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हमारी पृथ्वी (Our Earth)

(Our Earth)

के समस्त ग्रहों मे पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जहां पर जीवन है। हमारी पृथ्वी आकार में सौर मण्डल का पांचवां सबसे बड़ा ग्रह है तथा सौर मण्डल के प्रधान ग्रह सूर्य से दूरी के आधार पर पृथ्वी सौर मण्डल का तीसरा ग्रह है जो सूर्य तथा मंगल ग्रह के मध्य में स्थित है। भूगोलवेत्ता जान हार्शल के अनुसार पृथ्वी का आकार पृथ्व्याकार है। पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा है। सूर्य से पृथ्वी की दूरी लगभग 15 करोंड़ किमी0 है। पृथ्वी तथा चन्द्गमा के मध्य की औसत दूरी लगभग 4 लाख किलोमीटर है।

पृथ्वी पर जल की उपस्थिति है जिसके कारण इसे नीला ग्रह (Blue planet) भी कहा जाता है। पृथ्वी का अक्ष उसके कक्षा तल पर बने लम्ब से 23.50 झुका है। पृथ्वी अपनी कक्षा के सापेक्ष 66.50 का कोण बनाती है। पृथ्वी का आयतन 10.83 × 10 घन किमी0 तथा जल के सापेक्ष औसत घनत्व 5.52 है। पृथ्वी का आकार एवं बनावट शुक्र ग्रह के समान है। समुद्रतल से पृथ्वी की सर्वाधिक ऊंचाई 8848 मीटर है।

विषुवत रेखा पृथ्वी के मध्य अर्थात् केन्द्र से होकर गुजरती है। पृथ्वी का विषुवतीय व्यास 12756 किमी0 एवं ध्रुवीय ब्यास 12714 किमी0 है। पृथ्वी के ध्रुवीय व्यास तथा विषुवत रेखीय व्यास का अन्तर 43 किमी0 है।

सौर मण्डल का तारा साइरस (डाग स्टार) की पृथ्वी से दूरी लगभग 9 प्रकाश वर्ष है जो रात्रि में चमकने वाला सबसे चमकीला तारा है। इस तारे का द्रव्यमान सौर मण्डल के प्रधान ग्रह सूर्य से दो गुना है। तारा प्राक्सिमा सेन्चुरी पृथ्वी से 4.22 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

पृथ्वी की आयु तथा क्षेत्रफल (Age and Area of Earth)

भूगोल वेत्ताओं के अनुसार पृथ्वी की आयु लगभग 4.6 विलियन वर्ष है। पृथ्वी का सम्पूर्ण क्षेत्रफल लगभग 51 करोंड़ 1 लाख 500 वर्ग किमी0 है।

पृथ्वी पर जल तथा स्थल (Water and land on Earth)

पृथ्वी पर 71 प्रतिशत पानी तथा 29 प्रतिशत स्थल है। इस प्रकार पृथ्वी पर लगभग 2 / 3 भाग जल तथा 1 / 3 भाग स्थल है।

पृथ्वी का परिक्रमण काल (Revolutions of the Earth)

पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाती है जिसे एक चक्कर लगाने में दिन 5 घण्टे 48 मिनट 46 सेकेण्ड लगता है। उपरोक्त समयावधि के दौरान पृथ्वी का माध्य वेग 30 किमी0 / सेकेण्ड होता है। सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाने की यह प्रक्रिया पृथ्वी की वार्षिक गति या परिक्रमण कहलाता है। इस प्रकार पृथ्वी का परिक्रमण काल 365 दिन 5 घण्टे 48 मिनट 46 सेकेण्ड है।

पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन का कारण (The reason for climate change on Earth)

पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन का कारण पृथ्वी का अपने अक्ष पर झुका होना तथा सूर्य के सापेक्ष उसकी स्थिति में परिवर्तन अर्थात् वार्षिक गति या परिक्रमण काल है।

सौर वर्ष (Solar year)

पृथ्वी द्वारा सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करनें में लगा समय सौर वर्ष (Solar year) कहलाता है।

पृथ्वी पर दिन रात छोटा बड़ा होने का कारण (The reason for being big and small day and night on Earth)

हमारी पृथ्वी पर दिन रात छोटा बड़ा होने का कारण पृथ्वी की वार्षिक गति या परिक्रमण काल है।

लीप वर्ष (Leap year)

प्रत्येक सौर वर्ष कलेण्डर वर्ष से लगभग 6 घण्टे बढ़ जाता है जिसे हर चौथे वर्ष में एक दिन बनाकर जोड़ दिया जाता है तथा उक्त वर्ष को लीप वर्ष कहा जाता है जिसमें सामान्य वर्ष से एक दिन अधिक अर्थात् 366 दिन होते हैं जिसके कारण लीप वर्ष के माह फरवरी में एक दिन अधिक अर्थात् 28 दिन के स्थान 29 दिन होते हैं। इस प्रकार लीप वर्ष में 366 दिन तथा लीप वर्ष का फरवरी माह 29 दिनों का होता है।

पृथ्वी की घूर्णन गति (Rotation motion of Earth)

पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूरब दिशा में चक्कर लगाती है जिसकी गति 1,610 किमी0 प्रति घण्टे है। पृथ्वी को अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा करनें में 23 घन्टा 56 मिनट 4 सेकेण्ड का समय लगता है। पृथ्वी की उक्त गति को घूर्णन गति, आवर्तन गति या दैनिक गति कहा जाता है।

पृथ्वी पर दिन-रात होने का कारण (Reason for day and night on Earth)

पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूरब दिशा में 1,610 किमी0 प्रति घण्टे की गति से घूर्णन गति करती है जिसके कारण पृथ्वी पर दिन व रात होते हैं।

प्लूटो एक बौना ग्रह (Pluto is a dwarf planet)

24 अगस्त 2006 ई0 को प्राग (चेक गणराज्य) में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय खगोल विियों की बैठक में खगोल विज्ञानियों नें सौर मण्डल के ग्रह प्लूटो को ग्रह होने का दर्जा समाप्त करके इसे बौना ग्रह की श्रेणी मे रख दिया है। इसलिए प्लूटो को बौना ग्रह (छुद्र ग्रह) कहा जाता है।

यदि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन करना बन्द कर दे तो क्या होगा?

(What will happen if the Earth stops rotating on its axis?)

यदि दिन में किसी भी समय पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन गति करना बन्द कर दे तो समय की गति थम जायेगी तथा पृथ्वी पर हमेशा दिन ही रहेगा, रात कभी नही होगी। इसी प्रकार यदि रात में किसी भी समय पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन गति करना बन्द कर दे तो समय की गति थम जायेगी तथा पृथ्वी पर हमेशा रात ही रहेगा, दिन कभी नही होगा।

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