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जन सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005 (RIGHT INFORMATION ACT 2005)

जन सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005 (RIGHT ACT 2005)

लोकतन्त्रात्मक शासन प्रणाली में जनता द्वारा सरकार का चुनाव किया जाता है तथा जनता का प्रत्येक नागरिक किसी न किसी रूप में सरकार को टैक्स अदा करता है। जनता को यह जानने का पूर्ण अधिकार है कि उनकी सरकार कौन-कौन सी योजनाएं चला रही है, क्या क्या काम कर रही है, इमानदारी से स्वच्छ प्रशासन चला रही है या नहीं। सूचना के अधिकार का तात्पर्य सूचना पाने का अधिकार है जो राष्ट्र अपने नागरिकों को प्रदान करता है। सूचना के अधिकार के माध्यम से कोई भी देश अपनी शासन प्रणाली तथा कार्यों को सार्वजनिक करता है। वर्ष 2002 में संसद ने सूचना का स्वतन्त्रता विधेयक पारित किया जिसे जनवरी 2003 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली परन्तु इसकी नियमावली बनाने के नाम पर इसे लागू नहीं किया गया। संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन सरकार ने पारदर्शितायुक्त शासन व्यवस्था एवं भ्रष्टाचार मुक्त समाज बनाने के लिए 12 मई 2005 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 संसद में पारित किया  जिसे 15 जून 2005 को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी देकर अधिनियमित किया गया तथा 12 अक्टूबर 2005 को जम्मू कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में लागू किया गया और  सूचना का स्वतन्त्रता विधेयक 2002 निरस्त कर दिया गया। इस अधिनियम के लागू होने से पूर्व कोई भी भारतीय नागरिक किसी भी विभाग से कोई भी सूचना नही मांग सकता था। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए तथा सभी विभागों के काम काज में पारदर्शिता लाने के लिए ही यह सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 भारतीय संसद द्वारा बनाया एवं लागू किया गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अन्तर्गत सूचना की मांग करने के लिए हिन्दी, अंग्रेजी या किसी भी स्थानीय भाषा में आवेदन किया जा सकता है तथा सूचना प्राप्त की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 में पारित हुआ, उस समय जम्मू कश्मीर में धारा-370 लागू होने के कारण यह अधिनियम जम्मू कश्मीर राज्य पर लागू नही था। भारतीय संसद द्वारा वर्ष 2020 में कानून बनाकर जम्मू कश्मीर राज्य से धारा-370 हटा दी गई तथा जम्मू कश्मीर में भी जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 लागू कर दिया गया है।

सूचना अधिकार अधिनियम-2005 की धारा-2 की उपधारा (च) के अन्तर्गतः किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में धारित अभिलेख, दस्तावेज, ज्ञापन,  ई-मेल, विचार, सलाह, , परिपत्र, आदेश, लाग पुस्तिका, संविदा, रिपोर्ट, कागजपत्र, नमूना, माडल, आंकडों सम्बन्धी सामग्री, निजी निकायों से सम्बन्धित ऐसी सूचना जिस पर तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन लोक प्राधिकारी की पहुंच हो सकती  है, सूचना है, जिसे कोई भी भारतीय नागरिक सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा- 03 के अनुसार मांग सकता है। सूचना मांगने हेतु टाइप करके या हाथ से लिखकर आवेदन किया जा सकता है। आनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अन्तर्गत भारत का कोई भी नागरिक किसी भी विभाग से सूचना की मांग कर सकता है। किसी भी विभाग को इस अधिनियम के दायरे से मुक्त नही किया गया है, सभी विभागों पर प्रभावी / लागू है।

जनता द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा-03 के अनुसार मांगी गई सूचना सम्बन्धित लोक सूचना प्राधिकारी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा-7 की उपधारा-(1) के अनुसार 30 दिवस के अन्दर उपलब्ध कराई जाएगी परन्तु यदि मांगी गई जानकारी का सम्बन्ध किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतन्त्रता से है तो वह जानकारी 48 घण्टे के अन्दर उपलब्ध कराई जाएगी। मांगी गई सूचना समयबध्द उपलब्ध करायी जायेगी।

यदि सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा-03 के अनुसार किसी व्यक्ति द्वारा मांगी गई सूचना सम्बन्धित लोक सूचना अधिकारी द्वारा समय से उपलब्ध नहीं कराई जाती है या गलत एवं भ्रामक सूचना उपलब्ध कराई जाती है  तो उसके विरुद्ध अपील जन सूचना अधिकार अधिनियम की धारा-19 के तहत 30 दिवस के अन्दर की जा सकती है।

अपील की सुनवाई करने के उपरान्त यदि राज्य सूचना आयुक्त या केन्द्रीय सूचना आयुक्त को यह समाधान हो जाता है कि गलत या भ्रामक सूचना दी गई है या सूचना देने से इन्कार किया गया है तो सूचना का आवेदन प्राप्त होने की तिथि से ₹200 प्रतिदिन का दण्ड अधिरोपित कर सकता है जो ₹25000 से अधिक नहीं होगा। उक्त आर्थिक दण्ड के अतिरिक्त राज्य सूचना आयुक्त या केन्द्रीय सूचना आयुक्त द्वारा सम्बन्धित अधिकारी के विरूध्द अनुशासनिक कार्यवाही किये जाने की भी सिफारिश की जा सकती है।

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