Thursday, September 24, 2020
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अपराध के कारण

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(A)आर्थिक कारण – किसी व्यक्ति के जीवन मे आर्थिक स्थिति बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है ।आजकल अधिकांश अपराध प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में आर्थिक लाभ के लिए किए जाते हैं जिनका विस्तृत विवरण निम्नांकित है –

1- निर्धनता – निर्धनता प्रत्यक्ष रूप से सम्पत्ति सम्बन्धी अपराध से सम्बंधित है ।इनके पास सम्पत्ति का अभाव होने के कारण अवांछनीय व आपराधिक प्रवृति के लोगो के सम्पर्क में आने पर अवसर मिलते ही अपराध करने लगते हैं।

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2- बेरोजगारी – बेरोजगार व्यक्ति के सम्पत्ति की कमी एवं समय की बाहुल्यता रहती है । समय की बहुलता के कारण खाली पड़े दिमाग में कुविचार आने के कारण व्यक्ति अपराध कर बैठता है।

3- आर्थिक विषमता – जब समाज मे  कुछ व्यक्ति सम्पत्ति पर कब कर लेते हैं तो अधिकांश लोग गरीब एवं अभाव में रहते हैं जिसके कारण अपराध करते हैं।

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4-   व्यापार चक्र का चढ़ाव उतार – व्यापार में समृद्धि आने पर मादक द्रव्यों के सेवन , यौन अपराध  तथा मंडी आने पर गम्भीर सम्पत्ति  एवं शरीर सम्बन्धी अपराध बढ़ते हैं ।भारत जैसे कृषि प्रधान देश मे फसल अच्छी बुरी होने से भी इस तरह के अपराध घटते बढ़ते हैं ।

5- आर्थिक प्रतिस्पर्धा – आजकल लोग दुसरो की बराबरी करने के लिए अनुचित तरीकों से भी धन कमाना चाहते है  जिसके कारण दूसरों के हित अहित का ध्यान  नही रखते और अपराध करते हैं।

6- धन कमाने का लोभ – लोभ की कोई सीमा नही होती । व्यक्ति जल्द से जल्द लखपति, करोङ पति ,अरबपति,खरबपति बनने के लिए जालसाजी, रिस्वत, कालाबाजारी आदि अपराध करता है ।

(B) सामाजिक कारण – 

1- संगति – संगति किसी व्यक्ति के आचार विचार को पूर्णतया प्रभावित करती है ।जब कोई व्यक्ति अपराधी व्यक्तियोँ की संगत में आता है तो वह धीरे धीरे अपराध की ओर उन्मुख हो जाता है और अपराध करने लगता है ।

2- असंगठित समाज – सँगठित समाज मे अपराध कम और विघटित समाज मे अपराध अधिक होता है । सामाजिक विघटन का कुप्रभाव व्यक्ति तथा समाज के नैतिक स्तर पर पड़ता है । व्यक्ति भौतिकवादी ,स्वार्थपूर्ण एवं व्यक्तिवादी हो जाता है  जिसके कारण चोरी, डकैती ,घूसखोरी  आदि अपराध करता है ।

3- वर्ग संघर्ष – वर्ग संघर्ष हितों के अंतर तथा भौतिक मतभेद के कारण होते हैं ।उच्च वर्ग के पास संसाधनों की प्रचुरता एवं निम्न वर्ग के पास संसाधनों का अभाव होता है ।निम्न वर्ग उच्च वर्ग की स्थिति पाना चाहता है और उच्च वर्ग अपनी वर्तमान स्थिति बनाये रखना चाहता है जिसके कारण समाज मे कम्पटीशन हो जाता है  तथा लोग अपराध करने लगते हैं ।

4- सामाजिक संस्थायें –

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(a) किसी समाज की पहली महत्त्वपूर्ण संस्था परिवार है ।पारिवारिक संगठन अस्त व्यस्त होने से परिवार में कलह, हिंसा, अनैतिक आचरण व मादक द्रव्यों के सेवन के कारण अपराध को बढ़ावा मिलता है।

(b) शिक्षा स्थल – शिक्षा का उद्देश्य वयक्तित्व का विकास करना है वर्तमान में शिक्षा अपने उद्देश्यों की पूर्ति में विफल है जिसके कारण अपराध घटित होते हैं ।

(c)  मनोरंजन के साधन – वर्तमान में टेलीविजन व सिनेमा में दिखाए जा रहे अश्लीलता, हिंसात्मक अपराध, एवं परिवारिक झगड़ो के दृश्य हमारी सांस्कृतिक विरासत को धीरे धीरे समाप्त कर रहे  हैं तथा युवा वर्ग की मानसिकता पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं जिसके कारण अपराध घटित हो रहे हैं।

5- सामाजिक कुरीतियाँ – आज कल समाज मे व्याप्त विभिन्न कुरीतियाँ एवं उनके कारण घटित होंने वाले अपराध निम्नलिखित हैं –

नैतिक पतन – व्यभिचार, अपहरण, ब्लात्कार ,छेड़छाड़ आदि।

दहेज की मांग – दहेज हत्याएं।

जातिगत भेदभाव – साम्प्रदायिक व जातिगत दंगे आदि।

(C) मनोवैज्ञानिक कारण :-

1- मानसिक हीनता –

* जड़ बुद्धि – ऐसे व्यक्ति मूर्ख होते हैं  जो कि विनम्र एवं उदासीन भी हो सकते हैं परन्तु प्रायः उत्तेजक एवं हिंसक होते हैं जिसके  कारण अपराध  करते है ।इन्हें आपराधिक कृत्य का ज्ञान नही होता । ये अपने हिंसक स्वभाब के कारण अपराध करते हैं ।

