरण, हत्या,तस्करी आदि अपराध किये जाते हैं। ऐसे अपराधियों के सुधरने की सम्भावना बहुत कम होती है।

(6) राजनैतिक अपराधी – ऐसे अपराध राजनैतिक दल के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किए जाते हैं जैसे- बूथ कैप्चरिंग करवाना, फर्जी वोट डलवाना,लोंगो में आपसी फूट डाल कर मारपीट,जमीन पर अवैध कब्जे कराना आदि।

(7) सफेदपोश अपराध – ऐसे अपराधी समाज मे सम्पन्न एवं प्रतिष्ठित होते है जिसकी आड़ में रिस्वत लेने, मिलावटी सामान बेचने, नकली सामान व दवायें बेचने, कालाबाजारी व जमाखोरी करने,धन गबन करने इत्यादि अपराध करते है।इसमे राजनीतिज्ञ, ब्यापारी,सरकारी अधिकारी/कर्मचारी(जैसे- डॉक्टर, इंजीनियर आदि) सम्मिलित हो सकते हैं।

(8) चित्त विकृत अपराधी – इसमे वे अपराधी आते है जिनका मानसिक संतुलन ठीक नही होता जिसके कारण अपराध कर देते हैं । ऐसे अपराध का विचारण करने पर जब न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि अपराध करने वाला व्यक्ति पागल है तो उसके द्वारा किया गया आपराधिक कृत्य अपराध नही होता।

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