Miscellaneous

पैरोल (PAROLE)

पैरोल (PAROLE)

पैरोल वह व्यवस्था है जिसमें कारावास की सजा काट रहे किसी बन्दी को कारावास की अवधि का कुछ भाग जेल में व्यतीत करने के उपरान्त कुछ विशेष शर्तों पर सीमित अवधि के लिए समाज में रहने के लिए मुक्त कर दिया जाता है तथा मुक्त किया गया उक्त व्यक्ति जेल से बाहर रहता है।

पैरोल का उद्देश्य (Purpose of parole)

पैरोल के मुख्यतया निम्नांकित उद्देश्य हैः

  1. समाज में बन्दी का रचनात्मक समायोजन तथा कारावास के दुष्परिणामों को कम करना है।
  2. लम्बी अवधि से सजा काट रहे बन्दियों में निराशा तथा कड़वाहट के दृष्टिकोण पर रोंक लगाना है।
  3. लम्बी अवधि से सजा काट रहे अपराधी को संकटकाल में या विशिष्ट अवसरों पर अपने परिवार के साथ रहने का अवसर प्रदान किया जाना है।

पैरोल पर रिहाई के लिए आवश्यक शर्ते (Terms required for release on parole)

पैरोल पर रिहाई के लिए निम्नांकित शर्तें आवश्यक हैः

  1. किसी अपराध में दन्डित होने पर बन्दी जेल में सजा काट रहा हो।
  2. बन्दी का जेल में व्यवहार अच्छा हो।

पैरोल नहीं दिया जायेगा (Parole will not be granted)

निम्नांकित व्यक्तियों को पैरोल नही दिया जा सकता हैः

  1. देशद्रोह में सजायाफ्ता व्यक्ति को।
  2. ठगी, डकैती, सैनिक अपराधी तथा जाली नोट बनाने वाले अपराधी को।
  3. उस अपराधी को जिसकी सजा मात्र 01 वर्ष बची हो।
  4. उस अपराधी को जिसको 05 वर्ष से कम सजा मिली हो।

पैरोल देने हेतु प्राधिकृत अधिकारी (Authorized Officer for Parole)

पैरोल जिलाधिकारी, मण्डलायुक्त तथा शासन द्वारा दिया जा सकता है।

  1. जिलाधिकारी 15 दिन तक का पैरोल दे सकता है।
  2. दिन तक दिए गए पैरोल में मण्डलायुक्त 15 दिन की बढोत्तरी कर सकता है।
  3. उपरोक्त अवधि के उपरान्त पैरोल शासन द्वारा दिया जाता है।

पैरोल का आधार (Parole grounds)

  1. जेल में सजा भुगत रहे बन्दी व्यक्ति के घर या परिवार में कोई उत्सव होता है या कोई दुर्घटना घटती है या किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसे कुछ समय के लिए पैरोल पर रिहा किया जा सकता है।
  2. यदि बन्दी व्यक्ति की स्वयं की शादी है या उसकी पुत्री की शादी है तो असे पैरोल पर रिहा किया जा सकता है।
  3. यदि बन्दी के माता-पिता, पत्नी या बच्चे वीमार हैं तथा उनकी देख-रेख करने वाला कोई अन्य व्यक्ति नही है तो उसे इलाज कराने तथा देख-भाल करने के लिए कुछ समय के लिए पैरोल पर रिहा किया जा सकता है।
  4. यदि बन्दी / कैदी को कोई सम्पत्ति बेंचनी है या अपने किसी परिजन या रिश्तेदार के नाम ट्रान्सफर या वसीयत करनी है तो उसके द्वारा आवेदन किए जाने पर उसे कुछ समय के लिए पैरोल पर रिहा किया जा सकता है।
  5. यदि कैदी / बन्दी किसी ऐसे रोग से ग्रसित है जिसका इलाज जेल चिकित्सालय में उपलब्ध नही है तो उसे इलाज कराने केलिए पैरोल पर रिहा किया जायेगा।
  6. यदि बन्दी अपने परिवार का भरण-पोंषण करने वाला इकलौता व्यक्ति था तो उसे परिवार का भरण-पोंषण करने के लिए पैरोल पर रिहा किया जा सकता है।
  7. यदि कैदी का स्वयं का या परिवार या रिश्तेदार का कोई सरकारी कार्य है या बैंक का कोई कार्य है जिसमें कैदी की स्वयं की उपस्थिति आवश्यक है तो उसे कुछ समय के लिए पैरोल पर रिहा किया जायेगा।
  8. यदि किसी बन्दी / कैदी के कोई सन्तान नही है तो पत्नी की सहमति से उसके द्वारा सन्तान प्राप्ति के लिए पैरोल पर रिहा किये जाने का आवेदन किए जाने पर उसे पैरोल पर रिहा किए जाने का निर्णय़ बोर्ड ले सकता है। यह पैरोल मात्र सजायाफ्ता बन्दी को ही दिया जा सकता है।

