वनस्पति कोशिका (Plant Cell)

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Plant Cell

वनस्पति कोशिका (Plant Cell)

वनस्पतियों की सबसे छोटी संरचनात्मक तथा कार्यात्मक इकाई को वनस्पति कोशिका कहते हैं। कोशिका को अंग्रेजी भाषा में सेल (Cell) कहा जाता है जो लैटिन भाषा के शेलूला शब्द से लिया गया है। कोशिका का अध्ययन जीव विज्ञान की साइटोलाजी (Cytology) शाखा के अन्तर्गत किया जाता है। कोशिका की खोज वर्ष 1665 ई0 में अंग्रेज वैज्ञानिक राबर्ट हुक ने किया था। कोशिका के सिध्दान्त का प्रतिपादन वर्ष 1838-39 ई0 में शलाइडेन तथा श्वान ने प्रस्तुत किया था।

कोशिका दो प्रकार की होती हैः एक कोशिकीय कोशिका तथा बहुकोशिकीय कोशिका।

वनस्पति कोशिका के भाग (Part of Plant Cell)

जन्तु कोशिका के निम्नलिखित भाग हैः

  1. कोशिका भित्ति (Cell wall )।
  2. रसधानी (Large vacuole)।
  3. हरित लवक (Chloroplast)
  4. माइट्रोकाण्ड्रिया (Mitochondria)।
  5. गाल्जीकाय (Golgi body)।
  6. अन्तः प्रद्रव्य जालिका (Endoplasmic Reticulum )।
  7. केन्द्रक (Nucleus)।
  8. साइटोप्लाज्म (Cytoplasm)।
  9. राइबोसोम (Ribosome)।

कोशिका भित्ति (Cell wall)

यह सैलूलोज की बनी होती है तथा मात्र पादप कोशिका में पाई जाती है।

रसधानी (Relief)

यह जन्तु तथा पादप दोनों ही कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य में पाई जाती है। इसमें जलनुमा तरल पदार्थ भरे होते हैं तथा यह टोनोप्लास्ट नामक आवरण से ढंकी होती है। इसमें भोज्य पदार्थ संचित रहते हैं।

हरित लवक (Green Lover)

इसमें हरे रंग का पर्ण हरित नामक पदार्थ पाया जाता है जिसकी सहायता से यह प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन बनाता है जिसके कारण इसे “पादप कोशिका का रसोई घर कहा जाता है।

माइटोकाण्ड्रिया (Mitochondria)

इसकी खोज सन 1886 ई0 में अल्टमैंन ने किया था। समस्त ऊर्जावान कार्बनिक पदार्थों का ऑक्सीकरण माइट्रोकांड्रिया में ही होता है जिसके कारण इसमें काफी ऊर्जा प्राप्त होती है इसलिए माइट्रोकाण्ड्रिया को ऊर्जा घर या कोशिका का इंजन या कोशिका का शक्ति केन्द्र भी कहा जाता है।

गाल्जीकाय (Golgi body)

इसकी खोज इटली की प्रसिद्ध वैज्ञानिक कैमिलो गाल्जी ने किया था। इसे कोशिका के अणुओं का यातायात प्रबंधक कहते हैं । यह कोशिका भित्ति, लाइसोसोम तथा ग्लाइकोप्रोटीन का निर्माण करता है। इसे “कोशिका का यातायात प्रबन्धक” भी कहा जाता है।

अन्त: प्रद्रव्य जालिका (Endoplasmic reticulum)

इसमें किनारे किनारे कुछ भागों पर छोटी-छोटी कणिकाएं होती हैं जिसे राइबोसोम कहा जाता है।  अन्त: प्रद्रव्य जालिका का मुख्य कार्य उन सभी प्रोटीन तथा वसाओं का संचरण करना है जो कि विभिन्न झिल्लियों जैसे- कोशिका झिल्ली,  केन्द्रक  झिल्ली आदि का निर्माण करना है। अन्त: प्रद्रव्य जालिका के कुछ भागों पर किनारे-किनारे राइबोसोम लगे होते हैं।

अन्त: प्रद्रव्य जालिका दो प्रकार की होती हैः रूक्ष अन्त: प्रद्रव्य जालिका (Rough Endoplasmic Reticulum- R.E.R.) तथा मृदु अन्त: प्रद्रव्य जालिका (Smooth Endoplasmic Reticulum-S.E.R.) । रूक्ष अन्त: प्रद्रव्य जालिका में संश्लेषण के लिए किनारे-किनारे पर राइबोसोम पाये जाते हैं। मृदु अन्त: प्रद्रव्य जालिका में राइबोसोंम नही पाये जाते हैं।

केन्द्रक (Nucleus)  

केन्द्रक मानव कोशिका का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग है जो प्रबन्धक की तरह कार्य करता है इसलिए इसे कोशिका का प्रबन्धक भी कहा जाता है। यह  केन्द्रक द्रव्य में धागेदार पदार्थ के जाल के रूप में बिखरा होता है इसे क्रोमैटिन भी कहते हैं। यह प्रोटीन तथा डीएनए का बना होता है।  क्रोमैटिन कोशिका विभाजन के समय सिकुड़ कर अनेक छोटे और मोटे धागे के रूप में में संगठित हो जाते हैं इन धागों को गुणसूत्र (क्रोमोसोम) कहते हैं। बन्दर में 21 जोड़े, मनुष्य में 23 जोडे, तथा चिम्पांजी में 24 जोड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं। गुणसूत्र पर बहुत से जीन होते हैं जो एक पीढ़ी के लक्षण (अनुवांशिक गुण) दूसरी पीढ़ी में हस्तान्तरित करते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र में जेली के समान एक गाढा भाग होता है जिसे मैट्रिक्स कहते हैं।

क्रोमैटिन के अलावा केन्द्रक में एक सघन गोल रचनाएं होती हैं जिसे केन्द्रिका कहते हैं जिसमें राइबोसोम के लिए RNA (Ribonucleic Acid) का संश्लेषण होता है।

DNA  पालीन्यूक्लियोटाइड होते हैं। डीएनए का मुख्य कार्य सभी अनुवांशिकी क्रियाओं का संचालन तथा प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण करना है, जिसकी इकाई जीन है। डी0 एन0 ए0 से ही आर0 एन0 ए0 का संश्लेषण होता है।

आर0 एन0 ए0 के प्रकार (Type of R.N.A.) 
  1. r-RNA
  2. t-RNA
  3. m- RNA
  4. r-RNAराइबोसोम पर लगे रहते हैं तथा प्रोटीन संश्लेषण में मद करते हैं।
  5. t-RNAप्रोटीन संश्लेषण की क्रिया में विभिन्न प्रकार के अमीनो अम्ल राइबोसोम पर लाते हैं जहां पर प्रोटीन का निर्माण होता है।
  6. m- RN केन्द्र के बाहर अमीनो अम्ल को चुनने में मदद करता है।

साइटोप्लाज्म (Cytoplasm)

कोशिका का वह भाग जो प्लाज्मा झिल्ली तथा केन्द्रक जाल के मध्य पाया जाता है साइटोप्लाज्म कहलाता है। साइटोप्लाज्म  की आन्तरिक परत को एंडोप्लाज्म तथा बाह्य परत को एक्टोपलाज्म कहा जाता है। साइटोप्लाज्म साइटोसोल से बना होता है।

राइबोसोमः

यह राइबोन्यूक्लिक एसिड नामक अम्ल तथा प्रोटीन की बनी होती है। यह प्रोटीन का उत्पादन स्थल है जिसके कारण इसे प्रोटीन की फैक्ट्री कहा जाता है।   

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