भारत के राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियां

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भारतीय संविधान द्वारा भारत के राष्ट्रपति को निम्नलिखित कार्यकारी शक्तियां प्रदान की गई हैं –

प्रशासन सम्बन्धी शक्तियां – भारत सरकार के शासन प्रशासन सम्बन्धी समस्त कार्य राष्ट्रपति के नाम पर ही किए जाते हैं । भारतीय संविधान द्वारा भारत के राष्ट्रपति को प्रशासन सम्बन्धी निम्नांकित शक्तियां प्रदान की गई हैं –

  • भारत के राष्ट्रपति को भारत संघ के केन्द्र शासित प्रदेशों एवं अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन करने की शक्तियां प्राप्त हैं, वह भारत के किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति क्षेत्र घोषित कर सकता है ।
  • भारत का राष्ट्रपति स्वयं द्वारा नियुक्त किए गए प्रशासक के माध्यम से केन्द्र शासित प्रदेशों का प्रशासन चलाता है ।
  • भारत का राष्ट्रपति केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार तथा उसके मन्त्रियों के लिए नियम बना सकता है ।
  • राष्ट्रपति को सभी महत्वपूर्ण मुद्दों एवं मन्त्रिपरिषद की कार्यवाही के बारे में सूचना पाने का अधिकार है । प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई सूचना उसे प्रदान करें ।

नियुक्ति सम्बन्धी शक्तियां –

  • राष्ट्रपति भारत के प्रधानमन्त्री की नियुक्ति करता है तथा प्रधानमन्त्री की सलाह पर अन्य मन्त्रियों की नियुक्ति करता है ।
  • भारत की महानियन्त्रक एवं लेखा परीक्षक की नियुक्ति करता है ।
  • भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति तथा उसके वेतन का निर्धारण करता है ।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करता है ।
  • संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा उसके सदस्यों की नियुक्ति करता है ।
  • अन्तर्राज्यीय परिषद की नियुक्ति करता है ।
  • अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग तथा अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की नियुक्ति करता है ।
  • भारत के सभी राज्यों के राज्यपाल की नियुक्ति करता है ।
  • उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है तथा उसकी सलाह पर अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है । यदि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त है या मुख्य न्यायाधीश अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तब राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से किसी न्यायाधीश को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करता है ।
  • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है तथा उसकी सलाह पर उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है । यदि उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त है या मुख्य न्यायाधीश अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तब राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से किसी न्यायाधीश को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करता है ।
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