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भारतीय संविधान में आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष प्राविधान

भारतीय संविधान में आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष प्राविधान

आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष  प्राविधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 331, 333, 336 तथा 337 में किये गये हैं जिसका विवरण निम्नवत हैः

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 331 के अनुसारः लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने की दशा में भारतीय राष्ट्रपति आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को लोकसभा में मनोनीत कर सकता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 333 के अनुसारः किसी राज्य की विधानसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने की दशा में यदि उस राज्य का राज्यपाल उस राज्य की विधानसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व आवश्यक समझता है तो राज्यपाल विधानसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के एक सदस्य को मनोनीत कर सकता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 334 (क) के अनुसारः लोकसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं में नामनिर्देशन द्वारा आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधित्व सम्बन्धी भारतीय संविधान के उपबन्ध इस संविधान के प्रारम्भ से 60 वर्ष की अवधि तक लागू होंगे तथा 60 वर्ष की समाप्ति के पश्चात लागू नही होंगे।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 336 (1) के अनुसारः भारतीय संविधान के प्रारम्भ के बाद प्रथम दो वर्ष के दौरान संघ की रेल, सीमा शुल्क, डाक तथा तार सम्बन्धी सेवाओं में पदों के लिए आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्यों की नियुक्तियां उसी आधार पर की जायेंगी, जिस आधार पर 15 अगस्त 47 से ठीक पहले की जाती थीं। तदोपरान्त प्रत्येक दो वर्ष की अवधि के दौरान उक्त समुदाय के सदस्यों के लिए, उक्त सेवाओं में आरक्षित पदों की संख्या ठीक पूर्ववर्ती दो वर्ष की अवधि के दौरान इस प्रकार आरक्षित संख्या से यथासम्भव 10 प्रतिशत कम होगी।

भारतीय संविधान लागू होने के 10 वर्ष बाद उक्त सभी आरक्षण समाप्त हो जायेंगे ।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 336 (2) के अनुसारः यदि भारतीय आंग्ल समुदाय के सदस्य अन्य समुदायों के सदस्यों की तुलना में गुणागुण के आधार पर नियुक्ति के लिए उपयुक्त पाये जायें तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 336 (1) के अधीन उस समुदाय के लिए आरक्षित पदों से भिन्न या उसके अतिरिक्त पदों पर आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्यों की नियुक्ति को भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 336 (1) की कोई बात वर्जित नहीं करेगी।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 337 के अनुसारः संविधान के प्रारम्भ के पश्चात प्रथम तीन वित्तीय वर्षों के दौरान आंग्ल भारतीय समुदाय के लाभ के लिए शिक्षा के सम्बन्ध में संघ तथा प्रत्येक राज्य द्वारा वही अनुदान दिए जाएंगे जो 31 मार्च 1948 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में दिए गए थे। तत्पश्चात प्रत्येक 03 वर्ष की अवधि के दौरान अनुदान ठीक पूर्ववर्ती तीन वर्ष का अवधि की अपेक्षा 10 प्रतिशत कम हो सकेंगे।

संविधान के प्रारम्भ से 10 वर्ष के अन्त में ऐसे अनुदान, जिस मात्रा तक वे आंग्ल भारतीय समुदाय के लिए विशेष रियायत हैं, उस मात्रा तक समाप्त हो जायेंगें। परन्तु कोई शिक्षा संस्था इस अनुच्छेद के अधीन अनुदान प्राप्त करने की तब तक हकदार नही होगी जब तक उसके वार्षिक प्रवेशों में कम से कम 40 प्रतिशत प्रवेश आंग्ल भारतीय समुदाय से भिन्न समुदायों के सदस्यों के लिए उपलब्ध नही किये जाते हैं।

  • भारतीय लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के प्रतिनिधित्व का प्रावधान भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में वर्णित है?

अनुच्छेद 331 में वर्णित है।

  • भारतीय राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के कितनें सदस्यों को मनोनीत कर सकता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 331 के अनुसार भारतीय राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को मनोनीत कर सकता है।

  • भारत के किसी राज्य का राज्यपाल अपने राज्य की विधानसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के कितनें सदस्य मनोनीत कर सकता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 333 के अनुसार भारत के किसी राज्य का राज्यपाल अपने राज्य की विधानसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के एक सदस्य को मनोनीत कर सकता है।

  • आंग्ल-भारतीय समुदाय के लाभ के लिए शैक्षिक अनुदान के लिए विशेष उपबन्ध भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में किये गये हैं?

अनुच्छेद- 337 में।

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