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चुम्बकत्व तथा द्रव्य (Magnetism and matter)

चुम्बकत्व तथा द्रव्य (Magnetism and matter)

किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वह किसी वस्तु को आकर्षित या प्रतिकर्षित करता है तथा स्वतन्त्र रूप में लटकाने पर उत्तर-दक्षिण दिशा की तरफ स्थिर हो जाता है, चुम्बकत्व (Magnetism) कहलाता है तथा ऐसे पदार्थ चुम्बक (Magnet) कहलाते हैं। अस्थायी चुम्बक बनाने के लिए नरम लोहे तथा स्थायी चुम्बक बनाने का लिए इस्पात का प्रयोग किया जाता है।

चुम्बकीय पदार्थ के प्रकार (Type of Magnetic material)

चुम्बकीय पदार्थ 05 प्रकार को होते हैः लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic material), अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic material),फेरी चुम्बकीय पदार्थ), एण्टी फेरीचुम्बकीय पदार्थ तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थ )।

लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic material)

वे पदार्थ जो कम शक्तिशाली चुम्बक से आकर्षित होते हैं, आपेक्षिक चुम्बकशीलता अधिक होती है तथा चुम्बकीय प्रवृत्ति अधिकतम एवं धनात्मक होती है, बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुम्बकित हो जाते हैं तथा कमजोर से प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र की तरफ तेजी से आकर्षित होते हैं, लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic matter) कहलाते हैं। लोहा इस्पात, कोबाल्ट, निकिल आदि लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic matter) हैं। इन पदार्थों से स्थायी चुम्बक बनाये जाते हैं। ये पदार्थ एक निश्चित ताप पर पहुंचने के बाद अपना लौह चुम्बकीय गुण समाप्त कर देते, उस ताप को क्यूरी ताप कहा जाता है।

अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic material)

वे पदार्थ जो अधिक शक्तिशाली चुम्बक से आकर्षित होते हैं, आपेक्षिक चुम्बकशीलता 01 होती है, चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक एवं कम होती है, बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा मे थोड़े से चुम्बकित हो जाते हैं तथा कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र से प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र की तरफ चलने की प्रवृत्ति रखते हैं,अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic matter) कहलाते हैं। जैसे- प्लेटिनम, मैंगनीज, एलुमिनियम, टंगस्टन आदि अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic matter) हैं। इन पदार्थों को उक्त गुण अनुचुम्बकत्व कहलाता है।

फेरी चुम्बकीय पदार्थ

वे पदार्थ जिनमें डोमेन का चुम्बकीय आघूर्ण  आपस में विपरीत हेने के कारण परिणामी आघूर्ण शून्य हो जाता है, एण्टी फेरीचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

एण्टी फेरीचुम्बकीय पदार्थ

वे पदार्थ जिनमें डोमेन का चुम्बकीय आघूर्ण  आपस में विपरीत हेने के कारण परिणामी आघूर्ण शून्य हो जाता है, एण्टी फेरीचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

प्रतिचुम्बकीय पदार्थ 

वे पदार्थ जो शक्तिशाली चुम्बक से बहुत थोड़ा सा ही आकर्षित होते है, चुम्बकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है तथा अपेक्षिक चुम्बकशीलता 1 से कम होती है, प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र से कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र की तरफ चलने की प्रवृत्ति रखते हैं तथा बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की विपरीत दिशा में थोड़ा सा चुम्बकित हो जाते हैं, प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं तथा इन पदार्थों के उक्त गुण को प्रतिचुम्बकत्व कहते हैं। एण्टीमनी, जस्ता, नमक, फास्फोरस, तांबा, हीरा, शीशा, पारा, ग्रेफाइट, चांदी, हाइड्रोजन, बिस्मथ, जल, अल्कोहल आदि प्रतिचुम्बकीय पदार्थ  हैं।

चुम्बक (Magnet)

चुम्बक के दोनो सिरों पर चुम्बकत्व अधिक होता है । चुम्बक के दोनों सिरों को ध्रुव (Pole) कहते हैं। जो सिरा उत्तर दिशा की तरफ स्थिर होता है उसे उत्तरी ध्रुव (North Pole) तथा जो सिरा दक्षिण दिशा में स्थिर होता है उसे दक्षिणी ध्रुव(South Pole) कहते हैं।