पैरोल पर रिहा बन्दी / कैदी द्वारा पालन किये जाने हेतु नियम (Rules to be followed by a prisoner released on parole)

पैरोल पर रिहा होने वाले बन्दी द्वारा निम्नांकित नियमों का पालन किया जाना आवश्यक हैः

  1. पैरोल पर रिहा बन्दी अच्छे नागरिक की तरह जीवन बितायेगा तथा मद्यपान नही करेगा।
  2. पैरोल की समस्त शर्तों का पूर्णतया पालन करेगा।
  3. पैरोल के आवेदन में दिए गए पते पर निवास करेगा, दूसरी जगह नही जायेगा।
  4. कोई गैर कानूनी कार्य या अपराध नही करेगा तथा किसी दूसरे अपराधी या वैश्या से कोई सम्पर्क नही रखेगा।
  5. यदि कैदी अविवाहित है तो न्यायालय से अनुमति लेकर ही शादी करेगा। न्यायालय की अनुमति के बिना शादी नही करेगा।

पैरोल पर छूटे लोगों के प्रति स्थानीय थाना पुलिस का दायित्व (The responsibility of the local police station towards the people are out on parole )

पैरोल पर छूटे लोगों के प्रति स्थानीय थाना पुलिस का निम्नंकित दायित्व है जिसका निर्वहन स्थानीय थाना पुलिस द्वारा किया जाना नितान्त आवश्यक हैः

  1. पैरोल पर छूटे हुए व्यक्ति पर निरन्तर सतर्क दृष्टि रखते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पैरोल पर छूटा हुआ व्यक्ति पैरोल की शर्तों का पालन कर रहा है अथवा नही। यदि वह पैरोल की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है तो उसके पैरोल को निरस्त कराने की कार्यवाही करना चाहिए।
  2. पैरोल पर छोड़ा गया व्यक्ति शान्तिपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहा है या अपराध में सक्रिय हो गया है। यदि अपराध में सक्रिय हो गया है तो उसका पैरोल निरस्त कराने की कार्यवाही करना चाहिए।

पैरोल तथा जमानत में अन्तर (Difference in parole and bail)

  1. पैरोल में सम्बन्धित व्यक्ति को दण्ड से मुक्त क
  2. रके जेल से रिहा किया जाता है जबकि जमानत में दण्ड से मुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है।
  3. पैरोल कार्यपालक मजिस्ट्रेट तथा शासन द्वारा स्वीकृत किया जाता है जबकि जमानत सम्बंन्धित न्यायालय द्वारा स्वीकृत की जाती है।
  4. पैरोल में सम्बन्धित व्यक्ति को सजायाफ्ता होने के पश्चात कुछ समय जेल में काटना आवश्यक है जबकि जमानत में इसका कोई प्रतिबन्ध नहीं है।
  5. पैरोल का उद्देश्य लम्बी अवधि से जेल में कारावास की सजा भुगत रहे बन्दी को दण्ड की शेष अवधि हेतु मुक्त करके समाज में रहने का अवसर प्रदान किया जाना है जबकि जमानत विचाराधीन बन्दी को अपने विरूद्ध पंजीकृत मुकदमे में अपना पक्ष रखने की तैयारी करने के लिए जमानत दी जाती है।

Related Articles

Back to top button
The Knowledge Gateway Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes

AdBlock Detected

Please Consider Supporting Us By Disabling Your AD Blocker