Chemistry

फास्फोरस

फास्फोरस

फास्फोरस की खोज वर्ष 1669 ई0 में हेनिन ब्रांट ने किया था। यह नाइट्रोजन समूह की एक बहुसंयोजी अधातु है। फास्फोरस का प्रतीक पी, परमाणु द्रव्यमान 30.9738, परमाणु संख्या 15, गलनांक 44.2 डिग्री सेल्सियस, क्वथनांक 280 डिग्री सेल्सियस तथा 20 डिग्री सेल्सियस पर घनत्व 1.82 ग्राम प्रति मिली0 हैं।

नाइट्रोजन मुख्यतया तीन प्रकार का होता हैः-

  • सफेद फास्फोरस।
  • लाल फास्फोरस।
  • काला फास्फोरस।

सफेद फास्फोेरस एक घातक जहर है जो कि अंधेरे में चमकता है, हवा के सम्पर्क में आने पर ज्वलनशील हो जाता है। लाल फास्फोरस रगड़ने पर जलता है। इसका उपयोग दियासलाई उद्योंग में किया जाता है। काला फास्फोरस देखनें में ग्रेफाइट जैसा होता है जो कि ग्रेफाइट की तरह बिजली का संचालन करने की अद्भुद क्षमता रखता है।

फास्फोरस के उपयोग

  1. कृषि उत्पादन के लिए फास्फेट नामक उर्वरक बनाने में।
  2. स्टील का उत्पादन करने में।
  3. धूम्रपान स्क्रीनिंग में।
  4. आतिशबाजी बनानें में।
  5. सोडियम लैम्प बनाने में।
  6. डिटर्जेन्ट बनाने में।
  7. कीटनाशक बनाने में।
  8. आग लगाने वाले बम बनाने में।
  9. टूथपेस्ट बनाने में।

फास्फोरस का स्वास्थ्य पर प्रभाव

  1. फास्फोरस वनस्पतियों व खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है तथा मानव शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी तथा अधिकता दोनों ही मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
  2. सफेद फास्फोरस सम्पर्क में आने पर त्वचा में जलन उत्पन्न कर सकता है।
  3. शरीर में फास्फोरस की अधिक मात्रा होने पर आस्टियोपोरोसिस हो सकता है।
  4. शरीर में फास्फोरस की अधिकता होने पर गुर्दे की समस्या हो सकती है।
  5. जलता हुआ सफेद फास्फोरस के सम्पर्क में आने पर हृदय, गुर्दे व यकृत को बेहद नुकसान पहुंच सकती है।

फास्फोरस का पर्यावरण पर प्रभाव

  1. फास्फोरस का जीवों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है जो कि मुख्यतया खनन व खेती के कारण पर्यावरण में भारी मात्रा में फास्फेट के उत्सर्जन का परिणाम है।
  2. मनुष्यो के द्वारा फास्फेट के लगातार जोड़ व अधिक प्राकृतिक सान्द्रता होने के काण फास्फोर चक्र दृढ़ता से बाधित होता है।
  3. सतही जल में फास्फोरस की बढ़ती हुई सान्द्रता फास्फेट पर निर्भर रहने वाले जीवों (जैसे-शैवाल, बत्तख आदि)  के विकास को बढ़ाती है।
  4. जब सफेद फास्फोरस का उपयोग किसी उद्योग में या रसायन बनाने में किया जाता है या सेना गोला बारूद के रूप में इसका उपयोग करती है तब सफेद फास्फोरस हवा में प्रवेश करता है जिसके सम्पर्क में आने पर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  5. झीलों, नदियों तथा गहरी मिट्टी में फास्फोरस काफी समय तक नष्ट नही होता तथा हजारों वर्ष तक जीवित रह सकता है।

Related Articles

Back to top button
Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes

AdBlock Detected

Please Consider Supporting Us By Disabling Your AD Blocker