Miscellaneous

विद्युत धारा (Electric Current)

Table Of Contents Hide
1 विद्युत धारा (Electric Current)

विद्युत धारा (Electric Current)

किसी चालक या सर्किट में विद्युत प्रवाह की दर को विद्युत धारा (Electric Current) कहते हैं। विद्युत धारा की दिशा धनावेश से ऋणावेश की तरफ होती है जिसे i से प्रदर्शित किया जाता हैं।

विद्युत धारा को (i) = Q / t           ( i = विद्युत धारा, Q= आवेश तथा t = समय )

विद्युत धारा का S.I. मात्रक एम्पियर है जो कि अदिश राशि है।

ठोस चालकों में विद्युत धारा का प्रवाह इलेक्ट्रानों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानान्तरण के कारण होता है तथा द्रवों के विलयन व गैसों में विद्युत धारा का प्रवाह आयनों की गति के कारण (Due to the movement of ions ) होता है।

एक एम्पियर विद्युत धारा (An ampere electric current)

किसी चालक तार में 6.25 × 1818 इलेक्ट्रान प्रति सेकेण्ड एक सिरे से प्रविष्ट होकर दूसरे सिरे से निकलना एक एम्पियर (one ampere) कहलाता है । एम्पियर विद्युत धारा की इकाई है।

या

किसी चालक तार में प्रति सेकेण्ड एक कूलाम आवेश प्रवाहित होना एक एम्पियर (an ampere) कहलाता है।

विद्युत धारा के प्रकार (Type of electric current)

विद्युत धारा 02 प्रकार की होती हैः

1-प्रत्यावर्ती विद्युत धारा या अल्टर्नेटिंग करेन्ट (Alternating Current)।

2-दिष्ट धारा या डायरेक्ट करेन्ट (Direct Current)।

प्रत्यावर्ती विद्युत धारा या अल्टर्नेटिंग करेन्ट (Alternating Current)

वह विद्युत धारा जिसमें विद्युत धारा का परिमाण व दिशा दोनों समय के साथ बदलते रहते हैं, प्रत्यावर्ती विद्युत धारा (Alternating Current) कहलाती है जिसे A.C. से प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार की विद्युत धारा में धारा का परिमाण अर्थात् मात्रा तथा दिशा समय-समय पर बदलती रहती है। पावरहाउस से विद्युत तारों के माध्यम से घरों में आने वाली विद्युत धारा इसी प्रकार की विद्युत धारा है।

दिष्ट धारा या डायरेक्ट करेन्ट (Direct Current)

वह विद्युत धारा जिसमें विद्युत धारा का परिमाण व दिशा दोनों समय के साथ स्थिर रहते हैं, दिष्ट धारा या डायरेक्ट करेन्ट (Direct Current) कहलाती है। इसे D.C. से प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार की विद्युत धारा में धारा का परिमाण अर्थात् मात्रा तथा दिशा अपरिवर्तित रहती है। दिष्ट धारा बैट्री, जनरेटर तथा D.C. रेक्टिफायर इत्यादि से उत्पन्न होती है।

इन्वर्टर का कार्य (Inverter functions)

इन्वर्टर प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current) को दिष्ट धारा (Direct Current) में तथा दिष्ट धारा (Direct Current) को प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current) में बदलने का कार्य करता है।

विद्युत धारा का तापीय प्रवाह (Thermal current)

जब हम किसी चालक को विद्युत ऊर्जा देते हैं तब ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा में बदल जाता है जिससे वह चालक गर्म हो जाता है । इसे ही विद्युत धारा का तापीय प्रवाह (Thermal Current) कहते हैं।

विद्युत धारा के तापीय प्रवाह का उपयोग विद्युत बल्ब, हीटर, प्रेस (आइरन), निमजन छड़, केतली आदि में होता है।

विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव ( current)

किसी चालक तार या सर्किट में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसके चारों तरफ चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है जिसे विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव (Magnetic current) कहते हैं।

विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव का उपयोग टेलीफोन, घण्टी आदि में किया जाता है।

प्रतिरोध (Resistance)

