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भारतीय राष्ट्रपति की विधायी, वित्तीय तथा न्यायिक शक्तियां

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1 भारतीय राष्ट्रपति की विधायी, वित्तीय तथा न्यायिक शक्तियां

भारतीय राष्ट्रपति की विधायी, वित्तीय तथा न्यायिक शक्तियां 

भारतीय राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां 

भारतीय संविधान के अनुसारः भारतीय राष्ट्रपति  भारतीय संसद का अभिन्न अंग तथा राष्ट्र एवं सरकार दोनों का औपचारिक प्रमुख और भारत की तीनों सेनाओं (नौसेना, थल सेना, वायु सेना) का सर्वोच्च कमाण्डर होता है। भारतीय संविधान द्रारा राष्ट्रपति को निम्नलिखित विधायी शक्तियां प्रदत्त हैः

कुछ विधेयकों के सम्बन्ध में राष्ट्रपति की पूर्वानुमति

वित्त विधेयक, राज्यों के निर्माण या सीमा में परिवर्तन से सम्बन्धित विधेयक, संचित निधि से व्यय होने वाला विनियोग विधेयक, कराधान पर प्रभाव डालने वाले विधेयक, वाणिज्य व व्यापार की स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगाने वाले विधेयक आदि ऐसे विधेयक हैं जिन्हे संसद में सीधे नही प्रस्तुत किया जा सकता। इन विधेयकों को संसद में प्रस्तुत किये जाने से पूर्व राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति लिया जाना आवश्यक है।

संसद द्वारा पारित विधेयक के सम्बन्ध में शक्तिया

संसद के दोनों सदनों (लोक सभा तथा राज्य सभा) द्वारा जब कोई विधेयक पारित करके स्वीकृति हेतु भारतीय राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो राष्ट्रपति को अधिकार है कि वह चाहे तोः

  1. विधेयक पर अपनी स्वीकृति दे दें
  2. विधेयक पर अपनी स्वीकृति सुरक्षित रख लें
  3. यदि विधेयक वित्त विधेयक नहीं है तो उसे पुनर्विचार हेतु संसद को वापस लौटा सकता है जो कि राष्ट्रपति की पूर्ण वीटो शक्ति है।

भारतीय राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार हेतु संसद को वापस लौटाए गए विधेयक को संसद संशोधन के साथ या बिना संशोधन के पुन: पारित करती है तो राष्ट्रपति उस विधेयक को पुनर्विचार के लिए पुनः संसद को वापस नही लौटा सकता तथा अपनी स्वीकृति देने के लिए बाध्य है।

राज्य विधायिका द्वारा पारित विधेयक के सम्बन्ध में शक्तिया

जब राज्य विधायिका द्वारा कोई विधेयक पारित कर स्वीकृति हेतु राज्यपाल के पास भेजा जाता है तो राज्यपाल द्वारा स्वीकृति दिए जाने पर कानून बन जाता है। राज्यपाल को अधिकार है कि वह राष्ट्रपति से विचार-विमर्श के लिए उक्त विधेयक को सुरक्षित रख ले तथा विचार विमर्श के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दें, तब राष्ट्रपति को अधिकार है किः

  1. विधेयक पर अपनी स्वीकृति दे
  2. अपनी स्वीकृति सुरक्षित रखें
  3. राज्यपाल को यह निर्देश दे कि उक्त विधेयक को पुनर्विचार के लिए राज्य विधायिका को वापस लौटा दें
  4. यदि राज्य विधायिका द्वारा उक्त विधेयक को संशोधन या बिना संशोधन के पारित करके पुन: स्वीकृति हेतु भेजा जाता है तब भी राष्ट्रपति स्वीकृति देने के लिए बाध्य नहीं है

अध्यादेश जारी करने के सम्बन्ध में राष्ट्रपति की शक्ति

यदि संसद के दोनों सदनों में से एक सदन का सत्रवसान हो गया है या किसी अन्य कारण से वह सत्र में नही है, जिसके कारण संसद विधि बनाने में अक्षम है परन्तु किसी विधेयक की तत्काल आवश्यकता है तो भारतीय राष्ट्रपति भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 123 के अनुसारः संवैधानिक मर्यादाओं के रहते हुए अध्यादेश जारी कर विधि को लागू कर सकता है जिसका महत्व संसद द्वारा कानून बनाए गए कानून के बराबर होता है। संसद के दोनों सदनों द्वारा 06 सप्ताह के अन्दर अनुमोदन किए जाने पर यह विधेयक कानून बन जाता है तथा 06 सप्ताह के अन्दर अनुमोदन न किए जाने पर स्वत: समाप्त हो जाता है।

