प्रेस की स्वतन्त्रता (FREEDOM OF PRESS)

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FREEDOM OF PRESS

               प्रेस की स्वतन्त्रता (FREEDOM OF PRESS)

विभिन्न इलेक्ट्रानिक माध्यमों सहित परम्परागत रूप से प्रकाशित अखबारों को प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता को प्रेस की Mediaस्वतन्त्रता कहतें हैं।

विश्व के देश अपना अलग-अलग कानून लाकर प्रेस पर अपना नियन्त्रण रखना चाहते हैं। भारत सरकार ने आन लाइन मीडिया वेबसाइट पर निगरानी रखने के लिए एक नया कानून लाया है। मीडिया क्षेत्र का चौथा स्तम्भ है । जिन अति पिछडे लोगों को न्याय नही मिलता, मीडिया उनकी आवाज अपने समाचार पत्रों के माध्यम से शासन, प्रशासन तक पहुंचाता है जिससे उन्हें न्याय मिलता है।

विश्व प्रेस स्वतन्त्रता दिवस कब तथा क्यों मनाया जाता है?

विश्व प्रेस स्वतन्त्रता दिवस प्रति वर्ष 03 मई को मनाया जाता है। सन् 1991 ई0 में यूनेस्को की जनरल असेम्बली में की गई सिफारिश के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा ने दिसम्बर 1993 ई0 में  विश्व प्रेस स्वतन्त्रता दिवस की घोषणा किया था । भारत जैसे विशाल लोकतान्त्रिक देश में प्रेस की स्वतन्त्रता की महती आवश्यकता है। प्रेस विश्व के किसी भी देश के समाज का आइना होता है। प्रेस तथा मीडिया समाज के लिए खबर वाहक का कार्य करता है।

प्रेस मात्र खबरें पहुंचाने का माध्यम ही नही बल्कि एक नये युग के निर्माण तथा शासन प्रणाली के प्रति लोगों को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम भी है । प्रेस देश-दुनिया की राजनीति तथा खबरों को प्रकाशित करने  के साथ-साथ, हिंसा, विपत्तियों तथा भ्रष्टाचार को लेकर समय समय पर अनेक पक्ष  प्रकाशित किये हैं।

विश्व प्रेस स्वतन्त्रता दिवस मनाने का क्या उद्देश्य है ?

विश्व प्रेस स्वतन्त्रता दिवस मनाने का उद्देश्य प्रेस की स्वतन्त्रता का मूल्यांकन करना, प्रेस की स्वतन्त्रता पर बाह्य तत्वों के हमले से बचाव करना तथा प्रेस की स्वतन्त्रता के लिए शहीद होने वाले संवाददाताओं को याद करना है।

भारत में समाचार पत्रः

भारतीय समाचार पत्रों का  इतिहास यूरोपीयों के आगमन के साथ आरम्भ हुआ। पुर्तगाली ऐसे पहले विदेशी थे जो भारत मेंमुद्रणालय ले आये। गोवा के पादरियों ने भारत मे प्रथम पुस्तक छापी। भारत में प्रथम समाचार पत्र छापने का प्रयास  ईस्ट इण्डिया कम्पनी के असन्तुष्ट कार्यकर्ताओं ने किया जिनका उद्देश्य  ईस्ट इण्डिया कम्पनी  के दुष्कर्मों तथा अपकर्मों का भण्डाफोड करना था। जेम्स आगस्टस हिक्की ने 1780 ई0 में प्रथम समाचार पत्र,दि बंगाल गजट” का प्रकाशन किया। बाद मे सरकार की आलोचना के कारण उक्त समाचार पत्र का मुद्रणालय जब्त कर लिया गया। इसके बाद 1784 ई0 में समाचार पत्र,कलकत्ता गजट तथा 1785 ई0 में बंगाल जर्नल आदि समाचार पत्र प्रकाशित हुए। सन् 1835 ई0 में चार्ल्स मेटकाफ ने प्रेस कानून पारित कर समाचार पत्रों पर से सारे प्रतिबन्ध हटा दिया जिसके कारण इन्हेंसमाचार पत्रों का मुक्तिदाताकहा जाता है।

भारत में पत्रकारिता को लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ माना गया है जिसकी धारदार कलम से बडे-बडे राजनेता, सितारों तथा उद्योगपतियों को भी अर्श से फर्श पर आना पडा है। भारत में प्रेस की स्वतन्त्रता भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 में वर्णित भारतीय नागरिकों को दिये गये अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता  नामक मौलिक अधिकार से होती है। भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में प्रेस ने बिना किसी लोभ लालच निर्भीक होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सम्पूर्ण भारतवासियों में आजादी के प्रति आन्दोलन का जज्बा जगाया था।

प्रेस की  स्वतन्त्रता के कारण ही देश की व्यवस्थापिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका को आवाम की भावना को मजबूती के साथ व्यक्त करने का सुअवसर मिलता है। आजादी के बाद प्रेस पर ढेरों सारी जिम्मेदारियां आ गयीं। भारत में जनमत जागरण का कार्य प्रेस के माध्यम से ही होता है। भ्रष्टाचार से लडने का कार्य भी मीडिया ही करता है।  सरकारी सत्ता की नाराजगी का दंश भी मीडिया को ही झेलना पडता है। सन् 1975 ई0 में आम जनता के हक की लडाई लडने वाले विपक्ष का समर्थन कर दिये जाने पर आपात काल के नाम पर मीडिया का गला घोंट दिया गया तथा भारतीय प्रेस को सेंसरशिप का भी सामना करना पडा, कई पत्रकार जेल भेजे गये, कई समाचार पत्रों पर छापे पडे, विज्ञापन रोंके गये। इसके बावजूद भी मीडिया ने बिना किसी घबराहट के इस आपदा का डटकर मुकाबला किया जिसके परिणामस्वरूप शान्तिपूर्ण ढंग से सरकार का तख्ता पलट हुआ। मीडिया को उच्च मापदण्डों तथा आदर्शों पर कार्य करना चाहिए ताकि उसके क्रिया कलापों पर कोई उंगली न उठा सके । मीडिया ने समाज के अमीर- गरीब हर तबके के लोगों को सरकार की प्रत्येक योजना के सम्बन्ध में जागरूक किया है। देश में होने वाले विविध चुनावों में भी मीडिया की महती भूमिका है।