अधातु

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1 अधातु क्या है ?

अधातु क्या है ?

आधुनिक आवर्त सारणी के अनुसार 10 ठोस, 11 गैस तथा 1 द्रव अधातु है । द्रव अवस्था में पाई जाने वाली अधातु ब्रोमीन है  । अधातुएं ऊष्मा तथा विद्युत की कुचालक होती है परन्तु ग्रेफाइट एक ऐसी अधातु है जो ऊष्मा तथा विद्युत की चालक होती है ।

कुछ प्रमुख अधातुएं तथा उनके उपयोग –

 हाइड्रोजन – 

हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं – प्रोटियम (1H1),  ड्यूटीरियम(1H2)  तथा ट्राइटियम(1H3) ।

ड्यूटीरियम  के आक्साइड को भारी जल कहा जाता है जिसका सूत्र  D2O है । यह 3.8 डिग्री सेल्सियस पर जम जाता है । भारी जल की खोज 1932 ईस्वी में यूरी तथा पासबर्न ने किया था । साधारण जल के 7000 भागों में एक भाग भारी जल होता है ।

भारी जल के उपयोग –

  • ड्यूटी नियम तथा ड्यूटीरियम के यौगिक बनाने में ।
  • ट्रेसर के रूप में ।
  • न्यूट्रॉन मंदक के रूप में ।

मृदु जल क्या है ?

वह जल जो साबुन के साथ आसानी से झाग देता है उसे मृदु जल कहते हैं

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कठोर जल क्या है ?

वह जल जो साबुन के साथ कठिनाई से झाग देता है कठोर जल कहलाता है ।

जल की कठोरता कितने प्रकार की होती है तथा इसे कैसे दूर किया जाता है –

जल की कठोरता दो प्रकार की होती है –   1. अस्थाई कठोरता तथा  2.स्थाई कठोरता ।

अस्थाई कठोरता – इस अवस्था जल में कैल्शियम तथा मैग्नीशियम की बाइकार्बोनेट घुले होते हैं ।

अस्थाई कठोरता दूर करने के उपाय –  (1)  जल को उबालकर  ।  (2)  जल में  दूधिया बुझा हुआ चूना मिलाकर ।

स्थाई कठोरता –  इस अवस्था में जल में कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के सल्फेट, क्लोराइड, नाइट्राइट आदि लवण घुले होते हैं ।

स्थाई कठोरता दूर करने के उपाय –  जल में सोडियम कार्बोनेट डालकर उबालने से अस्थाई  तथा अस्थाई कठोरता दोनों प्रकार की कठोरता  दूर हो जाती है जिसे  परमम्यूटिट विधि कहते हैं ।

ऑक्सीजन – 

ऑक्सीजन के तीन समस्थानिक है–  (1)  8O16      (2)  8O17       (3)   8O18     ।

ओजोन –

यह ऑक्सीजन का एक अपरूप है जो समुद्र तट से करीब 30- 32 किलोमीटर की ऊंचाई पर होती है तथा सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है ।

नाइट्रोजन – 

वायुमण्डल का 78% भाग नाइट्रोजन है । नाइट्रोजन का प्रमुख यौगिक अमोनिया है जिसका निर्माण हैबर विधि से किया जाता है ।

दलहनी फसलों में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कौन करता है –

दलहनी फसलों की जड़ों में राइजोबियम नामक जीवाणु पाया जाता है जो नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है ।

नाइट्रोजन के उपयोग – (1) द्रव नाइट्रोजन का उपयोग जैव पदार्थों के लिए प्रशीतक के रूप में भोज्य पदार्थों को जमाने में तथा निम्न ताप पर शल्य चिकित्सा के लिए किया जाता है ।

(2) लोहा तथा इस्पात उद्योग में तनुकारक के रूप में ।

नाइट्रोजन के यौगिक अमोनिया का उपयोग – 

  • अमोनियम लवण बनाने में ।
  • विस्फोटक बनाने में ।
  • बर्फ बनाने में ।
  • नाइट्रिक अम्ल बनाने में ।
  • यूरिया, अमोनियम सल्फेट इत्यादि उर्वरक बनाने में ।
  • सोडियम कार्बोनेट तथा सोडियम बाई कार्बोनेट बनाने में ।
  • कृत्रिम रेशे बनाने में ।

फास्फोरस – 

यह हड्डियों तथा जीव कोशिकाओं (DNA) में पाया जाता है । फास्फोरस तीन प्रकार का होता है –  श्वेत फास्फोरस,   लाल फास्फोरस  तथा काला फास्फोरस ।

