राज्य निर्वाचन आयोग (STATE ELECTION COMMISION)

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  • राज्य निर्वाचन आयोग क्या है ?

राज्य निर्वाचन आयोग एक सांविधिक निकाय है। 73 व 74 भारतीय संविधान संशोधन अधिनियम 1992 के अधीन प्रत्येक राज्य में पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी निकायों के चुनाव निष्पक्ष तथा समय पर करवाने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243(ट) के अनुसार प्रत्येक राज्य में वर्ष 1994 ई0 में राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना की गयी। राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना भारत के प्रत्येक राज्य में की गयी है जिसका कार्य क्षेत्र सम्बन्धित राज्य क्षेत्र है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243 (ट), 243 य क व 243 (ZA) के अनुसारः राज्य की पंचायतों के समस्त निर्वाचनों तथा नगर पालिकाओं के समस्त निर्वाचनों का अधीक्षण, नियन्त्रण और निर्देशन राज्य निर्वाचन आयोग में निहित है।

  • राज्य  निर्वाचन आयोग की संरचनाः

राज्य निर्वाचन आयोग  एकल- सदस्यीय / एकसदस्यीय आयोग / निकाय है। राज्य निर्वाचन आयोग का प्रमुख / अध्यक्ष राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है जिसके सहायतार्थ एक सचिव भी होता है।

  • राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्ति तथा कार्यकाल

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243(ट)(1) के अनुसारः राज्य निर्वाचन आयोग के निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति सम्बन्धित राज्य का राज्यपाल करता है।

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राज्य  निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल कार्यग्रहण तिथि से  05 वर्ष या 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो, का होता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243(ट)(2) के अनुसारः राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के पश्चात उसके सेवा तथा शर्तों में कोई अलाभकारी परिवर्तन नही किया जायेगा।

  • राज्य निर्वाचन आयुक्त को समय से पहले उसके पद से हटाने की प्रक्रियाः

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243(ट)(2) के अनुसारः संसद द्वारा महाभियोग प्रस्ताव पारित करने पर भारतीय राष्ट्रपति द्वारा राज्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाया जा सकता है।

  • निर्वाचन आयोग की शक्तियांः

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243(ट)(1) के अनुसारः  प्रत्येक राज्य में पंचायतों के लिए कराये जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार कराने, निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन तथा नियन्त्रण की शक्ति राज्य निर्वाचन आयुक्त में निहित है।

  • क्या राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा पंचायत चुनाव के सम्बन्ध में बनायी गयी किसी विधि को न्यायालय में प्रश्नगत किया जा सकता है ? 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243(ण)(क) के अनुसारः राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अनुच्छेद-243(ट) के अन्तर्गत बनायी गई किसी ऐसी विधि जिसकी विधिमान्यता निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या स्थानों के आवंटन से सम्बन्धित है, को किसी नायालय में प्रश्नगत नही किया जा सकता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243(ण)(ख) के अनुसारः किसी पंचायत के लिए कोई निर्वाचन, ऐसी निर्वाचन अर्जी पर ही प्रश्नगत किया जायेगा जो ऐसे प्राधिकारी को एवं ऐसी रीति से प्रस्तुत की गई है जिसका किसी राज्य के विधानमण्डल द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन उपबन्ध किये जायें, अन्यथा नही।

  • राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यः

  • पंचायत निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार कराना।
  • पंयायत निर्वाचनों का पर्यवेक्षण, निर्देशन तथा चुनावों का आयोजन करवाना।
  • नगर पालिकाओं के लिए कराये जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार कराना, निर्वाचनों का पर्यवेक्षण, निर्देशन तथा चुनावों का आयोजन करवाना।
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