तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics)

0
7
Wave-Optics

तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics)

तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics) भौतिक विज्ञान (Physics) की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत विवर्तन(Diffraction), ध्रुवण (Polarization), व्यतिकरण (Deviation) आदि का अध्ययन किया जाता है। तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics) को भौतिक प्रकाशिकी (Physical Optics) भी कहा जाता है

विवर्तन (Diffraction)

प्रकाश सीधी रेखा में गमन करता है। जब प्रकाश तरंगें किसी अवरोध से टकराती है तो ये तरंगे उस अवरोध के किनारों से मुड़ जाती है तथा अवरोधक के छाया वाले भाग में प्रवेश कर जाती है, प्रकाश तरंगों का इस प्रकार छाया में प्रवेश करने की घटना को विवर्तन (Diffraction) कहते हैं। यह भौतिकी की अत्यन्त महत्वपूर्ण घटना है। विवर्तन के लिए अवरोध या छिद्र का आकार तरंग दैर्ध्य की कोटि का होना आवश्यक है अन्यथा विवर्तन की घटना नही हो पाती है। विवर्तन की घटना एक ही स्रोत के विभिन्न बिन्दुओं से प्राप्त तरंगों के अध्यारोंपण के कारण होती है। विवर्तन अवरोध के आकार पर पूरी तरह निर्भर करता है। यदि अवरोध का आकार प्रकाश की तरंग दैर्ध्य की कोटि का है तो विवर्तन पूर्णतया स्पष्ट होता है। यदि अवरोध का आकार प्रकाश की तरंग दैर्ध्य की तुलना में काफी बड़ा होता है तो विवर्तन उपेक्षणीय हो जाता है। विवर्तन का उपयोग स्फेक्ट्रोमीटर में किया जाता है। विवर्तन का घटना प्रकाश तरंगों के अलावा ध्वनि तरंग, विद्युत चुम्बकीय तरंग तथा जल तरंगों में भी होती है।

विवर्तन के प्रकार (Type of Diffraction)

यदि प्रकाश के मार्ग में आयताकार,  त्रिभुजाकार, गोल छिद्र, बारीक तार या किसी वस्तु की तीक्ष्ण कोर रखी जाती है तो भिन्न-भिन्न प्रकार के विवर्तन पैटर्न बनते है जिसके आधार पर विवर्तन दो प्रकार के होते हैं- फ्राउनहोपर विवर्तन  तथा फ्रेनेल विवर्तन।

फ्राउनहोपर विवर्तन में प्रकाश स्रोत और पर्दा विवर्तक वस्तु के काफी दूर होता है यानी विवर्तन पर समतल तरंगाग्र आपतित होता है।

फ्रेनेल विवर्तन (Fresnel Diffraction) में  प्रकाश स्रोत, पर्दा अथवा दोनों विवर्तक वस्तु से नियत दूरी पर होते हैं यानी विवर्तक पर बेलनाकार या गोलीय तरंगाग्र आपतित होता है।

ध्रुवण (Polarization)

 प्रकाश तरंग एक प्रकार की विद्युत तरंग है जो कि विद्युत आवेशों के कम्पन से उत्पन्न होती है। प्रकाश में विद्युत कम्पन तरंग के संचरण की दिशा के लम्बवत तल में होते हैं यानी यदि प्रकाश तरंग एक से अधिक तलों में कम्पन कर रही हो तो इसे सामान्य या अध्रुवित प्रकाश कहा जाता है। यही सामान्य प्रकाश जब टूरमैली क्रिस्टल के गुजरता है तो बाहर निकलने वाले प्रकाश  तरंगो का कम्पन मात्र एक ही तल में होता है। औसे जिन प्रकाश तरंगों का कम्पन एक ही तल में होता है, ध्रुवित प्रकाश कहलाता है। इस प्रकार अध्रुवित प्रकाश से ध्रुवित प्रकाशमें परिवर्तन की घटना को ही ध्रुवण कहा जाता है।

ऐसा प्रकाश जिसकी तरंगों का कम्पन मात्र एक ही दिशा में होता है, उसे ध्रुवित प्रकाश कहा जाता है।

ऐसा प्रकाश जिसमें तरंगों का कम्पन सभी दिशओं मे समान रूप से होता है, उसे अध्रुवित प्रकाश कहा जाता है।

व्यतिकरण (interference)

जब समान आवृत्ति, समान तरंग दैर्ध्य तथा समान आयाम की प्रकाश तरंगे एक समान गति से एक ही माध्यम में गमन करती हैं तो एक दूसरे से अध्यारोपित होने पर परिणामी तरंग में तीव्रता का मान अलग-अलग  हो जाता है, किसी स्थान पर परिणामी तीव्रता का मान अधिकतम होता है, तो कही पर मध्यम होता है तो कही पर न्यूनतम यानी शून्य होता है। इस प्रकार अध्यारोपण के बाद परिणामी तरंगों की तीव्रता में होने वाला यही परिवर्तन व्यतिकरण कहलाता है। व्यतिकरण की घटना में  ऊर्जा न तो निर्मित होती है आर न ही नष्ट होती है।

व्यतिकरण दो प्रकार का होता हैः सम्पोषी व्यतिकरण (Constructive interference) तथा विनाशी व्यतिकरण (Destructive interference)।

जब समान आवृत्ति की तरंगें आपस में समान कला में गमन करके एक दूसरे पर अध्यारोपित होती हैं तो परिणामी तरंग की तीव्रता का मान अधिकतम होता है जो कि सम्पोषी व्यतिकरण (Constructive interference)कहलाता है।

जब समान आवृत्ति की तरंगें आपस में विपरीत कला में गमन करके एक दूसरे पर अध्यारोपित होती हैं तो परिणामी तरंग की तीव्रता का मान न्यूनतम यानी शून्य होता है जिसे विनाशी व्यतिकरण (Destructive interference) कहा जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.