Miscellaneous

अन्वेषण में मौखिक साक्ष्य एकत्र करने के स्रोत

अन्वेषण में मौखिक साक्ष्य एकत्र करने के स्रोत

प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत किये जाने के पश्चात अन्वेषण (विवेचना) आरम्भ होता है। विवेचना में साक्ष्य एकत्र किये जाते हैं जिसके मुख्यतया तीन स्रोत हैं-  A. मौखिक साक्ष्य  B. लिखित साक्ष्य तथा C. भौतिक साक्ष्य।

A.मौखिक साक्ष्य

विवेचक द्वारा अन्वेषण (विवेचना) के दौरान निम्नांकित प्रकार के व्यक्तियों से पूंछतांछ कर मौखिक साक्ष्य अन्तर्गत धारा- 161 सी0 आर0 पी0 सी0 केश डायरी में दर्ज किये जाते हैं –

1. वादी मुकदमा का कथन अंकित करके साक्ष्य एकत्र किया जाना-

विवेचक को वादी द्वारा अंकित करायी गयी प्रथम सूचना रिपोर्ट में अंकित तथ्यों / बातों तक ही सीमित रहकर विवेचना नही करनी चाहिए। विवेचक को वादी मुकदमा से घटना के सम्बन्ध में प्रत्येक पहलू पर गहन पूछतांछ कर घटना के कारण / उद्देश्य, घटना के विस्तृत विवरण, गवाहों तथा अभियुक्तों के सम्बन्ध में गहन जानकारी करते हुए उसका कथन केश डायरी में दर्ज करना चाहिए। घटना से सम्बन्धित कोई तथ्य प्रथम सूचना रिपोर्ट में अंकित नही है तो उसे भी वादी मुकदमा से पूंछतांछ कर स्पष्ट करना चाहिए जिससे विवेचना की अग्रिम कार्यवाही आसानी से की जा सके।

2. गवाहों के कथन से साक्ष्य संकलित करना-

वादी मुकदमा द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट में अंकित कराये गये व अपने कथन में बताये गये साक्षियों तथा घटनास्थल के आस-पास रहने वाले चक्षुदर्शी / परिस्थितिजन्य साक्षियों / स्वतन्त्र साक्षियों से घटना के सम्बन्ध में गहनता से पूंछतांछ करते हुए उनके कथनों से साक्ष्य संकलित करना चाहिए। प्रश्नावली तैयार करके प्रश्न पूंछते हुए कथन अंकित किया जाय तो ज्यादा बेहतर होगा। कथन अंकन के दौरान गवाहों को दी गयी धारा-160 सी0आर0पी0सी0 की नोटिस केश डायरी में संलग्न की जाय तथा उनके फोटोयुक्त पहचान पत्र जैसे- मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड आदि की प्रति प्राप्त कर केश डायरी के साथ  संलग्न अवश्य किया जाय।

3. अभियुक्त के कथन से साक्ष्य एकत्र किया जाना-

धारा-25 साक्ष्य अधिनियम के अनुसार अभियुक्त द्वारा  पुलिस के समक्ष की गयी स्वीकारोक्ति उसके विरूध्द न्यायालय में मान्य नही है परन्तु यदि अभियुक्त के कथन स्वीकारोक्ति के आधार पर अभियुक्त की निशानदेही पर कोई बरामदगी (जैसे- लूट के अपराध में लूटी गया सम्पत्ति, हत्या के अपराध में मृतक का शव या आला कतल रक्त रंजित चाकू, अस्त्र-शस्त्र) की जाती है तो अभियुक्त के कथन का उतना भाग न्यायालय में उसके विरूध्द साक्ष्य के रूप में मान्य होता है।

4. चिकित्सक के कथन से प्राप्त साक्ष्य-

शरीर सम्बन्धी अपराधों जैसे- मारपीट, हत्या, बलवा आदि अपराधों में मजरूब का चिकित्सीय परीक्षण करने वाले / शव का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक का कथन स्पष्टतम अंकित किया जाय जिससे प्रत्येक तथ्य स्पष्ट हो जाये।

5. परिस्थितिजन्य साक्ष्य-

विवेचक को विवेचना के दौरान कभी-कभी ऐसे साक्षी मिल जाते हैं जिन्होने घटना को तो नही देखा है परन्तु वे अपराध की परिस्थितियों के विषय में ऐसा साक्ष्य देते हैं जो कि अभियुक्त के अपराध में संलिप्त होना सिध्द करने में सहायक सिध्द हो सकता है। जैसे- हत्या के अपराध में घटना से पहले अभियुक्त को मृतक के साथ अन्तिम बार देखा जाना या घटनास्थल से भागते हुए देखा जाना इत्यादि। विवेचक को विवेचना के दौरान इस प्रकार के परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्र करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए।

6. अभियुक्त का अपराध के पूर्व व अपराध के बाद का आचरण का साक्ष्य-

अभियुक्त का अपराध के पूर्व व अपराध के बाद का आचरण साक्ष्य भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा-8 के अन्तर्गत न्यायालय में मान्य है। किसी हत्या के अपराध में घटना के पूर्व अभियुक्त द्वारा चाकू की धार तेज करते हुए देखा जाना तथा हत्या की घटना करने के बाद घर से फरार हो जाने का साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किये जाने पर वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा-8 के अन्तर्गत न्यायालय में मान्य होता है।

7. अभियुक्त को वायदा माफ गवाह बना कर उस अभियुक्त के कथन से प्राप्त साक्ष्य-

किसी गंभीर अपराध में विवेचक द्वारा कई अभियुक्तों में से किसी एक अभियुक्त को उसकी इच्छानुसार धारा-306 सी0आर0पी0सी0 के अन्तर्गत न्यायालय से वायदा माफ गवाह बनवाकर उसे अन्य अभियुक्तों के विरूध्द साक्षी बनाकर उसके कथन से प्राप्त किया गया साक्ष्य धारा-133 साक्ष्य अधिनियम के अनुसार अन्य अभियुक्तों के विरूध्द न्यायालय में मान्य / ग्राह्य  होता है।

Related Articles

Back to top button
Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes

AdBlock Detected

Please Consider Supporting Us By Disabling Your AD Blocker