Monday, September 21, 2020
Home Blog INDIAN TAX SYSTEM

INDIAN TAX SYSTEM

- Advertisement -

INDIAN TAX SYSTEM को हिन्दी में भारतीय कर प्रणाली कहते हैं । राज्य सरकार द्वारा सरकार चलाने के लिए आधारभूत आवश्यकताओं के अनुरूप व्यक्तियों या विविध संस्थाओं से लिए जाने वाले अधिभार या धन को कर (Tax) कहते हैं कर सरकार की आय का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है । कर लोगों द्वारा किया जाने वाला अनिवार्य भुगतान है जिसे भुगतान न किए जाने पर कानून द्वारा दण्डित किए जाने का भी प्रावधान है । कर प्राय: धन के रूप में लगाया जाता है परन्तु धन के तुल्य श्रम के रूप में भी लगाया जा सकता है । कर दो प्रकार के  हो सकते हैं –   प्रत्यक्ष कर तथा अप्रत्यक्ष कर ।

कर लगाने के उद्देश्य आय प्राप्त करना, साधनों का आवंटन करना, असमानता को कम करना, नियमन तथा नियन्त्रण करना, आर्थिक विकास करना तथा बढती कीमतों पर नियन्त्रण करना ।

- Advertisement -

करों का वर्गीकरण –

(1)स्वरूप के आधार पर  (2) तरीके के आधार  (3) मात्रा के आधार पर तथा  (4) मूल्यांकन के आधार पर ।

- Advertisement -

(1)स्वरूप के आधार पर स्वरूप के आधार पर कर दो प्रकार के होते हैं –  प्रत्यक्ष कर तथा अप्रत्यक्ष कर ।

प्रत्यक्ष कर वे कर हैं जो विधिगत रूप से जिस पर लगाए जाते हैं उसे ही भुगतान करना पड़ता है । जैसे- आय कर ।

अप्रत्यक्ष कर एक व्यक्ति पर लगाए जाते हैं जबकि पूर्णत: या आंशिक रूप से दूसरे व्यक्ति द्वारा दिए जाते हैं । जैसे-बिक्री कर सीमा कर आदि ।

(2)तरीके के आधारतरीके के आधार पर कर तीन प्रकार के होते हैं –  आनुपातिक कर,  प्रगतिशील कर,  प्रगतिगामी कर तथा अधोगामी कर ।

अनुपातिक कर का करदाता की आय से कोई सम्बन्ध नहीं होता तथा सम्पूर्ण आय पर एक दर से कर लगाया जाता है ।

प्रगतिशील कर प्रणाली में कर में परिवर्तन करदाता की आय के साथ होता है अर्थात् करदाता की आय जितनी अधिक होती है कर की दर उतनी अधिक होती है ।

प्रतिगामी कर  प्रणाली में करदाता की आय जितनी अधिक होती है कर की दर उतनी ही कम होती है ।

अधोगामी कर प्रणाली में एक निश्चित सीमा तक की आय तक कर की दर में वृद्धि होती है तथा उसके बाद आय में परिवर्तन के साथ कर की दर स्थिर हो जाती है ।

- Advertisement -

(3)मात्रा के आधार पर –  मात्रा के आधार पर कर दो प्रकार के होते हैं –   एक कर तथा बहु कर ।

एक कर प्रत्येक  माह या प्रत्येक वर्ष वसूल किया जाता है । जैसे – भूमि कर ।

बहु कर अनेक वस्तुओं पर एक साथ लगाए जाते हैं । जैसे –  उत्पादन कर, बिक्री कर आदि ।

(4) मूल्यांकन के आधार पर –  मूल्यांकन के आधार पर कर तीन प्रकार के होते हैं –  विशिष्ट कर,  मूल्यानुसार कर तथा दोहरे कर ।

विशिष्ट कर वस्तुओं के प्रकार तथा मात्रा के अनुसार लगाए जाते हैं । जैसे – कपड़े पर शुल्क कपड़े की लम्बाई के आधार पर लगाया जाता है ।

मूल्यानुसार कर वस्तु पर उसके मूल्य के अनुसार लगाए जाते हैं । जैसे –  निर्यात कर, आयात कर , वस्तु के मूल्य पर कर आदि ।

दोहरे कर एक ही व्यक्ति पर एक ही सेवा के लिए दो बार लगाए जाते हैं । जैसे –  यदि भारत का कोई व्यक्ति विदेश आय प्राप्त करता है तो उसे अपनी एक ही आय पर दो बार कर देना पड़ेगा एक तो विदेश में और दूसरा भारत में ।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

What is Solution In Science ?

विलयन क्या है ? यह दो या दो से अधिक पदार्थों का समांग मिश्रण है जो स्थायी एवं पारदर्शक होता है । विलेय कणों का...

अर्थशास्त्र (ECONOMICS)

अर्थशास्त्र क्या है ? सामाजिक विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय एवं उपभोग का अध्ययन किया जाता है...

विशेषज्ञों की राय के मूल्यांकन के सम्बन्ध में माननीय न्यायालयों के विभिन्न निर्णय (Various Judgements of Hon,ble Courts in related valuation of Expert...

रुकमानन्द अजीत सारिया बनाम उषा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड ए0 आई0 आर0 1991 एन0 ओ0 सी0 108 गुवाहाटी में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय...

शिक्षाशास्त्र (PEDAGOGY)

शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) क्या है ? शिक्षण कार्य की प्रक्रिया के भलीभांति अध्ययन को शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) या शिक्षण शास्त्र कहते हैं । इसके अन्तर्गत अध्यापन की...
Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes