Monday, September 21, 2020
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अरविन्द केजरीवाल

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अरविन्द केजरीवाल का जन्म 1968 ई0 में हरियाणा प्रान्त के, “हिसार” नामक शहर में हुआ जिन्होंने आई0टी0आई0 खड़कपुर से वर्ष 1989 ई0 में यान्त्रिक अभियान्त्रिकी में स्नातक की उपाधि ली तथा 1992 ई0 मेंआई0आर0एस0 के लिए चुने गए तथा उन्हें दिल्ली में आयकर आयुक्त कार्यालय में नियुक्त किया गया । उन्होंने महसूस किया कि सरकार में भ्रष्टाचार के कारण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है । उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम शुरू कर दी तथा आयकर कार्यालय में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

1995 में अरविन्द केजरीवाल ने 1993  बैच की आई0आर0एस0 अधिकारी सुनीता से शादी की।

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जुलाई 2006 ई0 में उन्होंने पूरे भारत में आर0टी0आई0 के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक अभियान शुरू किया दूसरों को प्रेरित करने के लिए अरविन्द ने जब अपने संस्थान के माध्यम से एक आर0टी0आई0 पुरस्कार की शुरुआत की । सूचना का अधिकार गरीब लोगों के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही आम जनता और पेशेवर लोगों के लिए भी यह उतना ही महत्वपूर्ण है । अरविन्द सूचना के अधिकार के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को अपनी सरकार से प्रश्न पूछने की शक्ति देते हैं, अपने संगठन परिवर्तन के माध्यम से हुए लोगों को प्रशासन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करते हैं । आर0टी0आई0 को आम नागरिक के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बनने में लम्बा समय लगेगा । हालांकि अरविन्द ने हमें दिखा दिया है कि वास्तव में इसके लिए एक संभव रास्ता है।

राजनीति में पदार्पण – 2 अक्टूबर 2012 ई0 को अरविंन्द केजरीवाल ने अपने राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत कर दी उन्होंने गांधी टोपी पहनी जिस पर उन्होंने लिखवाया मैं आम आदमी हूं । उन्होंने 2 अक्टूबर 2012 को ही अपनी भाभी राजनीतिक दल का दृष्टिकोण पत्र भी जारी किया

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आम आदमी पार्टी का गठन –  आम आदमी पार्टी के गठन की अधिकारिक घोषणा अरविन्द केजरीवाल एवं लोकपाल आन्दोलन के बहुत से सहयोगियों द्वारा 26 नवम्बर 2012 ई0 को भारतीय संविधान अधिनियम की 63 वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिल्ली स्थित स्थानीय जन्तर मन्तर पर की गई।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 ई0 – 2013 ई0 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविन्द केजरीवाल ने नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा जहां पर उनकी सीधी टक्कर लगभन 15  साल से दिल्ली की मुख्यमन्त्री रहीं श्रीमती शीला दीक्षित से थी। उन्होंने नई दिल्ली विधानसभा सीट से 3 बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 25864 मतों से हराया।

नौकरशाही से सामाजिक कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता से राजनीतिज्ञ बने अरविनेद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की राजनीति में धमाकेदार प्रवेश किया तथा 70 सीटों में से 28 सीटें जीतकर प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी। भारतीय जनता पार्टी को 32 तथा सत्तारूढ़ काग्रेस पार्टी को 8 सीटें मिली । कांग्रेस के समर्थन से अरविंन्द केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमन्त्री बने । दिल्ली के मुख्यमन्त्री 28 दिसम्बर 2013 से 14 फरवरी 2014 तक 49 दिन दिल्ली के मुख्यमन्त्री के रूप में कार्य करते हुए अरविन्द केजरीवाल लगातार सुर्खियों में बने रहे । मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने बिजली की दरों में 50% की कटौती कर दी।

लोकपाल बिल भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा  रहा जिस पर उनका विपक्षी दल भाजपा और समर्थक दल कांग्रेस से  गतिरोध बना रहा। लोकपाल मुद्दे पर आन्दोलन से ही अरविन्द पहली बार देश में जाने गए थे । उसे कानूनी रूप देने के लिए प्रतिबद्ध थे परन्तु विपक्षी दल कांग्रेस एवं भाजपा ने बिल को असंवैधानिक बताकर विधानसभा में बिल पेश करने का लगातार विरोध किया विरोध के चलते 14 फरवरी को दिल्ली विधानसभा में यह बिल रखा ही नहीं जा सका ।  जिसके कारण इन्होने त्यागपत्र दे गया।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 ई0 – अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में फरवरी 2015 ई0 के चुनाव में उनकी पार्टी ने 70 में से रिकार्ड 67 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया 14 फरवरी 2015 को अरविन्द केजरीवाल दोबारा दिल्ली के मुख्यमन्त्री बने।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 ई0 –  दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 ई0 8 फरवरी 2020 ई0 को सम्पन्न हुए । 11 फरवरी 2020 ई0 को चुनाव परिणाम घोषित हुए जिसमें आम आदमी पार्टी 62 सीटों पर तथा भारतीय जनता पार्टी 8 सीटों पर विजयी रही। आम आदमी पार्टी के बहुमत दल के नेता अरविन्द केजरीवाल लगातार तीसरी बार 16 फरवरी 2020 ई0 को दिल्ली के मुख्यमन्त्री बने हैं।

 

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