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दबाव समूह (Pressure Group)

दबाव समूह (Pressure Group)

दबाव समूह अंग्रेजी भाषा के शब्द Pressure Group का हिन्दी रूपान्तर है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसके विचार भिन्न-भिन्न होते हैं। जब एक समान विचारधारा के लोग अपने हित तथा आव्श्यकताओं की पूर्ति के लिए अपना एक संगठन बनाकर अपने उद्देश्यो को प्राप्त करने का प्रयास करते है तो ऐसे सगठित संगठन को समूह कहा जाता है। जब समान हित वाले व्यक्ति अपने हितो व स्वार्थों की रक्षा हेतु एक समूह के रूप में संगठित हो जाते हैं तो ऐसे समूह को दबाव समूह या हित समूह कहते हैं। दबाव समूहो की कार्य प्रणाली गुप्त तथा रहस्यमयी होती है जिसके कारण इन्हें गुप्त साम्राज्य भी कहा जाता है।

दबाव समूह अमेरिकी गणतन्त्र की स्थापना के साथ ही उत्पन्न हुए थे जिनका विकास अमेरिकी समाज की देन माना जाता है परन्तु स्पष्ट भूमिका 20 वीं शताब्दी में प्रकाश में आयी है। वर्तमान समय में विकसित, अविकसित तथा विकासशील सभी समाजो में दबाव समूह पाये जाते हैं।

वी0 ओ0 की0 के अनुसारः हित समूह या दबाव समूह ऐसे असार्वजनिक संगठन वहैं जिनका निर्माण सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। ये प्रत्याशियों के चयन एवं सराकर सके व्यवस्थापन के उत्तरदायित्व की अपेक्षा सरकार को प्रभावित करने का प्रयत्न करके अपने हित साधन में लगे रहते हैं।

आमण्ड तथा पावेल के अनुसारः हित समूह का अभिप्राय व्यक्तियो के उस समूह से है जो आपस में कार्य-व्यापार एवं लाभ के बन्धनों से जान बूझकर जुड़े है। ये समूह संगठित होते हैं।

एच0 जेगलर के अनुसारः दबाव समूह या हित समूह एक संगठित समूह जो सरकारी निर्णयों के सन्दर्भ में सरकार को अपने प्रतिनिधियों को बिना स्थापित किए ही प्रभावित करना चाहता है।

हेनरी डब्ल्यू0 के अनुसारः दबाव समूह वह ऐच्छिक समिति है जिसके सदस्य अपने किसी हित की सुरक्षा के लिए परस्पर सम्बध्द रहते हैं।

उपरोक्त से स्पष्ट है कि दबाव समूहों का तात्पर्य ऐसे समूहों से है जो कि शासन पर बिना अधिकार किए ही दबाव डालकर विधायकों, सांसदों एवं प्रशासकों की नीति एवं कार्यों को प्रभावित कर राजनैतिक सत्ता को प्रभावित करते हैं।

दबाव समूहों की उत्पत्ति के कारण (Due to pressure group originating)

  1. औद्योगिक सभ्यता के विकास के काण समाज के सदस्य विभिन्न वर्गों में वंट गये जिसके कारण अपने-अपने हितों की रक्षा तथा मांग को लेकर शासन प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए दबाव समूह बनाये जाते हैं।
  2. वर्तमान समय में औद्योगीकरण के फलस्वरूप राज्यों के कार्यों में व्यापक वृध्दि हुई है जिसके कारण राज्य सरकारें समाज के पृथक-पृथक वर्गों के लिए पृथक-पृथक योजनाएं बनाती है जिस पर सभी वर्ग अपने-अपने हितों की पूर्ति हेतु दबाव समूह बना लेते हैं।
  3. वर्तमान लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सरकारों से यह आशा की जाती है कि वे समाज के सभी वर्गों के लिए कल्याणकारी नीति बनाएं, किसी वर्ग की उपेक्षा न हो परन्तु व्यवहार में ऐसा नही हो पाता है जिसके कारण समाज के विभिन्न वर्ग अपनी-अपनी मांगों को लेकर दबाव समूहों का निर्माण कर लेते हैं।

दबाव समूहों के लक्षण (Symptoms of pressure group)

  1. दबाव समूहों की एक सीमित सदस्यता होती है अर्थात् किसी वर्ग, धर्म, जाति विशेष का ही सदस्य सदस्य हो सकता है। जैसे- अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन की सदस्यता मात्र श्रमिक वर्ग को ही प्राप्त है।
  2. दबाव समूहों का अपना एक सीमित उद्देश्य होता है जो कि अपने किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनते हैं तथा उक्त उद्देश्य की पूर्ति होने के बाद या तो सम्प्त हो जाते है या फिर निर्जीव हो जाते है।
  3. दबाव समूहों का संगठन औपचारिक, अर्ध्द-औपचारिक या अनौपचारिक हो सकते हैं।
  4. दबाव समूहों का सम्बन्ध सदैव अपने समूह के सदस्यों के हितों से होता है।
  5. पूंजीवादी तथा लोकतान्त्रिक एवं औद्योगिक देशों में दबाव समूह तीव्र गति से फलीभूत होते हैं।
  6. दबाव समूह संगठित भी हो सकते हैं तथा असंगठित भी हो सकते हैं।
  7. दबाव समूहो की कार्य प्रणाली गुप्त तथा रहस्यमयी होती है।
  8. दबाव समूह न तो शासन, प्रशासन से बाहर रहकर अपने व अपने समूह के सदस्यों के हितों के संरक्षण के लिए शासन, प्रशासन पर दबाव डालनें में विश्वास रखते हैं।
  9. दबाव समूह अपने समूह के हितों की रक्षा के लिए आवश्यकतानुसार साम, दाम, दण्ड, भेद हर नीति का आश्रय लेते हैं।
  10. दबाव समूह अपने समूह के हितों की रक्षा के लिए आवश्यकतानुसार संवैधानिक एवं असंवैधानिक संसाधनों का सहारा लेते हैं।

दबाव समूहों से लाभ (Benefit for pressure group)

  1. संसद को उन मुद्दों के महत्व के बारे में जानकारी मिलती रहती है जिसे जनता अधिक महत्वपूर्ण मानती है। जैसे- पर्यावरणीय दबाव समूहों ने पर्यावरण के सम्बन्ध में राजनीतिक दलों पर अधिक प्रभाव डाला है क्योंकि सार्वजनिक ग्लोबल वार्मिंग से चिन्तित हो गए हैं।
  2. दबाव समूह के सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण जागरूकता बढाने में सक्षम हैं।
  3. अपने हितों या कारण को प्रभावित करने वाले मामलों के सम्न्ध में सार्वजनिक जागरूकता बढानें में सक्षम हैं।
  4. अपने हितों के सम्बन्ध में अपनी बात पुख्ता तरीके से रखनें में सक्षम हैं।

दबाव समूहों से हानि (Loss from pressure group)

  1. दबाव समूहों की राय मात्र छोटी आबादी की मदद कर सकती है।
  2. दबाव समूह अपने हितों के प्रति पक्षपाती होने के कारण संतुलित तर्क प्रस्तुत नही कर सकते हैं।
  3. दबाव समूह के सदस्य प्राय अत्यन्त भावुक होते हैं प्राय: अपने उद्देश्य की पूर्ति का लिए हिंसा या आपराधिक व्यवहार जैसी अवांछनीय रणनीति का सहारा ले सकते हैं।

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