सल्फर – 

यह पृथ्वी के पटल में 0.05 प्रतिशत पाया जाता है । इसका महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायन सल्फ्यूरिक अम्ल है जो 98% शुद्ध होता है । सल्फ्यूरिक अम्ल का फार्मूला H2SO4 है ।

सल्फ्यूरिक अम्ल के उपयोग – 

  • अमोनियम सल्फेट सुपर फास्फेट उर्वरक बनाने में ।
  • डिटर्जेंट उद्योग में ।
  • स्टोरेज बैटरी बनाने में ।
  • पेट्रोलियम शोधन में।
  • पेन्ट तथा रंगों के संश्लेषण में ।
  • प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में ।

क्लोरीन –  

यह हैलोजन समूह वर्ग 7 (ए) का तत्व है जिसका उपयोग  औषधियों तथा कीटनाशी के  संश्लेषण में किया जाता है ।

फ्लोरीन –  

यह हैलोजन समूह वर्ग 7 (ए) का तत्व है जिसका उपयोग  UF6  व  SF6 बनाने मे किया जाता है ।

ब्रोमीन –

यह हैलोजन समूह वर्ग 7 (ए) का तत्व है ।

ब्रोमीन के उपयोग – 

(1)  इसका उपयोग सिल्वर ब्रोमाइड बनाने में किया जाता है जिसकी आवश्यकता फोटोग्राफी में होती है

(2) इसका उपयोग एथिलीन ब्रोमाइड के संश्लेषण में किया जाता है जिसे शीशाकृत पेट्रोल में मिलाते हैं ।

निष्क्रियगैस – 

इन्हें आवर्त सारणी के 0 वर्ग में रखा गया है, इनकी संख्या 6 है । ये है –  हीलियम, नियॉन, क्रिप्टान, जीनान, आर्गन, तथा रेडान  । इन तत्वों को अक्रिय  गैस या उत्कृष्ट गैस भी कहा जाता है । आर्गन गैस की खोज रैम जे ने किया था ।

स्ट्रेंजर गैस किसे कहते हैं-

जीनान गैस को स्ट्रेंजर गैस भी कहा जाता है जो जल में घुलनशील है ।

नियॉन गैस के उपयोग – 

(1) विसर्जन लैंम् व वायुयान ट्यूबों में

(2) हवाई अड्डों पर विमान चालकों को संकेत देने के लिए ।

(3)विद्युत बल्ब में ।

हीलियम के उपयोग – 

(1) गुब्बारों में ।

(2) मौसम सम्बन्धी अध्ययन के लिए । 

(3) नाभिकीय भट्टी में । 

(4) गोताखोरों द्वारा अधिक गहराई में सांस लेने के लिए हीलियम तथा आक्सीजन के मिश्रण का प्रयोग किया जाता है ।  

(5) अस्पतालों में कृत्रिम सांस लेने के लिए ऑक्सीजन के साथ हीलियम गैस मिलाई जाती है ।

रेडान का उपयोग – 

रेडान के उपयोग रेडियो थेरेपी के रूप में कैन्सर के उपचार में किया जाता है  ।

आर्गन का उपयोग –

आरगन का उपयोग आर्क वेल्डिंग में निष्क्रिय वातावरण उत्पन्न करने तथा बिजली के बल्ब  भरने में किया जाता है  ।

