प्रथम सूचना रिपोर्ट ( Fir )

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प्रथम सूचना रिपोर्ट:- किसी  अपराध  के संबंध में थाने पर प्रथम बार प्राप्त होने वाली सूचना को प्रथम सूचना रिपोर्ट कहते हैं। प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखित या मौखिक दोनो प्रकार से दी जा सकती है  तथा थाना का भारसाधक अधिकारी या  किसी भी पुलिस अधिकारी को दी जा सकती है। प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखित हो या मौखिक तत्काल दर्ज की जाएगी। तथा तत्काल उसका सारांश जी0डी0 में अंकित किया जाएगा।

मौखिक सूचना देने  मिलने पर उक्त सूचना देने वाले को पढ़ कर सुनाई जाएगी और उसके हस्ताक्षर या अंगूठा निशान लिए जाएंगे। सूचना देने वाले को प्रथम सूचना रिपोर्ट की पठनीय एवम साफ प्रति तत्काल निःशुल्क दी जाएगी।

यदि थाने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट नही दर्ज की जाती है तो वह अपनी लिखित सूचना जिले के पुलिस अधीक्षक को भेज सकता है कि अपने स्तर से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर विवेचना करायेगे ।

यदि असंज्ञेय अपराध है तो 24 घंटे के अंदर किसी उप निरीक्षक रैंक के अधिकारी द्वारा जांच कर प्रभावी निरोधात्मक कार्यवाही की जाएगी । जांच से यदि किसी संज्ञेय अपराध का घटित होना पाया जाता है तो तत्काल संज्ञेय अपराध में तरमीम कर थाना प्रभारी के आदेशानुसार नियमानुसार विवेचना की जाएगी । यदि जांच से किसी संज्ञेय अपराध का घटित होना  नही पाया जाता है तो विवेचना  न्यायालय के आदेश से ही की जाएगी। असंज्ञेय अपराध की विवेचना न्यायालय के आदेश के बिना नही की जाएगी ।

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यदि अपराध संज्ञेय है तो  थाना प्रभारी के आदेशानुसार नियमानुसार विवेचना की जाएगी ।

सुनील कुमार  बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश A.I.R.1977 S.C.940 के अनुसार टेलीफोन से भी प्रथम सूचना दी जा सकती है ।टेलीफोन से मिलने वाली  सूचना लेखबद्ध कर अन्वेषण प्रारम्भ किया जाना विधि सम्मत है ।

स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश बनाम बल्लभदास व अन्य A.I.R.1985 S.C.1384 के अनुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट विस्तृत दस्तावेज नही है ।इसमें मात्र घटना का सार अंकित किया जाता है।

किशनचंद्र मंगल  बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान A.I.R. 1982 S.C.1511के अनुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट में निरपेक्ष रूप से यह आवश्यक नही है कि अभियुक्त का नाम लिखा ही जाए ।यदि अभियुक्त कोई राजकीय कर्मचारी है तो उसके पदनाम का उल्लेख ही पर्याप्त है।

बलदेव सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब A.I.R.1996 S.C.372 के अनुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट कोई सारभूत साक्ष्य नही है।मात्र प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर अभियुक्त को दोष सिद्ध नही किया जा सकता ।प्रथम सूचना रिपोर्ट में अंकित तथ्यों को न्यायालय में सिद्ध किया जाना आवश्यक है ।

प्रार्थिचन्द बनाम  स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश A.I.R. 1989 S.C.702 के अनुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट अबिलम्ब दर्ज करानी चाहिए किन्तु यदि उसमें कुछ युक्तियुक्त विलम्ब हो जाता है तो वह क्षम्य है ।

स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश बनाम ज्ञान चंद A.I.R.2001 S.C.2075 के अनुसार केवल प्रथम सूचना रिपोर्ट  विलम्ब से दर्ज कराने के आधार पर अभियोजन पक्ष के मामले को अविश्वस्नीय नही माना जाना चाहिए खास तौर से तब जब विलम्ब का कारण दर्शाया गया हो ।

प्रथम सूचना रिपोर्ट का विधिक महत्व :-

1-केिसी अपराध की घटना एवम प्रथम सूचना रिपोर्ट के बीच के समय का अंतर जतन कम होगा उतना ही उसे सही माने जाने का आधार बनता है । रिपोर्ट में अनावश्यक विलम्ब न्यायालय में इसका महत्तव कोकम कर देता है ।

2-धारा 145/157 साक्ष्य अभिनियंम के अनुसार परतज्म सूचना रिपोर्ट आधार वाला साक्ष्य नही है। न्यायालय में इसका प्रयोग वादी का समर्थन में या विरोध में किया जा सकता है ।777

3- धारा -32(1) साक्ष्य अधिनियम के अनुसार यदि प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखाने वाला आदमी  बाद में मर जाता है तो उसकी मृत्यु से संबंधित प्रथम सूचना रिपोर्ट का भाग मान्य होगा ।

