Saturday, September 19, 2020
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आरक्षण का इतिहास

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भारत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों एवं पिछड़े वर्गों के आरक्षण की व्यवस्था देश की काफी हिस्सों में स्वतन्त्रता के पहले से ही प्रचलित थी । आरक्षण का संक्षिप्त इतिहास निम्नवत है :–

  1. वर्ष 1882 ई0-महात्मा ज्योतिबा फुले ने सरकारी नौकरियों में समानुपातिक आरक्षण की मांग किया ।
  2. वर्ष 1902 ई0- महाराष्ट्र की कोल्हापुर रियासत में छत्रपति शाहूजी महाराज द्वारा सरकारी नौकरियों में आरक्षण के सम्बन्ध में अधिसूचना जारी की गई ।
  3. वर्ष 1908 ई0- ब्रिटिश शासन ने शासन में कम हिस्सेदारी वाली जातियों  व समुदायों के पक्ष में आरक्षण की व्यवस्था किया ।
  4. वर्ष 1935 ई0- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने वंचित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र आवंटित करने हेतु संकल्प पारित किया जिसे पूना पैक्ट के नाम से जाना जाता है ।
  5. वर्ष 1995 ई0- गवर्नमेंट आफ इण्डिया एक्ट 1935 में आरक्षण के प्रावधान किए गए ।
  6. वर्ष 1942 ई0- डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने अखिल भारतीय दलित वर्गों के संघ की स्थापना की तथा अनुसूचित जातियों के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में आरक्षण की मांग की ।
  7. वर्ष 1947 ई0- भारत स्वतन्त्र हुआ । डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर को भारतीय संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया । भारतीय संविधान में धर्म, जाति, लिंग और जन्म के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव का विरोध किया गया, सभी नागरिकों को अवसर की समानता का अधिकार देते हुए सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं  शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए वर्गों तथा अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोगों के उत्थान के लिए कुछ विशेष उपबन्ध  शामिल किए गए ।  अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु उनके लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया गया । उक्त व्यवस्था पहले 10 साल के लिए थी जो बाद में संविधान संशोधन द्वारा आगे बढ़ाई जाती रही ।
  8. वर्ष 1953 ई0- सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का आंकलन करने के लिए कालेलकर आयोग का गठन किया गया जिसके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सम्बन्धी संस्तुतियों को स्वीकार किया गया तथा अन्य पिछड़ी जातियों के सम्बन्ध में की गई संस्तुतियों को अस्वीकार कर दिया गया ।
  9. वर्ष 1979 ई0- सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं तथा शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का आकलन करने हेतु मण्डल कमीशन का गठन हुआ जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या का आकलन करते हुए करने हेतु वर्ष 1930 ई0 की जनगणना के आधार माना, जिसके अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या का 52% माना गया तथा अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में 1257 जातियां / उपजातियां शामिल की गई ।
  10. वर्ष 1980 ई0- मण्डल कमीशन द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी जिसमें प्रचलित आरक्षण कोटे में परिवर्तन करके उसे 22% से बढ़ाकर 49.5% करने की संस्तुति की गयी ।
  11. वर्ष 1990 ई0- विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार द्वारा मण्डल कमीशन की संस्तुतियों को लागू कर दिया गया ।
  12. वर्ष 1992 ई0- उच्चतम न्यायालय द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए किए गए आरक्षण को वैध ठहराया गया । 77 वें संविधान संशोधन द्वारा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सरकारी नौकरियों में पदोन्नति हेतु आरक्षण का प्रावधान किया गया  जिसे संविधान में अनुच्छेद 16 (4)(a) में शामिल किया गया ।
  13. वर्ष 2005 ई0- उच्चतम न्यायालय द्वारा 12 अगस्त 2005 को अपने एक निर्णय में घोषणा की गयी कि राज्य द्वारा अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों या गैर राजकीय सहायता प्राप्त संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती । 93 वें संविधान संशोधन द्वारा उच्चतम न्यायालय के उक्त निर्णय को पलटते हुए प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में भी अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान कर दिया गया ।
  14. वर्ष 2006 ई0- केन्द्रीय शासकीय शिक्षण संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई । वर्ष 2007 ई0- उच्चतम न्यायालय द्वारा केन्द्रीय शासकीय शिक्षण संस्थानों में आरक्षण पर रोक लगा दी गयी ।
  15. वर्ष 2008 ई0- उच्चतम न्यायालय द्वारा 10 अप्रैल 2008 को अपने निर्णय में शासकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27% आरक्षण को वैध ठहराया गया ।
  16. वर्ष 2019 ई0- भारत सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के पिछड़े व्यक्तियों के लिए 10% आरक्षण लागू किया ।

 

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