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सौर मण्डल (Solar system)

सौर मण्डल (Solar System)

सूर्य तथा उसके चारों तरफ चक्कर लगाने वाले ग्रहों, छुद्र ग्रहों, उल्काओं, धूमकेतु एवं आकाशीय पिण्डों का विशाल समूह सौर मण्डल (Solar system) कहलाते हैं। गुरूत्वाकर्षण बल के कारण सौर मण्डल  के सभी पिण्ड आपस में बंधे रहते हैं। सौर मण्डल का प्रधान सूर्य है जो मन्दाकिनी (आकाशगंगा) के केन्द्र से करीब 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

सूर्य (Sun)

सूर्य सौर मण्डल से सम्पूर्ण ऊर्जा का स्रोत है जो मन्दाकिनी के केन्द्र के चारों तरफ 250 किमी0 / सेकेण्ड की गति से परिक्रमा कर रहा है जिसे एक चक्कर लगाने में 25 करोंड़ वर्ष (25 मिलियन वर्ष) लगता है अर्थात इसका परिक्रमण काल 25 मिलियन वर्ष है जो ब्रम्हाण्ड वर्ष (Universe year) कहलाता है

सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की तरफ घूमता है जिसका मध्य भाग 25 दिन में तथा ध्रुवीय भाग 35 दिन में एक घूर्णन करता है।

सूर्य एक गैसीय गोला है जिसमें 71 प्रतिशत हाइड्रोजन, 26.5 प्रतिशत हीलियम, 1.5 प्रतिशत कार्बन, आक्सीजन, नाइट्रोजन, नियान तथा 1 प्रतिशत लौह समूह के तत्व   हैं। सूर्य की ऊर्जा का स्रोत उसके केन्द्र में स्थित हाइड्रोजन परमाणुओं का नाभिकीय संलयन है। सूर्य के ऊर्जा उत्सर्जन की दर 1026 जूल प्रति सेकेण्ड हैं।

सूर्य का आन्तरिक भाग क्रोड कहलाता है जिसका ताप 1.5 × 107 डिग्री सेल्सियस तथा बाह्य सतह का तापमान 6000 डिग्री सेल्सियस होता है जिसका 2 अरबवां भाग पृथ्वी को मिलता है।

सूर्य पृथ्वी का लगभग 11 लाख गुना बड़ा है।  सूर्य का ब्यास 13 लाख 92 हजार किमी0 है जो कि पृथ्वी के व्यास का लगभग 110 गुना है। सूर्य की उम्र 5 विलियन वर्ष तथा भविष्य में सूर्य द्वारा ऊर्जा देते रहने का समय 1011 वर्ष है।

सूर्य के प्रकाश का चाल 3 × 108 किमी0 / सेकेण्ड (3 लाख किमी0 / सेकेण्ड) होती है जिसे पृथ्वी तक पहुंचनें में 8 मिनट 16.6 सेकेण्ड का समय लगता है। सूर्य के प्रकाश द्वारा एक वर्ष में चली गई दूरी को एक प्रकाश वर्ष कहते हैं। एक प्रकाष वर्ष 9.45 × 1013 किमी0 के बराबर होता  है। दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई पारसेक है जो 3.6 प्रकाश वर्ष के बराबर होती है।

सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का जो भाग दिखालाई देता है उसे सूर्य किरीट (Corona) या सूर्य का मुकुट कहते हैं जिससे एक्स किरणें निकलती हैं। पूर्ण सूर्यग्रहण के समय पृथ्वी इसी से प्रकाशित होती है।

सौर मण्डल की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग मत प्रतिपादित किये हैं जो निम्नवत हैं-

क्रम संख्या मत प्रतिपादक
1. निहारिका परिकल्पना लाप्लास
2. ज्वारीय परिकल्पना जेम्स जीन्स तथा हैराल्ड जेफरी
3. वायव्य राशि परिकल्पना इमैनुअल काण्ट
4. निहारिका मेघ परिकल्पना डा0 वान वाइज्सकेयर
5. द्वैतारक परिकल्पना एच0 एन0 रसेल
6. नोवा परिकल्पना होयले तथा लीटेल्टन
7. विद्युत चुम्बकीय परिकल्पना एच0 अल्फवेन
8. सीफेड परिकल्पना ए0 सी0 बनर्जी
9. विखण्डन परिकल्पना रांमसन
10. अन्तरतारक धूल परियोजना ओटो श्मिड

 

सौर मण्डल के पिण्ड (Solar system object)

सौरमण्डल में उपलब्ध पिण्डों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- परम्परागत ग्रह, बौना ग्रह तथा लघु पिण्ड।

  1. परम्परागत ग्रह (Traditional planets) बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, वृहस्पति, शनि, अरूण तथा वरूण।
  2. बौना ग्रह (Dwarf planet) यम (फ्लूटो), चेरास, सिरस, 2003 यूवी, 313 हामिया तथा माकीमाकी।
  3. लघु पिण्ड (Small body) धूमकेतु, उपग्रह तथा खगोलीय पिण्ड।