किसी चालक में विद्युत धारा के प्रवाहित होने पर चालक के परमाणुओं एवं अन्य कारकों के द्वारा उत्पन्न किए गए व्यवधान को ही प्रतिरोध (Resistance) कहते हैं। इसे R से प्रदर्शित करते हैं। प्रतिरोध का S.I. मात्रक ओम है।

ओम का नियम (rules of OM)

यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था जैसे- ताप आदि में कोई परिवर्तन न हो तो चालक के सिरों पर लगाया गया विभवान्तर उसमें प्रवाहित विद्युत धारा के अनुत्क्रमानुपाती (Serial order) होता है अर्थात् विद्युत धारा बढ़ने पर विभवान्तर बढ़ता है तथा विद्युत धारा घटने पर विभवान्तर घट जाता है।

ओमीय प्रतिरोधः

वे चालक जो ओम के नियम का पालन करते हैं, उनका प्रतिरोध ओमीय प्रतिरोध कहलाता है। जैसे- मैंगनीज का तार।

अन ओमीय प्रतिरोधः

वे चालक जो ओम के नियम का पालन नही करते हैं, उनका प्रतिरोध अन ओमीय प्रतिरोध कहलाता है । जैसे- डायोड व ट्रायोड बल्ब का प्रतिरोध आदि।

विशिष्ट प्रतिरोध (Special Resistance)

किसी चालक तार का प्रतिरोध उसकी लम्बाई के अनुत्क्रमानुपाती (Serial order) एवं उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely proportional) होता है तो उसे उस चालक का विशिष्ट प्रतिरोध (Special Resistance) कहते हैं।

प्रतिरोधों के संयोजन के प्रकार (Effect of combination of resistors)

प्रतिरोधों का संयोजन 02 प्रकार का होता हैः

  1. श्रेणी क्रम (Series Combination)।
  2. समान्तर क्रम (Parallel Combination)।

श्रेणी क्रम (Series Combination)  

इसमे संयोजित प्रतिरोधों का समतुल्य प्रतिरोध समस्त प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।

समान्तर क्रम (Parallel Combination)

इसमे संयोजित प्रतिरोधों का समतुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम उनके प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराहर होता है।

चालकता (Conductance)

किसी चालक के प्रतिरोध के व्युत्क्रम को उस चालक की चालकता (Conductance) कहते हैं । इसे से प्रदर्शित करते हैं।

अर्थात् G = 1 / R         ( जहां G= चालकता तथा R= प्रतिरोध )

विशिष्ट चालकता (Special Conductance)

किसी चालक के विशिष्ट प्रतिरोध के व्युत्क्रम को उस चालक की विशिष्ट चालकता (Special Conductance) कहते हैं।

विद्युत शक्ति (Electric power)

किसी विद्युत परिपथ में ऊर्जा के क्षय या व्यय होने की दर विद्युत शक्ति (Electric power) कहलाती है। इसका S.I. मात्रक वाट (watt) है।

एक यूनिट विद्युत ऊर्जा (One unit of electric energy)

एक किलोवाट विद्युत शक्ति के परिपथ में एक घण्टे में व्यय विद्युत ऊर्जा एक यूनिट विद्युत ऊर्जा (One unit of electric energy) कहलाती है। इसे एक किलोवाट घण्टा (One kilowatt hour) भी कहा जाता है।

यूनिट या किलोवाट घण्टा  = वोल्ट × एम्पियर  × घण्टा / 1000  = वाट  × घण्टा / 1000

(वाट = वोल्ट × एम्पियर)।

विद्युत धारा का विभवान्तर पर प्रभाव (Effect of electric current on potential)

विद्युत धारा (Electric current) बढ़ने पर विभवान्तर (potential) बढ़ता है तथा विद्युत धारा (Electric current) घटने पर विभवान्तर (potential) घटता है। अर्थात विभवान्तर विद्युत धारा के अनुत्क्रमानुपाती (Serial order) होता है।

Related Articles

Back to top button
The Knowledge Gateway Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes

AdBlock Detected

Please Consider Supporting Us By Disabling Your AD Blocker