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मेटल डिटेक्टर

मेटल डिटेक्टर

जब मनुष्य गोपनीय तरीके से अपने कपड़ों, जूतों, बैग आदि में चोरी छिपे गोपनीय तरीके से अश्त्र-शस्त्र, विस्फोटक पदार्थ आदि लेकर चलते हुए अपराध करने लगा तो इसका पता लगाने की युक्तियों के फलस्वरूप वर्ष 1937 ई0 में प्रसिध्द वैज्ञानिक जेरार्ड फिशर ने मेटल डिटेक्टर नामक यन्त्र का आविष्कार किया जिसे हिन्दी में “धातु संसूचक यन्त्र” कहा जाता है। यह यन्त्र वैद्युत चुम्बकीय सिध्दान्त पर कार्य करता है। मेटल डिटेक्टर में लगे हुए शक्तिशाली प्रोसेसर धातु, आयुध, विस्फोटक पदार्थ आदि का बड़ी ही आसानी से पता लगाते हैं।

मेटल डिटेक्टर का उपयोगः

मेटल डिटेक्टर एक ऐसा यन्त्र है जो कि गुप्त अस्त्र शस्त्र, धातु, विस्फोटक पदार्थ आदि का पता आसानी से लगा लेता है मनुष्य के कपड़ों, जूतों, बैग में छिपा कर रखी गयी छोटी से छोटी कील, तलवार, पिस्तौल, चाकू आदि को बड़ी आसानी से खोज निकालता है। मनुष्य के शरीर, बैग या अन्य सामानों पर जैसे ही मेटल डिटेक्टर फिराते हैं वैसे ही तत्काल एवं आसानी से पता चल जाता है कि उसके पास कोई अस्त्र- शस्त्र या धातु है या नही। इसके अतिरिक्त मेटल डिटेक्टर का उपयोग लैण्ड माइंस, विस्फोटक, बम आदि भी का पता लगाने में किया जाता है जो कि धूल, मिट्टी, बालू, लकड़ी आदि के मध्य छिपाये गये अस्त्र- शस्त्र, विस्फोटक व धातु का पता आसानी से लगा लेता है। मेटल डिटेक्टर को हाथ में लेकर अस्त्र-शस्त्र, विस्फोटक, धातु, लैंण्डमाइन आदि की चेकिंग की जाती है तथा आवश्यकतानुसार दरवाजे की चौखट में भी लगाकर चेकिंग की जाती है। मेटल डिटेक्टर का मुख्यतः उपयोग विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए किया जाता है।

मेटल डिटेक्टर की कार्य प्रणालीः

मेटल डिटेक्टर एक संवेदनशील यन्त्र है जो कि विद्युत चुम्बकीय सिध्दान्त पर कार्य करता है। किसी भी धातु की  वस्तु को इस संवेदनशील उपकरण से आसानी से पहचान लिया जाता है। धातु की वस्तु के पास जब यह यन्त्र लाया जाता है तब प्रत्यावर्तक चुम्कीय क्षेत्र उत्पन्न होने से विद्युत लहरें उससे टकराने लगती है तथा उस वस्तु के चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र निर्मित हो जाता है। यह चुम्बकीय क्षेत्र वस्तु के अपने चुम्बकीय क्षेत्र को तोड़-मरोड़ देता है तथा वस्तु की उपस्थिति का पता चल जाता है और मेटल डिटेक्टर से आवाज आने लगती है।

मेटल डिटेक्टर के प्रकारः

मेटल डिटेक्टर मुख्यतया चार प्रकार के होते हैः

  1. बैलेन्स्ड सर्च क्वाइल यूनिट डिटेक्टर।
  2. फील्ड सर्च यूनिट डिटेक्टर।
  3. पल्स मैग्नेटाइजेशन यूनिट डिटेक्टर।
  4. हेटेरोडाइन डिटेक्टर।

उक्त मेटल डिटेक्टरों का उपयोग मात्र 6 इंच तक की दूरी की धातुओं, अश्त्र शस्त्र आदि का पता लगाने के लिए किया जाता है। जब इसका उपयोग जमीन पर किया जाता है तो पृथ्वी की संवाहकता से गणना पर प्रभाव पड़ता है। फील्ड सर्च युनिट डिटेक्टर का उपयोग मुख्य रूप से पुरातत्व सम्बन्धी खुदाई के काम में भी किया जाता है।

मैग्नेटिक सर्च यूनिट डिटेक्टरः

यह एक अत्यन्त प्रभावशाली सर्च यूनिट डिटेक्टर है। जो कि वर्तमान में उपयोग में लाया जाने वाला सर्वाधिक प्रचलित मेटल डिटेक्टर है। मैग्नेटिक सर्च यूनिट डिटेक्टर से- (1) लोहा, इस्पात आदि समस्त चुम्बकीय लौह धातु की वस्तुओं का पता आसानी से लगाया जा सकता है। (2) दो फिट की दूरी से एक इंच लम्बी कील जैसी छोटी वस्तु (धातु की वस्तु) का बेहद आसानी से पता लगाया जा सकता है। (3) साठ फीट तक की लम्बी दूरी से कार, मोटर जैसी बड़ी वस्तुओं की विद्यमानता का सुगमतापूर्वक आसानी से पता लगाया जा सकता है।

मैग्नेटिक सर्च यूनिट डिटेक्टर दो मैग्नोमीटर वाले खोजी किश्म के होते हैं। दोनों मैग्नोमीटरों को एक नली में एक ही धुरी पर काफी सावधानी से एक दूसरे के करीब 12 इंच की दूरी पर लगाया जाता है। नली अपने वजन की वजह से लटकी रहती है और पृथ्वी के क्षेत्र के लम्ब रूप भागों को माप लेती है। पृथ्वी के गुणों से इसके गुण अलग होते हैं। इस प्रकार यह डिटेक्टर काफी शक्तिशाली होता है। अपनी उच्च गुणवत्ता व शक्ति के कारण यह डिटेक्टर वर्तमान समय में अत्यन्त लोकप्रिय तथा प्रचलन में हैं।

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