क्रिप्टान का उपयोग – 

(1) लेजर तथा विद्युत बल्ब बनाने में ।

(2) फोटोग्राफी में ।

कुछ अन्य धातु, अधातु तथा उनके यौगिकों का उपयोग –

आयोडीन का उपयोग– 

(1) कीटाणु नाशक के रूप में ।   

(2) रंग उद्योग में ।   

(3) टिंक्चर आयोडीन बनाने में । 

(4)  औषधियों के उत्पादन में ।

ब्रोमीन का उपयोग – 

(1) टिंचर गैस बनाने में प्रतिकारक के रूप में ।

 (2) रंग उद्योग में 

(3)  औषधि बनाने में ।

 हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का उपयोग – 

(1) क्लोरीन बनाने में

(2) अम्लराज बनाने में ।   

(3) रंग बनाने में ।

सल्फर डाइऑक्साइड का उपयोग

(1) ऑक्सीकारक के रूप में ।

(2) विरंजक के रूप  में ।

सल्फर का उपयोग – 

(1) कीटाणु नाशक के रूप में ।

(2)  औषधि के रूप में । 

(3)  बारूद बनाने में ।

फेरस ऑक्साइड का उपयोग – 

इसका उपयोग हरा कांच बनाने में किया जाता है  ।

 फेरस सल्फेट का उपयोग – 

(1) स्याही बनाने में ।  

(2)  रंग उद्योग में ।

अमोनिया का उपयोग – 

(1)  बर्फ फैक्ट्री में ।   

(2) प्रतिकारक के रूप में ।

नाइट्रस ऑक्साइड का उपयोग –  

इसका उपयोग शल्य चिकित्सा में किया जाता है ।

प्रोड्यूसर गैस का उपयोग – 

(1) भट्ठी गर्म करने में

(2) धातु निष्कर्षण में ।

लाल फास्फोरस का उपयोग

इसका उपयोग दियासलाई उद्योग में किया जाता है ।

सफेद फास्फोरस का उपयोग – 

(1)  चूहा मारने में ।   

(2) दवा बनाने में ।

वाटर गैस का उपयोग – 

(1) वेल्डिंग के कार्य में 

(2) ईंधन के रूप में ।

कोल गैस का उपयोग – 

(1) निष्क्रिय वातावरण तैयार करने में

(2)  ईंधन के रूप में ।

कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग – 

(1) सोडा वाटर बनाने में   

(2) आग बुझाने में ।

मैग्नीशियम कार्बोनेट का उपयोग – 

(1) दन्त मंजन बनाने में  ।

(2)  दवा बनाने में  ।

(3) जिप्सम लवण बनाने में ।

कैल्शियम सल्फेट या जिप्सम का उपयोग – 

(1) प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने में  ।

(2) सीमेन्ट उद्योग में ।

प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग – 

(1) शल्य चिकित्सा में पट्टी बांधने में

(2)  मूर्ति बनाने में ।

ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग – 

(1) कीटनाशक के रूप में । 

(2) विरंजक के रूप में 

(3) क्लोरोफॉर्म बनाने में ।

ग्रेफाइट का उपयोग – 

(1) इलेक्ट्रोड बनाने में  ।

(2) लोहे के बने पदार्थ पर पालिश करने में ।

हीरा का उपयोग – 

(1) आभूषण निर्माण में

(2) कांच काटने में ।

फिटकरी का उपयोग – 

(1) जल शुद्धीकरण में ।   

(2) कपड़ों की रंगाई में 

(3) चमड़ा उद्योग में ।

मरक्यूरिक ऑक्साइड का उपयोग – 

(1) जहर के रूप में  ।

(2) मलहम बनाने में ।

मैग्नीशियम का उपयोग – 

(1)  फ्लैश बल्ब बनाने में  ।

(2) थर्माइट बिल्डिंग बनाने में ।

कापर सल्फेट या नीला थोथा का उपयोग – 

(1)  कापर के शुद्धीकरण में 

(2) कीटाणु नाशक के रूप में  ।

(3) विद्युत सेल में ।

क्यूप्रिक क्लोराइड का उपयोग – 

(1) जल शुद्धीकरण में 

(2) ऑक्सीकारक के रूप में ।

क्यूप्रिक आक्साइड का उपयोग  

(1) ब्ल्यू एवं ग्रीन ग्लास निर्माण में ।   

(2) पेट्रोलियम के शुद्धिकरण में ।

क्यूपरस ऑक्साइड का उपयोग –  

इसका उपयोग लाल क्लास के निर्माण में किया जाता है  ।

कापर का उपयोग का उपयोग – 

(1) विद्युत तार बनाने में 

(2) बर्तन बनाने में ।  

(3)  ब्रास तथा ब्रांज बनाने में ।

पोटेशियम परमैंगनेट का उपयोग – 

इससे लाल दवा के नाम से जाना जाता है जो जल को कीटाणु रहित करता है ।

सोडियम बाई कार्बोनेट या खाने का सोडा का उपयोग

 (1) बेकरी उद्योग में । 

(2) प्रतिकारक रूप में । 

(3) अग्निशामक यन्त्र में ।

हाइड्रोजन का उपयोग – 

(1) अमोनिया उत्पादन में । 

(2) कार्बनिक यौगिकों के निर्माण में ।

द्रव हाइड्रोजन का उपयोग – 

इसका उपयोग रॉकेट ईंधन के रूप में किया जाता है ।

हाइड्रोजन पराक्साइड का उपयोग – 

(1) कीटाणु नाशक के रूप में । 

(2) ऑक्सीकारक के रूप में । 

(3) चमड़ा, रेशम आदि के विरंजक के रूप में ।

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