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जैव विकास (Organic Evolution)

जैव विकास (Organic Evolution)

प्रारम्भिक सूक्ष्म जीवों के क्रमिक परिवर्तनों द्वारा अधिकाधिक जीवों की उत्पत्ति को जैव  विकास कहते हैं। जैव विकास अनुवांशिक स्तर पर होता है। अर्थात् एक पीढी से दूसरी पीढी में होने वाला अनुवांशिक परिवर्तन जैव विकास है। जैव विकास के अनुसार पृथ्वी पर पहले की पूर्वज जातियों के जैव विकास के द्वारा ही नई-नई जातियां उत्पन्न हुयी है तथा वर्तमान में भी उत्पन्न हो रही है। जीवन की उत्पत्ति से सम्बन्धित सबसे प्राचीन परिकल्पना स्वत: उत्पादन की है  तथा आधुनिक परिकल्पना प्रकृतिवाद है।

समजात अंग (Endogenous Organ)

ऐसे अंग जो विभिन्न कार्यों के लिए उपयोजित होने के कारण काफी असमान दिखाई देते हैं परन्तु मौलिक रचना एवं भ्रूणीय परिवर्धन में एक समान होते हैं उन्हें समजात अंग कहते हैं। जैसे-मनुष्य का हाथ, बिल्ली का पंजा, चमगादड़ के पंख, घोड़े की असली टांग तथा सील के स्लीपर समजात अंग हैं जिनकी मौलिक रचना एक जैसी होती है । इन सभी अंगों में ह्यूरस, रेडियो अलना, कार्पल्स, मेटाकार्पल्स आदि हड्डियां पायी जाती हैं। इनका भ्रूणीय विकास भी एक सा ही हुआ है परन्तु इन सबका कार्य अलग-अलग है। चमगादड़ के पंख  उडने के लिए, सील का स्लीपर तैरने के लिए, घोडे की टांग दौडने के लिए तथा मनुष्य का हाथ किसी वस्तु को पकडने के लिए प्रयुक्त होता है।

अवशेषी अंग (Residual Organ)

जीवो के ऐसे अंग जो जीवों के पूर्वजों में पूर्ण विकसित होते हैं परन्तु वातावरणीय परिस्थितियों में बदलाव के कारण महत्वहीन हो जाने के कारण इनका क्रमिक लोप होने लगता है वे अवशेषी अंग कहलाते हैं। जैसे- त्वचा के बाल, अपेंडिक्स, कर्ण पल्लव  आदि।

मनुष्य में लगभग 100 अवशेषी अंग पाए जाते हैं।

जल – स्थलचर जीवों का विकास मत्स्य वर्ग से हुआ है।

पक्षियों तथा स्तनी वर्ग के जन्तुओं का विकास सरीसृपों  से हुआ है।

सर्वप्रथम प्रकाश – संश्लेषी जीव सायनो बैक्टीरिया थे।

समरूप अंग (Identical Organ)

ऐसे अंग जो समान कार्य के लिए उपयोजित हो जाने के कारण समान दिखाई देते हैं परंतु मौलिक रचना एवं भ्रूणीय परिवर्धन में भिन्न होते हैं उन्हें समरूप अंग कहते हैं। जैसे- पक्षियों, चमगादड़ तथा तितलियों के पंख उडने का कार्य करते हैं तथा देखनें में भी एक समान लगते है परन्तु इन सबकी उत्पत्ति अलग-अलग तरीकों से होती है। चमगादड के पंख की रचना हाथ की चार लम्बी अंगुलियों तथा धड के मध्य फैली त्वचा से हुई है, तितलियों के पंख की रचना शरीर भित्ति के भंज द्वारा हुई है तथा पक्षियों के पंख की रचना इनके अग्रपादों पर परों के द्वारा हुई है।

प्रमुख जीव-जन्तु तथा उनमें पाए जाने वाले गुणसूत्रः

जीव -जन्तुओं की किस्में                                  गुणसूत्रों की संख्या

मच्छर                                                                6

मनुष्य                                                               46

चिंपांजी                                                             48

घोड़ा                                                                64

कुत्ता                                                                78

कबूतर                                                              80

घरेलू मक्खी                                                      12

मेंढक                                                               26

बिल्ली                                                              38

चूहा                                                                  40

खरगोश                                                            44

. जीवन की उत्पत्ति से सम्बन्धित सबसे प्राचीन परिकल्पना कौन सी है

जीवन की उत्पत्ति से सम्बन्धित सबसे प्राचीन परिकल्पना स्वत: उत्पादन  है।

. जीवन की उत्पत्ति से सम्बन्धित आधुनिक परिकल्पना कौन सी है?

जीवन की उत्पत्ति से सम्बन्धित आधुनिक परिकल्पना प्रकृतिवाद है।

. एक पीढी से दूसरी पीढी में होने वाले अनुवांशिक परिवर्तन को क्या कहते हैं?

एक पीढी से दूसरी पीढी में होने वाला अनुवांशिक परिवर्तन को जैव विकास कहते हैं।

. पक्षी के पंख तथा घोडे के अग्रपाद, मनुष्य की बाजू तथा गाय के अग्रपाद एवं पक्षी के पंख तथा मेंढक का अग्रपाद किस प्रकार के अंग हैं?

पक्षी के पंख तथा घोडे के अग्रपाद, मनुष्य की बाजू तथा गाय के अग्रपाद एवं पक्षी के पंख तथा मेंढक का अग्रपाद समजात अंग हैं।

. पक्षी के पंख तथा कीट के पंख, चने के पौधे तथा अंगूर की बेल में प्रतान, कीट के पंख तथा चमगादड के पंख एवं चने के पौधे तथा मटर के पौधे में प्रतान किस प्रकार के अंग हैं?

पक्षी के पंख तथा कीट के पंख, चने के पौधे तथा अंगूर की बेल में प्रतान, कीट के पंख तथा चमगादड के पंख एवं चने के पौधे तथा मटर के पौधे में प्रतान समरूप अंग हैं।

. त्वचा के बाल, अपेंडिक्स, कर्ण पल्लव  किस प्रकार के अंग हैं?

त्वचा के बाल, अपेंडिक्स, कर्ण पल्लव  अवशेषी अंग हैं।

. पक्षियों तथा स्तनी वर्ग के जन्तुओं का विकास किससे हुआ है?

पक्षियों तथा स्तनी वर्ग के जन्तुओं का विकास सरीसृपों  से हुआ है।

. जल – स्थलचर जीवों का विकास किस वर्ग से हुआ है?

जल – स्थलचर जीवों का विकास मत्स्य वर्ग से हुआ है।

. मनुष्य में कितने गुणसूत्र पाये जाते हैं?

मनुष्य में 46 गुणसूत्र पाये जाते हैं।

. चिम्पांजी में कितने गुणसूत्र पाये जाते हैं?

चिम्पांजी में 48 गुणसूत्र पाये जाते हैं।

. मेंढक में कितने गुणसूत्र पाये जाते हैं?

मेंढक में 26  गुणसूत्र पाये जाते हैं।

. कबूतर में कितने गुणसूत्र पाये जाते हैं?

कबूतर  में 80 गुणसूत्र पाये जाते हैं।

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