विद्युत क्षेत्र (Electric field)

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विद्युत क्षेत्र (Electric field)

जब किसी स्थान पर कोई विद्युत आवेशित वस्तु रखी जाती है तो उसके चारों तरफ एक विद्युत आवेश बन जाता है, ऐसी स्थिति में उक्त वस्तु के आस-पास चारों तरफ कोई दूसरी वस्तु (धनावेशित या ऋणावेशित वस्तु) रखने पर उस वस्तु पर एक प्रकार के बल (Force) का अनुभव होता है, उक्त बल आकर्षण बल या प्रतिकर्षण बल होता है तथा उक्त क्षेत्र को जहां पर उक्त दूसरी वस्तु रखी गई है, को विद्युत क्षेत्र (Electric field) कहते हैं।

अर्थात् किसी आवेशित बिन्दु के चारों तरफ का वह क्षेत्र जिसमें किसी धनावेशित वस्तु या ऋणावेशित वस्तु को रखने पर उक्त वस्तु पर आकर्षण या प्रतिकर्षण बल का आभास होता है, विद्युत क्षेत्र (Electric field) कहलाता है।

अथवा

किसी विद्युत आवेश के चारों तरफ का वह क्षेत्र जिसमें कोई दूसरा आवेशित पिण्ड रखे जाने पर उक्त पिण्ड आकर्षण बल या प्रतिकर्षण बल का अनुभव करता है, विद्युत क्षेत्र (Electric field) कहलाता है।

विद्युत क्षेत्र (Electric field) को विद्युत बल रेखाओं के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

वह मार्ग जिस पर स्वतन्त्र धनावेश चलता है या चलने की प्रवृत्ति रखता है, विद्युत बल रेखाएं (Electric force lines) कहलाता है।

यदि उक्त आवेशित क्षेत्र में कोई ऐसी वस्तु रखी जाती है जो अनावेशित होती है तो उक्त अनावेशित वस्तु पर आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नही लगता है।

यदि किसी स्थान पर रखा हुआ कोई धनावेशित पिण्ड किसी भी आकर्षण बल या प्रतिकर्षण बल का अनुभव नहीं करता है, तो उक्त स्थान पर विद्युत क्षेत्र (Electric field) शून्य होता है।

विद्युत क्षेत्र (Electric field) की अवधारणा सर्प्रथम प्रसिध्द भौतिक वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने प्रस्तुत किया था। विद्युत क्षेत्र (Electric field) का  मात्रक वोल्ट / मीटर है। विद्युत क्षेत्र (Electric field) एक सदिश राशि है।

विद्युत आवेश (electric charge) उत्पन्न करने वाले स्रोत को स्रोत आवेश तथा स्रोत आवेश से उत्पन्न आवेशित क्षेत्र के प्रभाव का परीक्षण करने वाले आवेश को परीक्षण आवेश कहा जाता है।

विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity)

विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) किसी विद्युत क्षेत्र में रखे हुए आवेश (charge) तथा उस पर लगने वाले  विद्युत बल (Electric force) का अनुपात है।

अर्थात् विद्युत क्षेत्र में किसी बिन्दु पर स्थित एकांक धनावेश पर क्रियाशील बल को विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) कहा जाता है।

विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) एक सदिश राशि है। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) को E से प्रदर्शित किया जाता है। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) का परिमाण एक ही दिशा में होता है। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) का S.I.मात्रक न्यूटन / कूलाम है तथा C.G.S. पध्दति में मात्रक डाइन / कूलाम है। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) का अन्य मात्रक वोल्ट / मीटर है। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) का विमीय सूत्र MLT-3A-1 है।

E = F / Q   ( जहां पर   E =  विद्युत क्षेत्र की तीव्रता, F = विद्युत बल तथा Q = आवेश )

विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity), विद्युत बल (Electric force) के अनुत्क्रमानुपाती तथा आवेश का व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात् विद्युत बल (Electric force) के बढ़ने पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) बढ़ती है तथा घटने पर घटती है। इसके विपरीत आवेश (charge) बढ़ने पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric field intensity) घटती है तथा घटने पर बढ़ती है

कूलाम का नियमः

दो स्थिर विद्युत आवेशो के मध्य लगने वाला आकरष्ण अथवा प्रतिकर्षण बल दोनों आवेशों की मात्राओं के गुणनफल के अनुत्क्रमानुपाती तथा उनके मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

खोखले चालक का विद्युत क्षेत्रः

किसी भी खोखले चालक के अन्दर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, सम्पूर्ण विद्युत क्षेत्र खोखले चालक के बाह्य पृष्ठ पर ही रहता है जिसके कारण खोखला गोला एक परिरक्षक का कार्य करता है। यही काण है कि किसी कार पर तड़ित विद्युत गिर जाने पर कार के अन्दर बैठे लोग सुरक्षित (Safe) रहते हैं।

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