* अल्प बुद्धि – ऐसे लोगो की बुद्धि 50 प्रतिशत होती है ।इनका व्यवहार सामान्य नही होता ।  इनसे आसानी से आपराधिक कृत्य कराये जा सकते हैं ।

* मन्द बुद्धि – इनमे थोड़ी बहुत सीखने की जिज्ञासा होती है लेकिन इनका ज्ञान त्रुटिपूर्ण होता है । ऐसे लोग परिस्थितियों के अनुसार खुद को समायोजित नही कर पाते और अपराध कर बैठते हैं ।

2- मानसिक रोग – ऐसे लोगो को दण्ड की नही दवा इलाज की जरूरत होती है। इनमें आत्मविश्वास की कमी होती है इसीलिए ये असामान्य तथा आपराधिक आचरण करते हुये अपराध करते हैं ।

3- शारीरिक दोष – शारीरिक दोष जैसे – गूँगा होना, बहरा होना, सफेद दाग धब्बे  व भद्दे चेहरे वाले लोग समाज मे अपने प्रति घृणा का भाव होने का कारण बदले की भावना से अपराध करते है।

(D)  राजनैतिक  कारण –

1- राजनैतिक दल – प्रत्येक देश मे राजनैतिक दलों की संख्या एक से अधिक होती है जो सत्ता को प्राप्त करने के लिए लोगोँ को आपस मे लड़ाते हैं । जनता को सत्तारूढ दल के खिलाफ भड़काते हैं , चुनाव में अपराधियों का सहारा लेते है, हड़तालें व बन्द का आयोजन कराते हैं जिससे हिंसात्मक घटनायें घटती हैं। अपराधियों को संरक्षण देते हैं। अपराधी राजनैतिक दलों के संरक्षण में अपराध करते हैं।

2- राजनैतिक संघर्ष – अनेक राजनैतिक दल होने के कारण उनमे संघर्ष की भावना होती है, जनता के लोग गुटबंदी के शिकार होते हैं।राजनैतिक दल अपने गुट के लोगोँ को नैतिक अनैतिक बल देते हैं जिसके कारण अपराध बढ़ते हैं ।

3- निर्वाचन  – राजनेता भ्रष्ट तरीकों से धन एकत्रित करके चुनाव लड़ते है  जिनके संरक्षण में फर्जी वोट डालने,जबरन वोट डलवाने, बूथ कैप्चरिंग आदि अपराध घटित होते हैं।

4- राजनैतिक नेताओ का अनुचित हस्तक्षेप – जब राजनेता का कोई व्यक्ति किसी अपराध में गिरफ्तार होता है तो राजनेता उसे छुडाने के लिए पुलिस पर अनुचित दबाव डालते हैं जिससे भरस्टाचार फैलता है,अपराधियों के मनोबल बढ़ते है जिससे अपराध बढते हैं।

(E)धार्मिक कारण – 

1- धार्मिक विचारों में कट्टरता – प्रत्येक धर्म के कट्टरवादी लोग अपने धर्म को श्रेष्ठ मानते हैं, दूसरे धर्म को गलत एवं विरोधी मानते हैं  तथा छोटी छोटी बातों को सांप्रदायिक झगड़े का रूप दे देते हैं। साम्प्रदायिक झगड़े प्रायः निम्न कारणों से उतपन्न होते हैं –

* दो धर्म के लोगो मे किसी बात को लेकर मारपीट होना।

* किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे धर्म की महिला से शादी कर लेना, छेड़छाड़ करना आदि।

* हिन्दू व्यक्ति द्वारा होली में मुस्लिम व्यक्ति पर रंग फेंक देना।

2- धर्म का प्रयोग निजी स्वार्थ पूर्ति में करना- कुछ लोग धर्म के नाम पर लोगों को उकसाकर उनके बीच खुद को नेता के रूप में स्थापित करते हैं ताकि राजनेताओं से उनके गहरे सम्बन्ध बन सके । जैसे – जुलूस निकालना, बाजार बंद कराना, एवं हिँसक घटनाएं तोड़ फोड़ कराना, आगजनी आदि कराना।

3- धर्म के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।

4- राजनैतिक दल अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु  विभिन्न धार्मिक त्यौहार पर झगड़ा फसाद कराते हैं जिससे अपराध होते हैं

अपराध रोकने के उपाय –

1- अपराध का सही पंजीयन करके सही अपराधियों के विरुद्ध कारवाही की जाय।

2- सक्रिय अपराधियों की निगरानी करके उनकी गतिविधियों पर सतर्क दृष्टि रखी जाय।

3- सही अपराधियों के ही चालान किये जाय।

4- न्यायालय में मुकदमों की सही पैरवी की जाए जिससे किसी त्रुटि से । मुकदमें छूटने न पाएं एवं अपराधियों को सजा हो।

5- विवेचना में वैज्ञानिक साधनों का प्रयोग किया जाय।

6- समय रहते अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी निरोधात्मक कारवाही की जाय।

7- आपराधिक सूचनाएं संकलित की जाय।

8- विवेचना योजनाबद्ध तरीकों से की जाय ताकि न्यायालय से अपराधी को दण्ड मिल सके।

9- प्रभावी गश्त एवं नाकाबन्दी की जाए।

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