वह खगोलीय पिण्ड जो सूर्य के चारों तरफ परिक्रमा करता हो, जिसमें पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण बल हो तथा जिसके आस-पास अन्य कोई खगोलीय पिण्ड न हो, उसे ग्रह (Planet) कहते हैं।

आकार की दृष्टि से घटते क्रम में ग्रहों का क्रमः बृहस्पति, शनि, अरूण, वरूण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल, बुध।

सबसे छोटा ग्रह बुध, सबसे बड़ा ग्रह वृहस्पति, सूर्य का निकटतम ग्रह बुध तथा सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर स्थित ग्रह वरूण हैं।

पृथ्वी का सबसे निकटतम, सर्वाधिक गर्म तथा सर्वाधिक चमकीला ग्रह शुक्र है। शुक्र ग्रह को भोर का तारा, सांझ का तारा तथा लाल धब्बा प्रतीत होता ग्रह भी कहा जाता है। पृथ्वी को नीला ग्रह (Blue planet) तथा मंगल को लाल ग्रह (Red planet)कहा जाता है। सर्वाधिक ठण्ड़ा ग्रह वरूण है।

शुक्र तथा अरूण (यूरेनस) ऐसे ग्रह हैं जो सूर्य की परिक्रमा पूरब से पश्चिम दिशा में करते हैं। अन्य सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा पश्चिम से पूरब दिशा में करते हैं।

सबसे छोटा उपग्रह डीमोस, सबसे बड़ा उपग्रह गेनीमेड, सौर मण्डल का सबसे अधिक नजदीकी तारा प्राक्सिमा सेन्चुरी तथा सबसे अधिक चमकीला तारा साइरस (डाग स्टार) है।

सौरमण्डल का सबसे कम गति से धूर्णन करने वाला ग्रह शुक्र, सबसे अधिक गति से घूर्णन करने वाला ग्रह वृहस्पति, सबसे धीमी गति से परिक्रमण करने वाला ग्रह वरूण तथा सबसे अधिक गति से परिक्रमण करने वाला ग्रह बुध है।

धूमकेतु (Comet)

सौर मण्डल के छोर पर विद्यमान छोटे-छोटे अरबों पिण्डों को धूमकेतु या पुच्छल तारा कहते हैं। धूमकेतु गैस तथा धूल का संग्रह है जो कि आकाश में लम्वी पूंछदार प्रकाश के चमकदार गोले के रूप में दिखलाई देते हैं। धूमकेतु हमेशा नही दिखायी देते। धूमकेतु जब सूर्य की तरफ अग्रसर होते है तो सूर्य की किरणों से चमकीला होने पर  दिखायी देते हैं। धूमकेतु हमेशा के लिए टिकाऊ तो नही होते परन्तु इनके वापस लौटने का समय निश्चित होता है अर्थात इनका एक निश्चित परिक्रमण काल होता है। हैले नाम के धूमकेतु का परिक्रमण काल 76 वर्ष है जो कि अन्तिम बार वर्ष 1986 ई0 में दिखायी दिया था तथा अगली बार 2062 ई0 में दिखायी देगा।

उल्का (Meteors)

उल्काएं छुद्र ग्रहों के टुकड़े एवं धूमकेतुओं द्वारा पीछे छोड़े गये धूल के कण होते है जो आकाश में प्रकाश की चमकीली धारा के रूप में क्षण भर के लिए दिखायी देते हैं तथा विलुप्त हो जाते हैं।

खगोलीय पिण्ड (Celestial Body)

सूर्य, चन्द्रमा एवं वे सभी वस्तुएं जो रात के समय प्रकाशित होती है अर्थात चमकती है, खगोलीय पिण्ड (Celestial Body) कहलाते हैं।

कुछ खगोलीय पिण्ड ऐसे होते हैं जिनमें अपना स्वयं का प्रकाश तथा ऊष्मा नही होती तथा तारों के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं, पिण्ड कहलाते हैं।

उपग्रह (Satellite)

वे प्राकृतिक या कृत्रिम पिण्ड जो गुरूत्वाकर्षण बल के प्रभाव में आकाश में ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं, उपग्रह (Satellite) कहलाते हैं।

उपग्रह दो प्रकार के होते हैः प्राकृतिक उपग्रह (Natural satellite) तथा कृत्रिम उपग्रह (Artificial satellite)।

वे पिण्ड जो प्रकृति द्वारा निर्मित होते हैं तथा ग्रह के चारों तरफ परिक्रमा करते हैं, प्राकृतिक उपग्रह कहलाते हैं। जैसे- चन्द्रमा पृथ्वी का एक प्राकृतिक उपग्रह है।

वे पिण्ड जो मनुष्य द्वारा निर्मित किए गए हैं तथा ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं कृत्रिम उपग्रह कहलाते हैं। जैसे- आर्भट्ट, रोंहिणी इत्यादि कृत्रिम उपग्रह हैं।

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