उत्तर प्रदेश में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था

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सरकारी सेवाओं तथा शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण हेतु समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कानून बनाए जाते रहे आरक्षण के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा भी समय-समय पर महत्वपूर्ण निर्णय निर्गत किए उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर सरकार द्वारा आरक्षण नियमों में आवश्यकता अनुसार समय-समय पर संशोधन किए जाते रहे और कभी-कभी उच्चतम न्यायालय के निर्णय को प्रभावी करने के लिए आवश्यक संविधान संशोधन भी किए गए उत्तर प्रदेश में शासन आदेशों तथा न्यायालय के निर्णय के परिपेक्ष में वर्तमान में आरक्षण की स्थिति संक्षेप में निम्न प्रकार है-

अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए क्रमशः 21% 2 प्रतिशत 27% आरक्षण देय है यह वर्टिकल आरक्षण है जिसके अंतर्गत संबंधित आरक्षित वर्ग के उपयुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्त किए जाने की अनिवार्यता है ।

विहित प्रतिशत में आरक्षणदेने हेतु 100 पदों का रोस्टर बना हुआ है इसी रोस्टर के अनुसार आरक्षित पदों/ रिक्तियों पर सीधी भर्ती द्वारा नियुक्तियां की जानी चाहिए । यह रोस्टर वर्षानुवर्ष चालू खाते के रूप में तब तक क्रियान्वित किया जाएगा जब तक ऊपर वर्णित तीनों आरक्षित वर्ग के व्यक्तियों के लिए आरक्षित पद भर न जाए ।

जब संवर्ग में विद्यमान सभी आरक्षित पद रोस्टर  के अनुसार आरक्षित व्यक्तियों से भर दिए जाएं तब रोस्टर और चालू खाता समाप्त हो जाएगा अर्थात उसके उपरांत रोस्टर का क्रियान्वयन नहीं होगा । तत्पश्चात जब कभी कोई पद रिक्त होगा तब उसी वर्ग के व्यक्ति से भरा जाएगा जिस वर्ग के व्यक्ति के लिए यह पद रोस्टर में रहा हो ।।

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प्रत्येक राज्य में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजातियों की सूची भारत सरकार द्वारा बनाई जाती है संविधान में प्रत्येक राज्य के अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजातियों की सूची दी हुई है अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची राज्य सरकार द्वारा बनाई जाती है ।

आरक्षण का लाभ उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगा जो सक्षम अधिकारी द्वारा निर्गत जांच प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे ।

अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण देय है किन्तु अन्य पिछड़ा वर्ग के ऐसे व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा जो क्रीमी लेयर से संबंधित हैं । अधिसूचना दिनांक 8:12 1995 द्वारा क्रीमी लेयर को चिन्हित किया गया है ।अधिसूचना से आच्छादित अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा ।

पदोन्नति में आरक्षण के लिए अलग रोस्टर है । किसी संवर्ग में पदोन्नति द्वारा भरे जाने वाले कुल पदों की संख्या की सापेक्ष रोस्टर क्रियान्वित करते हुए आरक्षण प्रदान किया जाएगा । यदि संवर्ग में पदोन्नत से भरा जाने वाला पद सिर्फ एक ही पद हो तो उसे आरक्षित नहीं किया जाएगा ।

यह आरक्षण संबंधित सेवा संवर्ग के कुल पदों की संख्या के 50% से अधिक नहीं होगा किसी सेवा में पहली बार आयोजित सीधी भर्ती में उस भर्ती की कुल रिक्तियों के 50% से अधिक रिक्तियां आरक्षित नहीं की जाएगी उस भर्ती में जितने आरक्षित पद भरे नहीं जा सके उन्हें अगले भर्ती वर्ष में अग्रनीत करके बैकलाग के रूप में भरा जाएगा और ऐसी दशा में उन बैकलाग आरक्षित रिक्तियों को अगले भर्ती वर्ष में 50% की सीमा के लिए नहीं जोड़ा जाएगा ।

यदि सीधी भर्ती करते समय अनुसूचित जाति हेतु आरक्षित पद के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिलता है तो उसे अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी से भरा जाएगा । इसी प्रकार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पद हेतु उपयुक्त अभ्यर्थी न मिलने पर अनुसूचित जाति के प्रति से भरा जाता है ।

आरक्षित वर्ग के व्यक्तियों को अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान की जाती है ।

आरक्षण सुनिश्चित करने का दायित्व संबंधित नियुक्ति अधिकारी का होता है किंतु जहां श्री राज्यपाल नियुक्ति अधिकारी हैं वहां आरक्षण सुनिश्चित करने का दायित्व संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव अथवा सचिव जैसी भी स्थिति हो, का होता है । यदि वह अधिकारी जानबूझकर आरक्षण अधिकार के प्रयोजनों का उल्लंघन करें तो वह 3 माह तक के  कारावास अथवा ₹1000 तक का जुर्माना अथवा दोनों से दंडनीय अपराध के लिए उत्तरदाई होंगे, जिसके लिए उनके विरुद्ध राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से न्यायालय में अभियोजन किया जा सकता है ।

जिन सेवाओं एवं पदों पर सीधी भर्ती में आरक्षण प्रदान करना होता है उन सेवाओं में एवं पदों पर पदोन्नति के समय अनुसूचित जाति के कार्मिकों के लिए 21 %तथा अनुसूचित जनजाति कार्मिकों के लिए 2% आरक्षण प्रदान किया जाता है । अन्य पिछड़ा वर्ग के कार्मिकों को पदोन्नति में आरक्षण नहीं दिया जाता है ।

चयन समिति में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी अधिकारी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के किसी अधिकारी को रखा जाना आवश्यक है ।

चयन समिति में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी अधिकारी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के किसी अधिकारी को रखा जाना आवश्यक है ।

यदि आरक्षित श्रेणी से संबंधित कोई व्यक्ति योग्यता के आधार पर खुली प्रतियोगिता में सामान्य अभ्यर्थियों के साथ चयनित होता है तो उसे आरक्षित रिक्तियों के प्रति समायोजित नहीं किया जाएगा । अर्थात उसे अनारक्षित रिक्तियों के प्रति समायोजित माना जाएगा । भले ही उसने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनुमन्य किसी  सुविधा या छूट ( जैसे- आयु सीमा में छूट आदि )का उपभोग किया हो ।

 

 

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