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विद्युत आवेश (Electric charge)

विद्युत आवेश (Electric charge)

किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण उसमें विद्युत प्रभाव या चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न होते है, विद्युत आवेश कहलाता है। यह पदार्थ का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण गुण है।

विद्युत आवेश एक अदिश राशि है। विद्युत आवेश का S.I.मात्रक कूलाम है जिसे C से प्रदर्शित किया जाता है।

1 कूलाम =  1 एम्पियर  × 1 सेकेण्ड।

कोई भी पदार्थ परमाणु से मिलकर बना होता है। परमाणु इलेक्ट्रान, प्रोट्रान तथा न्यूट्रान से मिलकर बने होते हैं। किसी पदार्थ का विद्युत आवेश उस पदार्थ  में मौजूद इलेक्ट्रानों की संख्या पर निर्भर करता है।

विद्युत आवेश को  q  से प्रदर्शित किया जाता है।

q = n e  ( जहां पर q = विद्युत आवेश,  n = पदार्थ में इलेक्ट्रानों की संख्या तथा   e = इलेक्ट्रान पर आवेश )

एक इलेक्ट्रान पर 1.6 × 10-19  कूलाम आवेश होता है।

जब किसी वस्तु को दूसरी वस्तु पर रगड़ा जाता है तो एक वस्तु पर धनात्मक आवेश तो दूसरी वस्तु पर ऋणात्मक आवेश उत्पन्न हो जाता है जो कि रगड़ना बन्द करने का बाद यह आवेश थोड़ी ही देर तक रहता है, उसके बाद समाप्त हो जाता है। ऋणात्मक वस्तु में इलेक्ट्रानों की अधिकता तथा धनावेशित वस्तु में इलेक्ट्रानों की कमी होती है।

विद्युत आवेश का प्रकार (Types of electric charge)

विद्युत आवेश दो प्रकार का होता हैः  धनात्मक आवेश (Positive charge) तथा ऋणात्मक आवेश (Negative charge)।

वे वस्तुएं जिन पर धनावेश होता है, उन्हें धनावेशित वस्तु कहा जाता है। जिन वस्तुओं पर ऋणात्मक आवेश होता है, उन्हें ऋणावेशित वस्तु कहा जाता है। जिन वस्तुओं पर ऋणात्मक या धनात्मक कोई भी आवेश नही होता है, उसे उदासीन वस्तु कहा जाता है।

प्रसिध्द भौतिक वैज्ञानिक फ्रेंकलिन के अनुसारः कांच को रेशम पर रगड़ने पर कांच के परमाणु अपने इलेक्ट्रानों का त्याग करते हैं अर्थात पर कांच के परमाणुओं से कुछ इलेक्ट्रान निकल जाते हैं जिसके कारण कांच पर धनात्मक आवेश आ जाता है, कांच के परमाणुओं से निकलने वाले इलेक्ट्रान को रेशम के परमाणु ग्रहण कर लेते है जिसके कारण रेशम पर  ऋणात्मक आवेश उत्पन्न हो जाता है । धनात्मक आवेश उत्पन्न होने के कारण कांच कागज के छोटे-छोटे टुकड़ो को अपनी तरफ खींचने या आकर्षित करने लगता है।

विद्युतीकरण का आधुनिक इलेक्ट्रान सिध्दान्त (Modern electronic theory of electrification)

घर्षण को समझाने के लिए समय-समय पर विभिन्न भौतिकशास्त्रियों में अपने- अपने पृथक्-पृथक् मत व्यक्त किये हैं जिनमें से सर्वमान्य सिध्दान्त आधुनिक इलेक्ट्रान सिध्दान्त है। इलेक्ट्रान सिध्दान्त के अनुसार जब दो वस्तुएं आपस में रगड़ी जाती हैं तो उन दोनों वस्तुएं में से एक वस्तु के परमाणुओं की बाहरी कक्षा से इलेक्ट्रान निकल कर दूसरी वस्तु के परमाणुओं में चले जाते हैं। इस प्रक्रिया से पहले वस्तु के परमाणुओं में इलेक्ट्रानों की संख्या में कमी हो जाती है तथा दूसरी वस्तु के परमाणुओं में इलेक्ट्रानों की संख्या बढ़ जाती है जिसके कारण पहली वस्तु धनावेशित हो जाती है और दूसरी वस्तु ऋणावेशित हो जाती है।

इस प्रकार इलेक्ट्रानों की कमी वाले पदार्थ कों धनावेशित पदार्थ तथा इलेक्ट्रानों की अधिकता वाले को ऋणावेशित पदार्थ कहा जाता हैं।

विद्युत आवेश के गुण (Properties of electric charge)

वैसे तो विद्युत आवेश के तमाम गुण हैं जिसमें कुछ अति महत्वपूर्ण गुण निम्नवत हैः

  1. जब किसी आवेशित वस्तु को बिना आवेश वाली वस्तु के सम्पर्क में लाया जाता है तो आवेशित वस्तु के परमाणु से कुछ इलेक्तट्रान दूसरी वस्तु (बिना आवेश वाली वस्तु) पर चले जाते हैं जिसके कारण दूसरी वस्तु आवेशित हो जाती है।
  2. आवेश को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। इसे मात्र एक वस्तु स, दूसरी वस्तु पर स्थानान्तरित किया जा सकता है अर्थात् आवेश संरक्षित रहता है।
  3. आवेश स्थिर रहता है।
  4. आवेश स्थानान्तरणीय है।
  5. आवेश किसी वस्तु की बाह्य सतह पर ही रहता है जिसके कारण वह दूसरी वस्तु को आकर्षित या प्रतिकर्षित करता है।
  6. किसी आवेशित वस्तु के नुकीले बिन्दुओं से आवेश का सर्वाधिक क्षरण होता है।
  7. गतिशील आवेशित वस्तु अपने चारो तरफ विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
  8. स्थिर वस्तु अपने चारों तरफ मात्र विद्युत क्षेत्र ही उत्पन्न करती है।

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