Home C TET एस0 सी0 / एस0 टी0 समुदाय के लिए विशेष प्रावधान (Special...

एस0 सी0 / एस0 टी0 समुदाय के लिए विशेष प्रावधान (Special Provision for Sc/St Community)

43
0

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-244 के अनुसारः

भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूची के उपबन्ध असम, मेघालय, त्रिपुरा तथा मिजोरम राज्यों से भिन्न किसी राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जन जातियों के प्रशासन एवं नियन्त्रण के लिए लागू होंगे। छठवीं अनुसूची के उपबन्ध असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए लागू होंगे।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-330 के अनुसारः

अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति एवं असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा में कुछ स्थान आरक्षित होंगे।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-332 के अनुसारः

प्रत्येक राज्य की विधानसभा में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों तथा असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित होंगे।

लोकसभा तथा विधानसभा में उक्त आरक्षण सम्बन्धित क्षेत्र में इनकी जनसंख्या के आधार पर होगा तथा इनके लिए आरक्षित स्थानों में परिवर्तन भी संभव होगा।

वर्तमान समय में लोकसभा में अनुसूचित जाति केलिए 79 तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 40 स्थान आरक्षित हैं।

वर्तमान समय में राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति के लिए 3997 तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 538 स्थान आरक्षित हैं।

लोकसभा तथा विधानसभाओं मे उक्त आरक्षण वर्ष-2026 तक लागू रहेगा।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-335 के अनुसारः

संघ तथा किसी राज्य का क्रिया कलाप से सम्बन्धित सेवाओं तथा पदों के लिए नियुक्तियां करनें में अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के दावों का प्रशासन की दक्षता बनाये रखने की संगति के अनुसार पूरा ध्यान रखा जायेगा।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-338 के अनुसारः

अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के राष्ट्रीय आयोग का प्रावधान किया गया है। इस राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-339 के अनुसारः  

राष्ट्रपति द्वारा भारत के राज्यों में अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के राज्य आयोग का गठन किया जायेगा ।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोगः

इस राष्ट्रीय आयोग की  स्थापना 65 वें भारतीय संविधान संशोधन अधिनियम के अन्तर्गत भारतीय संविधान के अनुच्छेद-338  के अनुसार  वर्ष 1990 ई0 में की गयी। यह एक संवैधानिक निकाय एवं स्वायत्त संस्था है । 89 वें संविधान संशोधन अधिनियम-2003 के द्वारा इस आयोग को दो भागों में विभाजित कर दिया गयाः

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत)।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत )।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत वर्ष 2004 ई0 में की गयी, जिसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष तथा 03 सदस्य होते हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा इनकी सेवा शर्तें व कार्यकाल भी राष्ट्रपति द्वारा ही निर्धारित की जाती है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here