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प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect)

प्रकाश वैद्युत प्रभाव ()

किसी भी धातु का सबसे छोटा कण परमाणु है जो इलेक्ट्रान, प्रोट्रान तथा न्यूट्रान से बना होता है। न्यूट्रान पर कोई आवेश नही होता है अर्थात उदासीन होता है। प्रोट्रान पर धन आवेश तथा इलेक्ट्रान पर ऋणावेश होता है। प्रोट्रान तथा न्यूट्रान परमाणु के नाभिक में होते हैं तथा इलेक्ट्रान नाभिक के चारों तरफ चक्कर लगाता हैं। उक्त ऋणावेशित इलेक्ट्रान परमाणु के नाभिक में पाये जाने वाले धनावेशित प्रोट्रान के आकर्षण बल के कारण बाहर नही जा पाते तथा नाभिक के चारों तरफ चक्कर लगाते रहते हैं। इस आकर्षण बल को तोड़ने के लिए किसी बाह्य बल की आवश्यकता पड़ती है।

जब कोई विद्युत चुम्बकीय किरण (जैसे- पराबैगनी किरण, एक्स किरण, गामा किरण या दृश्य विकिरण) किसी धातु की सतह पर पड़ती है तो उक्त किरण से ऊर्जा पाकर धातु की सतह से इलेक्ट्रान मुक्त होकर निकलने लगते हैं। इसी घटना को ही प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) कहते हैं।

प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) की घटना में धातु की सतह से जो इलेक्ट्रान निकलते हैं उन्हें प्रकाश इलेक्ट्रान (Photo electron) कहा जाता है।

प्रकाश वैद्युत प्रकाश की खोज वर्ष 1887 ई0 में जर्मनी के प्रसिध्द वैिक हेनरी हर्टज ने किया था जिसके कारण प्रकाश वैद्युत प्रभाव को हर्टज प्रभाव भी कहा जाता है।

जर्मनी के प्रसिध्द वैज्ञानिक हेनरी हर्टज ने प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) की खोज तो कर दिया परन्तु तमाम कोशिशों के बावजूद भी वे प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) की सन्तोषजनक विस्तृत व्याख्या नही कर सके। उनकी इस असफलता का मुख्या कारण था उनके द्रारा प्रकाश तरंग सिध्दान्त के आधार पर प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) को समझा जाना।

आगे चलकर वर्ष 1900 ई0 में प्रसिध्द वैज्ञानिक लेनार्ड नें प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) की सही व्याख्या किया जिनके अनुसार किसी ऋणावेशित प्लेट पर पराबैगनी किरण डालने पर उस प्लेट की सतह से निकले इलेक्ट्रान धनावेशित प्लेट के द्वारा आकर्षित कर लिए जाने के कारण विद्युत परिपथ पूर्ण हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप धारा प्रवाहित होने लगती है किन्तु धनावेशित प्लेट पर पराबैगनी किरण डालने पर धनावेशित प्लेट से निकलने वाले इलेक्ट्रान ऋणावेषित होने के कारण ऋणावेशित प्लेट पर नही आ पाते जिसके कारण परिपथ पूर्ण न होने के कारण धारा प्रवाहित नही होती है।

आगे चलकर वर्ष 1905 ई0 में प्रसिध्द भौतिकी वैज्ञानिक आइन्सटीन द्वारा मैक्स प्लांक के क्वान्टम सिध्दान्त को आधार मानकर प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) की सटीक एवं विस्तृत व्याख्या की गयी।

क्वान्टम सिध्दान्त के अनुसार प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे बण्डलों के रूप में चलता है जिसे फोटान या क्वान्टम कहते हैं। एक फोटान की ऊर्जा (E) = hv ( जहां v = प्रकाश की आवृत्ति तथा h प्लांक नियतांक है)।

उक्त समीकरण ही आइन्सटीन का प्रकाश वैद्युत समीकरण हैं।

फोटानों की ऊर्जा प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है। प्रकाश / किरण की आवृत्ति अधिक होने पर फोटानों की ऊर्जा अधिक होती है तथा आवृत्ति कम होने पर ऊर्जा कम होती है। अर्थात् प्रकाश / किरण की ऊर्जा उसकी आवृत्ति के अनुत्क्रमानुपाती होती है। एक्स-किरण की आवृत्ति अधिक होती है जिसके कारण एक्स-किरण किसी भी धातु पर डाली जाए अधिक मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित होने के कारण सभी धातुओं पर प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) दिखलाती हैं। इसके विपरीत दृश्य प्रकाश की आवृत्ति कम होती है जिसके कारण दृश्य प्रकाश मात्र क्षारीय धातुओं पर ही प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) प्रदर्शित करता है।

प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) प्रदर्शित करने लिए प्रत्येक धातु के लिए अलग-अलग ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है जिसके नियत मान को उस धातु का कार्य फलन कहा जाता है।

यदि किसी धातु की सतह पर पड़ने वाले प्रकाश की ऊर्जा उस धातु के कार्य फलन से अधिक होती है तो इलेक्ट्रान उत्सर्जित होकर प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) होता है और यदि धातु की सतह पर पड़ने वाले प्रकाश की ऊर्जा उस धातु के कार्य फलन से कम होती है तो इलेक्ट्रान उत्सर्जित नही होता जिसके कारण प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) की घटना घटित नही होती है। प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) की सटीक व्याख्या के लिए अल्बर्ट आइन्सटीन को वर्ष 1921 ई0 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect) का उपयोग कैमरा, फोटो सेल, टेलीविजन, सोलर सेल आदि में किया जाता है।

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