Saturday, September 19, 2020
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साइबर आतंकवाद

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साइबर आतंकवाद क्या है ?

साइबर आतंकवाद शब्द का पहली बार इस्तेमाल जेरेड वेस्ट्रप ने किया था । साइबर आतंकवाद सार्वजनिक रूप से 1980 ई0 के उत्तरार्ध में आरम्भ हुआ तथा 2000 ई0 तक व्यापक रूप धारण कर लिया । साइबर आतंकवाद दो शब्दों साइबर तथा आतंकवाद से मिलकर बना है । साइबर शब्द हमारी व्यवसायिक गतिविधियों से जुड़ा कोई भी तरीका हो सकता है लेकिन आतंकवाद को परिभाषित करना आसान नहीं है ।

डोरोथी डेनिंग के अनुसार-  निहित राजनीतिक या सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किसी देश की सरकार या वहां के नागरिकों को डराने, धमकाने या प्रताड़ित करने के लिए कम्प्यूटर साधन या उसके नेटवर्क एवं उसमें संरक्षित आंकड़ों को अनाधिकार चोट पहुंचाने की कोशिश करना साइबर आतंकवाद कहलाता है ।

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आर0 स्टार्क के अनुसार-  सूचना तन्त्र पर किसी भी माध्यम से किसी भी तरह से चोट पहुंचाना या चोट पहुंचाने की कोशिश करना साइबर आतंकवाद कहलाता है  ।

कम्प्यूटर नेटवर्क को हैक करके उसमें संग्रहीत आंकड़ों को चुराना और उसका इस्तेमाल साइबर आतंकवाद का एक अहम पहलू है ।

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उपरोक्त से स्पष्ट है कि दूरभाष क्षेत्र की आधारभूत संरचना को चोट पहुंचाने की कोई भी कोशिश जो कम्प्यूटर एवं वेबसाइट की मदद से की गई हो जिसमें छेड़छाड़ शामिल है, साइबर आतंकवाद के दायरे में आती है ।

साइबर आतंकवाद आज की गम्भीर समस्या –

साइबर आतंकवाद, आतंकवाद का सबसे भयानक तथा घिनौना रूप है जिसमें आतंकवादी एक ही जगह बैठे-बैठे  पूरी दुनिया में कहीं भी साइबर हमला कर सकता है । साइबर आतंकवाद, आतंकवादी की पहचान छुपी होती है- नाम नहीं, पता नहीं, तस्वीर भी नहीं, पहचान के तौर पर कुछ भी नहीं । सबूत के नाम पर अगर कुछ होता है तो मात्र एक आई0पी0 ऐड्रेस ।

वर्ष 2007 ई0 में एस्टोनिया पर एक बडा साइबर हमला हुआ था जिसमें चुनी हुए साइटों को ट्रैफिक से भर दिया गया जिससे ऑफलाइन हो जाए । लगभग सभी ऐस्तोनियन सरकारी मंत्रालय नेटवर्क तथा दो प्रमुख ऐस्टोनियन बैंक नेटवर्कों को ध्वस्त कर ऑफलाइन कर दिया गया ।

साइबर आतंकवाद का उदय हमारे लिए बेहद खतरनाक है । इसकी प्रकृति अत्यन्त घातक एवं विध्वन्सात्मक है । आधुनिक सूचना तकनीक के दौर में आतंकियों ने हथियारों के साथ तकनीक को जोड़ने की कला में भी महारत हासिल कर ली है । यदि समय रहते  इस पर अंकुश न लगाया गया तो आगे चलकर यह और भी अधिक खतरनाक रूप धारण पर लेगा जिससे होने वाले नुकसान की कोई भरपाई नहीं की जा सकेगी ।

साइबर आतंकवाद से निपटने के लिए कठोर कानून आज कीआवश्यकता –

अभी तक साइबर आतंकवाद  से निपटने के लिए बने कानून पर्याप्त नहीं है । साइबर आतंकियों के खतरनाक इरादों एवं वैश्विक स्तर पर लगातार तकनीकी विकास के चलते इसमें लगातार बदलाव की जरूरत है । इस समस्या को अन्तर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है क्योंकि इन्टरनेट का इस्तेमाल साइबर आतंकवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू है और इसकी कोई सीमा नहीं होती । साइबर आतंकवाद में हो सकता है कि आतंकी किसी ऐसे देश में बैठकर किसी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने की कोशिश करे  जिसके साथ उसका कोई  राजनयिक सम्बन्ध ही न हो । ऐसी परिस्थिति में तकनीक का इस्तेमाल ही एकमात्र विकल्प हो सकता है । आधुनिकतम सुरक्षा तकनीकों को दृष्टिगत रखते हुए प्रभावी एवं कठोर  साइबर कानूनों का निर्माण किये जाने की आवश्यकता  हैं ।

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