भारतीय राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां 

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भारतीय संविधान के अनुसार भारतीय राष्ट्रपति राष्ट्र तथा सरकार दोनों का औपचारिक प्रमुख होता है जिसे बहुत सी कार्यकारी, विधायी, वित्तीय, न्यायिक, सैन्य तथा आपातकालीन शक्तियां प्राप्त हैं । भारतीय संविधान द्रारा राष्ट्रपति को निम्नलिखित विधायी शक्तियां प्राप्त है –

संसद द्वारा पारित विधेयक के सम्बन्ध में शक्तियां –

कुछ विधेयक ऐसे हैं जिन्हें प्रस्तुत करने के पूर्व राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति लिया जाना आवश्यक है जैसे- वित्त विधेयक, राज्य की सीमा में परिवर्तन, नए राज्यों के गठन सम्बन्धी विधेयक आदि ।

संसद के दोनों सदनों द्वारा जब कोई विधेयक पारित करके स्वीकृति हेतु राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो राष्ट्रपति को अधिकार है कि यदि वह चाहे तो-

  • विधेयक पर अपनी स्वीकृति दे दे ,
  • विधेयक पर अपनी स्वीकृति सुरक्षित रख ले,
  • यदि विधेयक वित्त विधेयक नहीं है तो उसे पुनर्विचार हेतु संसद को वापस लौटा सकता है ।

पुनर्विचार हेतु वापस लौटाए गए विधेयक को संसद संशोधन के साथ या बिना संशोधन के पुन: पारित करती है तो राष्ट्रपति अपनी स्वीकृति देने के लिए बाध्य है ।

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राज्य विधायिका द्वारा पारित विधेयक के सम्बन्ध में शक्तियां –

जब राज्य विधायिका द्वारा कोई विधेयक पारित कर स्वीकृति हेतु राज्यपाल के पास भेजा जाता है तो राज्यपाल द्वारा स्वीकृति दिए जाने पर कानून बन जाता है । राज्यपाल को अधिकार है कि वह राष्ट्रपति से विचार-विमर्श के लिए उक्त विधेयक को सुरक्षित रख ले तब राष्ट्रपति को अधिकार है कि-

  • विधेयक पर अपनी स्वीकृति दे,
  • अपनी स्वीकृति सुरक्षित रखें,
  • राज्यपाल को यह निर्देश दे कि उक्त विधेयक को पुनर्विचार के लिए राज्य विधायिका को वापस लौटा दें ।
  • यदि राज्य विधायिका द्वारा उक्त विधेयक को संशोधन या बिना संशोधन के पारित करके पुन: स्वीकृति हेतु भेजा जाता है तब भी राष्ट्रपति स्वीकृति देने के लिए बाध्य नहीं है ।

अध्यादेश जारी करने के सम्बन्ध में राष्ट्रपति की शक्ति –

यदि संसद सत्र न चल रहा हो तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 123 के अनुसार राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है जिसका महत्व संसद द्वारा कानून बनाए गए कानून के बराबर होता है । संसद कि दोनों सदनों द्वारा 06 सप्ताह के अन्दर अनुमोदन किए जाने पर यह विधेयक कानून बन जाता है तथा 06 सप्ताह के अन्दर अनुमोदन न किए जाने पर स्वत: समाप्त हो जाता है ।

राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश की सीमाएं –

भारतीय संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार को कम या खत्म करने तथा संविधान में संशोधन करने हेतु यह अध्यादेश नहीं जारी किया जा सकता । यह अध्यादेश मात्र उन्हीं विषयों पर जारी किया जा सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है । इस अध्यादेश को पूर्व तिथि से प्रभावी नहीं माना जा सकता ।
संसद की बैठक एवं सत्र के सम्बन्ध में शक्तियां – प्रत्येक वर्ष तथा प्रत्येक आम चुनाव के बाद राष्ट्रपति संसद के प्रथम अधिवेशन को संबोधित करता है । किसी प्रस्ताव पर गतिरोध की स्थिति में संसद की संयुक्त बैठक बुला सकता है तथा स्थगित कर सकता है । लोकसभा को भंग कर सकता है ।

अन्य विधायी शक्तियां –

  • राज्यसभा में 12 सदस्य तथा लोकसभा में 2 सदस्य मनोनीत कर सकता है ।
    लोकसभा में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद खाली होने पर लोकसभा के किसी भी सदस्य को लोकसभा की अध्यक्षता का दायित्व सौंप सकता है ।
  • राज्यसभा में सभापति तथा उपसभापति का पद खाली होने पर राज्यसभा के किसी भी सदस्य को राज्यसभा की अध्यक्षता का दायित्व सौंप सकता है ।
  • सांसदों की योग्यता के मुद्दे पर चुनाव आयोग से परामर्श लेकर निर्णय लेना, केन्द्र शासित प्रदेशों में नियम विनियम बनाना आदि ।
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