भारत के राष्ट्रपति की वित्तीय तथा न्यायिक शक्तियां 

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भारत के राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियां –

  • केन्द्र और राज्यों के मध्य राजस्व के बंटवारे के लिए राष्ट्रपति प्रत्येक 05 वर्ष पर वित्त आयोग का गठन करता है ।
  • वित्त विधेयक को संसद में प्रस्तुत करने  से पूर्व राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति दिया जाना आवश्यक है ।
  • अनुदान की मांग किए जाने पर राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक है ।
  • किसी अदृश्य व्यय के लिए राष्ट्रपति भारत की संचित निधि से अग्रिम भुगतान की व्यवस्था कर सकता है ।

भारत के राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियां

  • उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है तथा उसकी सलाह पर अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है । यदि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त है या मुख्य न्यायाधीश अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तब राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से किसी न्यायाधीश को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करता है ।
  • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है तथा उसकी सलाह पर उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है । यदि उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त है या मुख्य न्यायाधीश अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तब राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से किसी न्यायाधीश को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करता है ।
  • राष्ट्रपति अपने निर्णय, कार्य तथा दायित्व के सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सलाह ले सकता है परन्तु सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है ।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 72 के अनुसार- भारत के राष्ट्रपति को किसी अपराधी के क्षमादान की निम्नांकित शक्तियां प्राप्त हैं ।
  • अपराधी को सजा मुक्त कर सकता है ।
  • विशेष मानवीय परिस्थिति जैसे- विकलांगता, गर्भावस्था आदि के आधार पर अपराधी के दण्ड पर विराम लगा सकता हैं ।
  • दण्ड की मात्रा को कम कर सकता है ।
  • दण्ड के प्रकार को बदलकर दण्ड हल्का कर सकता हैं ।
  • मृत्युदण्ड पर अस्थाई रोक लगा सकता है जिससे अपराधी को क्षमा याचना का समय मिल सके ।
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