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अपराधियों के प्रकार (Types of criminals)

अपराधियों के प्रकार (Types of criminals)

वर्तमान काल मे अपराधियों द्वारा किये जाने वाले अपराधों तथा उनकी मनोवृत्तियों के आधार पर अपराध को मुख्यतया 08 भागों में बांटा गया है: आकस्मिक अपराधी (Accidental criminal), यौन अपराधी(Sex offender), पेशेवर अपराधी (Professional criminal), बाल अपराधी (Ball criminal), संगठित अपराध (Organized crime), राजनैतिक अपराधी (Political criminal), सफेदपोश अपराध (white collar Crime) तथा चित्त विकृत अपराधी (Mind mutilated criminal)।

आकस्मिक अपराधी (Accidental criminal)

इसमे वे अपराधी आते है जो कि अकस्मात क्रोध, उत्तेजना या किसी के बहकावे में आकर अपराध कारित करते हैं। अपराध करने के बाद पछतावा होता है। इनका कोई आपराधिक इतिहास नही होता। इनमे सुधार की काफी सम्भावना होती है। इस प्रकार के अपराधी अपराध करने के अभ्यस्त नही होते। इस प्रकार के अपराधियों पैरोल तथा परिवीक्षा का लाभ दिये जाने पर उनके सुधर जाने, समाज की मुख्य धारा से जुड़ कर सामान्य जीवन यापन करनें की प्रबल संभावना रहता है। उक्त व्यवस्था का लाभ इस प्रकार के अपराधियों को जो पहली बार अपराध किये हों, को अवश्य दिया जाना चाहिए।

यौन अपराधी(Sex offender)

इस वर्ग के अपराधी महिलाओं एवं बालकों के साथ ब्लात्कार एवं छेड़छाड़ करने का अपराध करते हैं। यहां पर बालकों का तात्पर्य नाबालिग लड़के,लड़कियों से है। इस प्रकार का गम्भीर अपराध करने वाले अपराधी समाज तथा मानवता के नाम पर धब्बा होते हैं तथा किसी क्षमा याचना के पात्र नही कहे जा सकते। इस प्रकार के अपराधियों के लिए भारत सरकार द्वारा कठोरतम दण्ड के प्राविधान किये गये हैं तथा इस प्रकार के अपराध के मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रत्येक जिला अदालतों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कीये गयें हैं जहां पर मुकदमों की त्वरित सुनवाई करते हुए कम से कम अवधि में मुकदमों का निस्तारण किया जाता है।

पेशेवर अपराधी (Professional criminal)

इस वर्ग में ऐसे अपराधी आते हैं जो किसी अपराध करने के अभ्यस्त यानी स्पेश्लिस्ट होते है। जैसे -किराये पर हत्या करने वाले, मादक द्रव्यों की तस्करी /व्यापार करने वाले, ठगी करने वाले, जेबकतरे, जुआ खेलने / खेलाने वाले, रेलगाड़ी का डिब्बों में चोरी करने वाले, लूट करने वाले आदि। इस प्रकार के अपराधियों के लिए भारत सरकार द्वारा कठोरतम दण्ड के प्राविधान किये गये हैं।

बाल अपराधी (Ball criminal)

इस श्रेणी में 18 वर्ष से कम उम्र के बालक, बालिकायें सम्मिलित होते हैं। बाल अपराधों की विवेचना, न्यायालय तथा दन्ड वयस्क अपराधियों द्वारा किये जाने वाले अपराधों से भिन्न हैं। इनके द्वारा किये जाने वाले अपराधों का विचारण सरने के लिए प्रत्येक जिला अदालतों में किशोर न्याय बोर्ड गठित किये गये हैं जिनके द्वारा बाल अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई की जाती है। ऐसे अपराधियों के सुधरने की सम्भावना सर्वाधिक होती है।

संगठित अपराध (Organized crime)

संगठित अपराध करने वाले अपराधियों का एक संगठित संगठन होता है जिसमें एक लीडर तथा अन्य लोग सदस्य होते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य अपराध करक के अपने तथा अपने संगठन के आर्थिक भौतिक लाभ के लिए धन अर्जित करना होता है। इनके द्वारा अपहरण, हत्या, तस्करी आदि अपराध किये जाते हैं। ऐसे अपराधियों के सुधरने की सम्भावना बहुत कम होती है। इस प्रकार के अपराधियों के लिए भारत सरकार द्वारा कठोरतम दण्ड के प्राविधान किये गये हैं तथा इस प्रकार के अपराध के मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रत्येक जिला अदालतों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कीये गयें हैं जहां पर मुकदमों की त्वरित सुनवाई करते हुए कम से कम अवधि में मुकदमों का निस्तारण किया जाता है।

राजनैतिक अपराधी (Political criminal)

ऐसे अपराध राजनैतिक दल के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किए जाते हैं जैसे- बूथ कैप्चरिंग करवाना, फर्जी वोट डलवाना, लोंगो में आपसी फूट डाल कर मारपीट,जमीन पर अवैध कब्जे कराना आदि।

सफेदपोश अपराध (white collar Crime)

ऐसे अपराधी समाज मे सम्पन्न एवं प्रतिष्ठित होते है जिसकी आड़ में रिस्वत लेने, मिलावटी सामान बेचने, नकली सामान व दवायें बेचने, कालाबाजारी व जमाखोरी करने, धन गबन करने इत्यादि अपराध करते है। इसमे राजनीतिज्ञ, ब्यापारी, सरकारी अधिकारी / कर्मचारी (जैसे- डॉक्टर, इंजीनियर आदि) सम्मिलित हो सकते हैं।

चित्त विकृत अपराधी (Mind mutilated criminal)

इसमे वे अपराधी आते है जिनका मानसिक सन्तुलन ठीक नही होता जिसके कारण अपराध कर देते हैं। ऐसे अपराध का विचारण करने पर जब न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि अपराध करने वाला व्यक्ति पागल है तो उसके द्वारा किया गया आपराधिक कृत्य अपराध नही होता।

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