Friday, September 18, 2020
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अपराध के लिए दण्ड

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जब कोई व्यक्ति किसी कार्य या कार्य का लोप कर के बिधि का उल्लंघन करता है तो उसके लिए दण्ड दिया जाता है। दण्ड राज्य/केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है। दण्ड की गम्भीरता के आधार पर अलग अलग अपराधों के लिए अलग अलग दण्ड निर्धारित किये गए हैं।

दण्ड के सिद्धांत :-

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(A) प्रतिशोधात्मक सिद्धान्त:- यह सिद्धांत बदले की भावना पर आधारित है। जैसे – यदि किसी ने किसी का हाथ काट लिया तो हाथ काटने वाले  दोषी व्यक्ति का हाथ काट लिए जाने का दन्ड दिया जाना चाहिए।

यह दण्ड सिद्धांत सभ्यता के प्रारंभिक काल मे प्रचलित था। जिसकी इस आधार पर आलोचना की गई कि यह दन्ड सिद्धांत बदला लेने की क्रूर भावना पर आधारित है जिससे समाज मे शत्रुता बढ़ जाएगी।

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(B) दण्ड का प्रतिरोधात्मक सिद्धांत:- यह दण्ड सिद्धांत का उद्देश्य अपराधियों को अपराध करने से रोकना है। इसमें कारावास का दन्ड दिया जाता है। गम्भीर अपराधों हत्या आदि  में मृत्युदण्ड तक दिया जा सकता है ।इस सिद्धांत की आलोचना इस आधार पर हुई कि मृत्युदण्ड देने के बाद भी हत्यायें हो रही है, अपराध में अपराधियों के साथ साथ परिस्थितियां भी अपराध के लिए उत्तरदायी होती हैं।

(C) दन्ड का सुधारात्मक सिद्धान्त:- यह सिद्धांत सर्वाधिक स्वीकार्य सिद्धांत है जिसका उद्देश्य अपराधी का सुधार करना एवं उसे पुनः समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है ताकि अपराधी दुबारा अपराध न कटा। यह सिद्धान्त अपराध की अपेक्षा अपराधी को अधिक महत्व देता है ।अपराध शास्त्रियो ने इस सिद्धान्त की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि अपराधी के सुधार का कार्य किस आधार पर किया जाए तथा ये भी निस्चित नही है कि वह सुधर जाएगा और अपराध नही करेगा।

भारत मे प्रचलित दण्ड व्यवस्था:- भारत मे दण्ड की सुधारात्मक एव प्रतिरोधात्मक दण्ड प्रणाली प्रचलित है। गम्भीर अपराधों जैसे – हत्या,हत्या सहित डकैती,भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध करना आदि अपराधों में आजीवन कारावास एवं मृत्युदण्ड दिए जाने का प्राविधान है। अर्थदण्ड दिए जाने एवं अर्थदंड न भोगने पर उसके स्थान पर कारावास का दण्ड दिए जाने का भी प्राविधान है। अपराधों में परिवीक्षा पर छोड़े जाने का प्राविधान है। जेल में लम्बी अवधि से कारावास का दण्ड भोग रहे अपराधियों को पैरोल पर छोड़े जाने का प्राविधान हैं ।मृत्युदण्ड पाए हुए अपराधी को क्षमा प्रदान करने का अधिकार राष्ट्रपति को हैं। दण्ड पाए हुये अपराधी को उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय में अपील करने का अधिकार है।

भारत मे अपीलीय न्यायालय:- भारत के सभी उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय अपीलीय न्यायालय हैं ।उच्च न्यायालय में सम्बंधित राज्य के लोग तथा उच्चतम न्यायालय में सम्पूर्ण भारत के लोग अपील कर सकते है।

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