4- यदि किसी अभियुक्त द्वारा थाना पर आकर रिपोर्ट लिखाई जाती है तो रिपोर्ट में उसका अपराध स्वीकार किये जाने के तथ्य के सिवाय उसका खुद थाना पर घटना के बाद आना व रिपोर्ट लिखाना मान्य होगा। (धारा 8 साक्ष्य अधिनियम )।

थाना पर प्रथम सूचना कौन कौन दे सकता है :-

(1) वह व्यक्ति जिसका साथ घटना घटी हो ।

(2) वह व्यक्ति जो घटना का बारे में जानकारी रखता है ।

(3) अभियुक्त खुद थाना में आकर अपने कृत्य की सूचना दे सकता है ।

(4) पुलिस द्वारा उन अपराधों में जिनमे उनके द्वारा किसी व्यक्ति को अपराध करते हुए पकड़ा जाता है ।

संज्ञेय अपराध की प्रथम सूचना रिपोर्ट तैयार करते समय ध्यान देने वाली बातें :-

(1) रिपोर्ट चाहे लिखित हो या मौखिक निर्धारित पोलिस फार्म पर तीन प्रतियो में लिखी जाएगी ।

(2) रिपोर्ट का सारांश जी0डी0 में तत्काल लिखा जाएगा।

(3) रिपोर्ट लिखने व जी0डी0 में सारांश यानी कायमी मुकदमा लिखने का समय एक ही होगा ।

(4) मौखिक रिपोर्ट में रिपोर्ट लेखबद्ध करने का बाद रिपोर्ट करने वाले को रिपोर्ट पढ़कर सुनाई जाय तथा उसका नॉट नीचे लगाया जायेगा ।

(6) यदि रिपोर्ट लिखित है और कोई बिंदु छूटा है तो उस रिपोर्ट को लेखबद्ध करके नीचे प्रश्नोत्तर कर के उसे पूरा किया जाएगा।

(7) रिपोर्ट करने में यदि विलम्ब हुआ है तो रिपोर्ट करने वाले से उसका कारण पूछ कर प्रथम सूचना रिपोर्ट में लिखा जाएगा ।

(8) यदि किसी अपराध में सम्पति चोरी या लुटी गयी है तो वादी से पूछ कर सम्पत्ति का पूर्ण विवरण प्रथम सूचना रिपोर्ट में अंकित अवश्य किया जाए ।

(9) यदि घटना हत्या की है तो उसका उद्देश्य या कारण पूछ कर  अवश्य अंकित किया जाए।

(10) घटना का समय व स्थान सही सही पूछ के लिखा जाएगा।

(11) यदि सूचना टेलीग्राम द्वारा दी गयी है तो टेलीग्राम भेजने वाले से पूछ तांछ कर के व हस्त्ताक्षर प्राप्त कर के प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखी जाएगी।

(12) गंभीर अपराधों में स्पेशल रिपोर्ट तत्काल भेजी जाये । (पुलिस रेगुलेशन पैरा 101 के अनुसार )

(13) यदि अभियुक्त नामांकित नही है तो कौन कौन गवाह सामने आने पर पहचान करेगे पूछ कर प्रथम सूचना रिपोर्ट में अंकित किया जाये ।

(14) यदि सम्पत्ति पर पहचान का चिन्ह नही है तो घर का कौन कौन सदस्य सामने आने पर संपत्ति की पहचान करेगे रिपोर्ट में अंकित किया जाये ।

(15) थाना क्षेत्र में रहने पर यदि थाना प्रभारी को संज्ञेय अपराध की सुचना मिलती है वह तत्काल विवेचना आरम्भ करना चाहता है  तो वह रिपोर्ट को लिख कर उस व्यक्ति का हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान प्राप्त कर के उसे लिखित रिपोर्ट के रूप में थाना भेज देगा । (पुलिस रेगुलेशन पैरा 100 के अनुसार)

(16) यदि अभियुक्त अज्ञात लिखाये गए है तो उनके शरीर की बनावट, उम्र,कपड़े व भाषा आदि को पूछ कर अवश्य लिखा जाएगा ।

(17) यदि घटना रात्रि की ही तो प्रकाश का स्रोत पूछ कर अवश्य लिख जाएगा ।

(18) मौखिक रिपोर्ट करने वाले का शब्दों को अपने शब्दों में परिवर्तित न किया जाये।

(19) रिपोर्ट करने वाले के हस्ताक्षर या निशानी अंगूठा रिपोर्ट दर्ज करने के बाद अवश्य प्राप्त किया जाये ।

(20) रिपोर्ट स्पष्ट रूप से लेखबद्ध की जाए ।

(21) अभियुक्तो के नाम पता सही लिखा जाए ।

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