भारतीय राष्ट्रपति द्वारा यह अध्यादेश मात्र उन्हीं विषयों पर जारी किया जा सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है। यह अध्यादेश जारी किए जाने की तिथि से ही प्रभावी होता है, पूर्व तिथि से प्रभावी नहीं होता। भारतीय राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार को कम या समाप्त करने तथा संविधान में संशोधन करने हेतु  यह अध्यादेश नहीं जारी किया जा सकता।

संसद के दोनो सदनों को संयुक्त रूप से सम्बोधित करने की शक्तिः

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 87 के अनुसारः राष्ट्रपति नवीन लोकसभा के प्रथम सत्र के आरम्भ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र में  संसद के दोनों सदनों की बैठक को सम्बोधित करता है।

संसद का अधिवेशन बुलाने तथा लोकसभा को भंग करने की शक्ति

भारतीय संविधान के अनुच्छेद एवं 108 के अनुसारः भारतीय राष्ट्रपति संसद के दोनो सदनों के सत्र को बुलाता है तथा उसका सत्रावसान करता है। किसी विषय पर गतिरोध होने की स्थिति में संसद की संयुक्त बैठक बुला सकता है, स्थगित कर सकता है तथा लोकसभा को भंग भी कर सकता है।

संसद सदस्यों के मनोनयन करने की शक्ति

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(1) के अनुसारः भारतीय राष्ट्रपति संसद के गठन के लिए कला, साहित्य, वि या समाज सेवा इत्यादि क्षेत्रो में विशेष कार्य करने वाले 12 सदस्यों को राज्यसभा में मनोनीत कर सकता है।

भारतीय स्विधान के अनुच्छेद 331 के अनुसारः राष्ट्रपति आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को लोकसभा में मनोनीत कर सकता है।

अन्य विधायी शक्तिया

  1. लोकसभा में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद खाली होने पर लोकसभा के किसी भी सदस्य को लोकसभा की अध्यक्षता का दायित्व सौंप सकता है। उक्त व्यक्ति लोकसभा अध्यक्ष के दायित्वों का निर्वहन करेगा।
  2. राज्यसभा में सभापति तथा उपसभापति का पद खाली होने पर राज्यसभा के किसी भी सदस्य को राज्यसभा की अध्यक्षता का दायित्व सौंप सकता है। उक्त व्यक्ति राज्यसभा की अध्यक्षता के दायित्वों का निर्वहन करेगा।
  3. सांसदों की योग्यता के मुद्दे पर चुनाव आयोग से परामर्श लेकर निर्णय लेना आदि।

भारतीय राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियां

  1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 280 के अनुसारः भारतीय राष्ट्रपति प्रत्येक 05 वर्ष पर  वित्त आयोग का गठन करता है जो भारत में केन्द्र और राज्यों के मध्य राजस्व के बंटवारा करता है।
  2. किसी प्रकार के अनुदान की मांग किए जाने पर राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक है ।
  3. किसी अदृश्य व्यय के लिए राष्ट्रपति भारत की संचित निधि से अग्रिम भुगतान की व्यवस्था कर सकता है ।

भारत के राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियां

  1. भारतीय संविधान के अनुच्छेदR; 124 के अनुसारः उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है तथा उसकी सलाह पर अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।

यदि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त है या मुख्य न्यायाधीश अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तब राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से किसी न्यायाधीश को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करता है।

  1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसारः उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है तथा उसकी सलाह पर उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
  2. राष्ट्रपति अपने निर्णय, कार्य तथा दायित्व के सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सलाह ले सकता है परन्तु उसकी सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है ।
  3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 72 के अनुसारः भारत के राष्ट्रपति को क्षमादान की निम्नांकित शक्तियां प्राप्त हैः  A.अपराधी को सजा से मुक्त कर सकता है। B. विशेष परिस्थिति जैसे- गर्भावस्था, विकलांगता, बीमारी आदि के आधार पर अपराधी के दण्ड पर विराम लगा सकता हैं। C.दण्ड की मात्रा को कम कर सकता है । D.दण्ड हल्का कर सकता हैं । e.मृत्युदण्ड पर अस्थाई रोक लगा सकता है ।

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