भारत निर्वाचन आयोग (INDIA ELECTION COMMISSION)

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भारत निर्वाचन आयोग क्या है ?

भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त एवं अर्ध्द-न्यायिक संस्थान है जिसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 ई0 को की गई थी। 25 जनवरी को मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र सम्पूर्ण भारत है। भारत निर्वाचन आयोग का मुख्यालय निर्वाचन सदन अशोक रोड नई दिल्ली है।

 

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भारत निर्वाचन आयोग की संरचनाः

प्रारम्भ में भारत निर्वाचन आयोग एकल- सदस्यीय निकाय था। वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयोग तथा दो निर्वाचन आयुक्त हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्तः सुनील अरोडा (आई0ए0एस0)।

निर्वाचन आयुक्त-ः(1) अशोक लवासा (आई0ए0एस0)।

(2) सुशील चन्द्र (भारतीय राजस्व सेवा, आयकर)।

भारत निर्वाचन आयोग की नियुक्ति तथा कार्यकालः

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करता है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 06 वर्ष या 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो, का होता है।

निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 06 या 62 वर्ष की आयु जो भी पहले हो, का होता है।

निर्वाचन आयोग की शक्तियांः

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-324(1) के अनुसार भारत निर्वाचन आयोग की शक्तियां अत्यन्त व्यापक हैं जो कि कार्यपालिका द्वारा नियन्त्रित नही हो सकतीं । भारत निर्वाचन आयोग की शक्तियां संवैधानिक उपायों तथा संसद द्वरा विधि बनाकर ही नियन्त्रित की जा सकती हैं।

भारत निर्वाचन आयोग संसद द्वारा निर्मित विधि का उल्लंघन नही कर सकता और न ही स्वेच्छापूर्ण कार्य कर सकता है।

भारत निर्वाचन आयोग की शक्तियां वैध रूप से बनी निर्वाचन विधि के विरुध्द प्रयोग नही की जा सकती है अर्थात् निर्वाचन विधि का उल्लंघन नही कर सकता।

भारत निर्वाचन आयोग चुनाव का कार्यक्रम निर्धारित करने, राजनैतिक पार्टियों को चुनाव चिन्ह आवंटित करने तथा निष्पक्ष चुनाव करवाने का निर्देश देने की शक्ति रखता है।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा-14 व 15 के अनुसार राष्ट्रपति, राज्यपाल को निर्वाचन आयोग की सलाह के अनुसार ही निर्वाचन सम्बन्धी अधिसूचना जारी करने का अधिकार है।

भारत निर्वाचन आयोग के कार्यः

  • राजनातिक दलों का पंजीकरण करना।
  • निर्वाचक नामावली तैयार करना।
  • निर्वाचनों का पर्यवेक्षण, निर्देशन तथा चुनावों का आयोजन करवाना।
  • राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, संसद, राज्य विधानसभाओं के चुनाव करवाना ।
  • राजनैतिक दलों को राष्ट्रीय, राज्य स्तर के दल के रूप में वर्गीकरण करना / मान्यता देना।
  • राजनैतिक दलों को चुनाव चिन्ह का आवंटन करना।
  • सांसद की अयोग्यता (दल-बदल को छोडकर) राष्ट्रपति को सलाह देना।
  • विधायक की अयोग्यता (दल-बदल को छोडकर) राज्यपाल को सलाह देना।
  • निर्वाचन के गलत उपायों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों को निर्वाचन के अयोग्य घोषित करना।

भारत में निर्वाचन सुधारः

जन प्रतिनिधित्व संशोधन अधिनियम 1988 के द्वारा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 में निम्नांकित संशोधन किये गये हैंः 

  • ई0वी0एम0 (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) का प्रयोग किया जा सकेगा। भारत में ई0वी0एम0 का प्रयोग सर्वप्रथम 2004 ई0 के लोकसभा चुनाव में किया गया।
  • राजनैतिक दलों को भारत निर्वाचन आयोग से पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

 

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