चुम्बक के दोनों ध्रुवों को मिलाने वाली रेखा को चुम्बकीय अक्ष कहते हैं।

चुम्बक के सजातीय ध्रुव एक दूसरे को विकर्षित तथा विजातीय ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते हैं।

चुम्बक के प्रकार (Type of magnet)

चुम्बक 02 प्रकार का होता हैः (1) प्राकृतिक चुम्बक (Natural Magnet) (2) कृत्रिम चुम्बक (Artificial Magnet)।

प्राकृतिक चुम्बक (Natural Magnet)

प्रकृति में पाया जाने वाला मैग्नेटाइट (लोहे का अयस्क) नामक पदार्थ जो कि लोहे के टुकड़े को अपनी तरफ आकर्षित करता है, उसे प्राकृतिक चुम्बक (Natural Magnet) कहते हैं।

कृत्रिम चुम्बक (Artificial Magnet)

कृत्रिम चुम्बक नरम लोहा या इस्पात से बनाये जाते हैं। मानव द्वारा कृत्रिम विधियों से निर्मित चुम्बक को कृत्रिम चुम्बक (Artificial Magnet) कहते हैं। जैसे- विद्युत चुम्बक (Electromagnet) आदि।

विद्युत चुम्बक (Electromagnet) का उपयोग डायनेमो, टेलीफोन, विद्युत घण्टी, तार संचार, ट्रान्सफार्मर आदि बनाने मे किया जाता है।

चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता (Magnetic field intensity)

चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत् एकांक लम्बाई का ऐसा चालक तार रखा जाए जिसमें एकांक प्रबलता की धारा प्रवाहित हो रही हो हो चालक पर लगने वाले बल को चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता कहते हैं।

चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता सदिश राशि है जिसका मात्रक न्यूटन / ऐम्पियर-मीटर या बेवर / मीटर2 या टेक्सला है।

चुम्बकीय बल रेखाए (Magnetic Force lines)

चुम्बकीय क्षेत्र में वे काल्पनिक रेखाएं जो उस स्थान में चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करती हैं, चुम्बकीय बल रेखाएं कहलाती हैं।

चुम्बकीय बल रेखाओं के गुण (Properties of Magnetic Force lines)

चुम्बकीय बल रेखाएं चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं तथा वक्र बनाती हुई दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश कर जाती हैं और चुम्बक के अन्दर से होती हुई पुनः उत्तरी ध्रुव में आ जाती हैं। दो चुम्बकीय बल रेखाएं एक दूसरे को कभी नही काटती हैं। एक समान चुम्बकीय क्षेत्र की चुम्बकीय बल रेखाएं परस्पर समान्तर तथा बराबर दूरी पर होती हैं।

चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field)

चुम्बक के चारों तरफ का वह क्षेत्र जिसमें दूसरा चुम्बक आकर्षण या प्रतिकर्षण का अनुभव करता है, चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) कहलाता है।

चुम्बकीय क्षेत्र का S.I. मात्रक टेक्सला (T) होता है।

 दिकपात् कोंण (Declination Angle)

किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच बनने वाले कोण को दिकपात् कोंण (Declination Angle) कहते हैं।

 डोमेन (Domain)

लौह चुम्बकीय पदार्थों के भीतर पाये जाने वाले परमाणुओं के असंख्य एवं अतिसूक्ष्म संरचनाओं को डोमेन (Domain) कहते हैं । पदार्थों का चुम्बकीय गुण डोमेन के कारण ही होता है। एक डोमेन में 1018 से 1021 तक परमाणु पाये जाते हैं।

 क्यूरी तापः

वह ताप जिस पर लौह चुम्बकीय पदार्थ अपना चुम्बकीय गुण समाप्त कर देते हैं तथा अनुचुम्बकीय पदार्थ में बदल जाता है, क्यूरी ताप  कहलाता है। निकिल के लिए क्यूरी ताप 3580 C तथा लोहे के लिए 7700 C होता है।

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