Monday, September 21, 2020
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भारत के लिए जम्मू कश्मीर क्यों महत्वपूर्ण है ?

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भारत विश्व का एक ऐसा देश है जहां पर अनेक ऋषियों, मुनियों ने जन्म लिया तथा देवी-देवताओं ने विभिन्न रूपों में अवतार लिया । भारत विभिन धर्मों की धर्मस्थली है परन्तु अधिकांशत: हिन्दू धर्म का ही बोलबाला है । निम्नांकित कारणों से हिन्दू धर्म तथा भारत के लिए जम्मू कश्मीर का विशेष महत्व है –

अमरनाथ गुफा, महामाया शक्तिपीठ, पिस्सू टाप, देवी त्रिकुटा, खीर भवानी मन्दिर तथा शिव खोरी गुफा ।

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अमरनाथ गुफा-  सनातन धर्म की दृष्टि से अमरनाथ गुफा का विशेष महत्व है ।  हिमालय की गोद में स्थित अमरनाथ धाम शिव भक्तों के लिए सर्वाधिक आस्था का पवित्र तीर्थ स्थल है । पौराणिक कथा के अनुसार इस गुफा में भगवान शिव तथा देवी पार्वती का निवास है । भगवान शिव ने इसी गुफा में देवी पार्वती को अमर होने का रहस्य बताया था । कहा जाता है कि मनुष्य बडे पुण्य तथा भाग्य से इस गुफा के दर्शन करता है तथा इस दर्शन से शिव भक्तों को बार-बार जन्म एवं मृत्यु से मुक्ति मिल जाती है ।

महामाया शक्तिपीठ– ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यहां देवी सती का कण्ठ गिरा था । यहां भगवान शिव के अलावा दो और हिमलिंग बनते हैं एक माता पार्वती का दूसरा गणेश का । महामाया शक्तिपीठ के साथ ही इस पवित्र गुफा में बाबा भैरो की पूजा भगवान श्री त्रिसंध्येश्वरर के रूप में होती है ।

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पिस्सू टाप – यह स्थान अमरनाथ गुफा की यात्रा मार्ग में पड़ता है । पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां पर देवासुर संग्राम हुआ था जिसमें देवताओं ने असुरों को पिस्सुओं की तरह मसल कर रख दिया था।

देवी त्रिकुटा – माता वैष्णो देवी का भवन जम्मू कश्मीर के त्रिकूट पर्वत पर स्थित है । वैष्णो देवी को माता रानी, त्रिकूटा और वैष्णवी के नाम से जाना जाता है । यहां सरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली तीनों पिण्डी के रूप में विराजमान है ।

खीर भवानी – खीर भवानी को कश्मीर की देवी कहा जाता है । खीर भवानी के मन्दिर में खीर भवानी को केवल खीर का ही भोग लगता है । कहा जाता है कि रावण खीर भवानी देवी का अनन्य भक्त था । रावण ने सीता का हरण कर लिया तो यह देवी दुखी होकर हनुमान जी के साथ लंका से कश्मीर आ गई ।

शिव खोरी गुफा – पौराणिक कथाओं के अनुसार भस्मासुर असुर को भगवान शिव का वरदान प्राप्त था कि वह जिस व्यक्ति के सिर पर हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा । यह वरदान पाते ही वह ऋषि मुनियों पर अत्याचार करने लगा, भगवान शिव के पीछे भी भागा । भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से एक गुफा का निर्माण किया और माता पार्वती के साथ गुफा में प्रवेश कर गए । इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर भस्मासुर का अन्त कर दिया । जिस गुफा में भगवान शिव माता पार्वती के साथ छुपकर ध्यान कर रहे थे वही गुफा शिव खोरी गुफा के नाम से प्रसिद्ध हुई । ऐसी मान्यता है कि जो इस गुफा की एक सीमा के आगे जाता है वह फिर लौटकर वापस नहीं आता  ।

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