Miscellaneous

भारत में सरकार की संरचना

भारत में सरकार की संरचना

भारत विश्व का सबसे बड़ा संघीय गणतन्त्र है। भारत के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी तथा उप राष्ट्पति वेंकैया नायडू हैं। भारत का आधिकारिक नाम भारत गणराज्य है। भारत एक लोकतान्त्रिक गणराज्य है जहां पर द्विसदनात्मक संसदीय शासन प्रणाली है। भारतीय प्रशासन का ढांचा संघात्मक है । राष्ट्रीय स्तर पर केन्द्र सरकार तथा राज्य स्तर पर राज्य सरकार है  भारतीय संविधान के अनुसार शक्तियों का बंटवारा केन्द्र एवं राज्य  सरकारों के मध्य किया गया है। केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकारों से अधिक सशक्त है।

भारत में शासन के 03 अंग हैंः  व्यवस्थापिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका

भारतीय संसद को व्यवस्थापिका  कहते हैं जिसके दो सदन हैंः लोकसभा तथा राज्यसभा। लोकसभा को उच्च सदन तथा राज्य सभा को निम्न सदन कहा जाता है ।  भारतीय संविधान के अनुसार लोकसभा सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 है जिनका चुनाव प्रत्येक 5 वर्ष पर आम जनता द्वारा किया जाता है । लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है । लोकसभा अस्थाई सदन है तथा अल्पमत में होने पर राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकता है । राज्यसभा सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 है । राज्यसभा स्थाई सदन है जो कभी भंग नहीं होती जिसका कार्यकाल 6 वर्ष होता है जिसके एक तिहाई सदस्य प्रत्येक 2 वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते हैं तथा उनके स्थान पर नए सदस्य चुने जाते हैं । राज्यसभा के सभापति भारत के वर्तमान उपराष्ट्रपति बेंकैया नायडू है तथा उपाध्यक्ष श्री हरिवंश नारायण सिंह है । वर्तमान समय में भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द हैं । वर्तमान में लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला है जो भारतीय जनता पार्टी के हैं तथा सदन के नेता नरेन्द्र मोदी( प्रधानमन्त्री) है जो भारतीय जनता पार्टी के हैं । भारत में कानून बनाने का काम संसद करती है ।

भारतीय कार्पालिका के तीन अंग हैंः राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा  मन्त्रिमण्डल।

राष्ट्रपति राष्ट्र प्रमुख तथा भारत की तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमाण्डर होता है जिसका दायित्व संविधान का अभिव्यक्तिकरण, अध्यादेश जारी करना तथा पर्तावित कानूनों पर अपनी सहमति देना है। राष्ट्रपति का कार्यकाल 05 वर्ष का होता है। राज्यसभा का पदेन सभापति उपराष्ट्रपति होता है। राज्यसभा के वर्तमान सभापति भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू हैं तथा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह है। राज्यसभा सदन के नेता थावरचन्द गहलोत हैं जो भारतीय जनता पार्टी के हैं एवं विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद है जो कांग्रेस पार्टी के हैं। राज्यसभा  स्थाई सदन है जो कभी भंग नहीं होती है। राज्यसभा का गठन एक पुनरीक्षण सदन के रूप में हुआ है जो लोकसभा द्वारा पास किए गए प्रस्तावों का पुनरीक्षण करता है। राज्यसभा को संसद का द्वितीय सदन भी कहा जाता है। कोई भी  बिल यदि राज्यसभा द्वारा पास न किया जाए तो वह कानून नहीं बन पाता।

भारतीय न्यायपालिका  का ढांचा त्रिस्तरीय हैः  सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा जिला न्यायालय (अधीनस्थ न्यायालय)।

भारत में स्वतन्त्र न्यायपालिका के शीर्ष सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के अन्तर्गत की गई है जो नई दिल्ली में स्थित  है जिसका प्रधान, प्रधान न्यायाधीश होता है, 30 अन्य न्यायाधीश भी होते हैं जो 65 वर्ष की उम्र तक अपने पद पर बने रह सकते हैं । सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा पद एवं गोपनीयता की शपथ भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिलाई जाती है। सर्वोच्च न्यायालय अपने नवीन मामलों के साथ-साथ भारत के विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों के विवादों, केन्द्र तथा राज्य के मध्य के विवाद एवं दो या दो से अधिक राज्यों के मध्य को विवादों को भी देखता है । भारत की किसी उच्च न्यायालय के किसी  निर्णय के विरुद्ध अपील सर्वोच्च न्यायालय में की जाती है इसलिए इसे अपीलीय न्यायालय भी कहा जाता है।

भारत में सर्वोच्च न्यायालय से नीचे विभिन्न राज्यों में उच्च न्यायालय स्थित हैं। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश तथा उस राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है । उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की उम्र तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। उच्च न्यायालय में तीन प्रकार की पीठें होती है- एकल पीठ, खण्डपीठ तथा संवैधानिक पीठएकल पीठ में मात्र एक जज बैठता है जिस के निर्णय को खंडपीठ में चुनौती दी जा सकती है। खण्डपीठ में दो से तीन जजों की बेंच होती है जिसकी निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। संवैधानिक पीठ में कम से कम 5 जज होते हैं। जिला न्यायालय के किसी निर्णय के विरुद्ध अपील उच्च न्यायालय में की जाती है इसलिए इसे अपीलीय न्यायालय कहा जाता है।

उच्च न्यायालय के नीचे जिला न्यायालय तथा उसके अधीनस्थ न्यायालय होते हैं। जिला न्यायालय का प्रधान, प्रधान न्यायाधीश होता है जिनकी नियुक्ति उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर राज्यपाल द्वारा की जाती है। जिला स्तर पर सिविल तथा आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए सिविल तथा सेशन कोर्ट अलग-अलग होते हैं, जिनके विरुद्ध जांच, स्थानान्तरण तथा निलम्बन की शक्तियां उच्च न्यायालय में निहित होती हैं। पुराने लम्बित आपराधिक वादों  तथा जघन्य अपराधों के अण्डर ट्रायल वादों के त्वरित निस्तारण हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित है जो अतिरिक्त सत्र न्यायालय हैं। जिला अदालतों में लोक अदालतें  भी होती हैं जिनके न्यायाधीश पदेन या सेवानिवृत्त जज तथा 2 सदस्य (एक सामाजिक कार्यकर्ता तथा एक वकील) होते हैं। लोक अदालत में बीमा दावे तथा क्षतिपूर्ति से सम्बन्धित वादों का निस्तारण किया जाता है । लोक अदालत के निर्णय के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती है।

न्यायपालिका तथा व्यवस्थापिका के मध्य यदि कोई मतभेद या विवाद होता है तो राष्ट्रपति  मध्यस्थता कर उक्त विवाद को सुलझाता है।

Related Articles

Back to top button
Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes

AdBlock Detected

Please Consider Supporting Us By Disabling Your AD Blocker