रेलवे ग्रुप डी०/एन०टी०पी०सी०-२०१९ (भौतिक विज्ञानं) परीक्षापयोगी तथ्य Part- A

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भौतिक विज्ञानं  पर आधारित परीक्षापयोगी तथ्य  PART A

(परीक्षार्थियों की सरलतापूर्वक गहन तैयारी हेतु पहले वर्णनात्मक प्रकाशन किया जा रहा है | इसके अध्ययन के उपरान्त  ऑब्जेक्टिव प्रश्नोत्तरी हल करना काफी आसान हो जायेगा | वर्णनात्मक प्रकाशन पूर्ण होने के उपरान्त परीक्षापयोगी ऑब्जेक्टिव प्रश्नोत्तरी प्रकाशित की जाएगी )|

राशियाँ          SI पद्धति में मात्रक      मात्रक के प्रतीक

समय                  सेकेण्ड                     S

ताप                  केल्विन                     K

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ज्योति तीव्रता            कैंडेला                   Cd

विद्युत धारा           एम्पियेर                    A

पदार्थ की मात्रा         मोल                      mol

समतल कोण             रेडियन                  r

कार्य                  जूल                           J

शक्ति                 वाट                     w

बल                   न्यूटन                       N

त्वरण                मीटर/(सेकेण्ड )२          m/s2

लम्बाई                 मीटर                m

द्रव्यमान              किलोग्राम              Kg

घन कोण             स्टेरेडियन              sr

आवृत्ति               हर्ट्ज़                 Hz

चाल                 मी० / से ०            m/s

शक्ति              वाट                     w

दाब                   पास्कल              Pa

घनत्व              किग्रा० मी०-3            Kg m-3

** बहुत लम्बी दूरी मापने  के लिए प्रकाश वर्ष का प्रयोग किया जाता है  | अर्थात प्रकाश वर्ष दूरी का मात्रक है|     1 प्रकाश वर्ष =  9.46 × 1015  मीटर  |

** दूरी मापने  की सबसे बड़ी ईकाई पारसेक है |                                                       1 पारसेक = 3.26 प्रकाश वर्ष = 3.०८ × 10 16  मीटर |

** CGS पद्घति में बल का मात्रक डाइन  है |                                                         1 न्यूटन = 10 5 डाइन |

** CGS पद्घति में  कार्य का मात्रक अर्ग  है |  जब कि SI पद्घति में  कार्य का मात्रक जूल है |               1 जुल = 10 7  अर्ग  |

** अदिश राशि – वे भौतिक रशिया जिनमे केवल परिमाण होता है दिशा नही होती अदिश राशि कहते हैं|

जैसे – द्रव्यमान , चाल, आयतन, कार्य, समय , उर्जा , दूरी, चाल |

** सदिश राशि – वे भौतिक राशि जिनमे परिमाण के साथ दिशा भी होती है सदिश राशि कहते हैं |

   जैसे – वेग, विस्थापन, बल, त्वरण ,विस्थापन, वेग , संवेग , आवेग ,बल आघूर्ण |

** दूरी – किसी समयांतराल  में तय किये गये मार्ग की लम्बाई को दूरी कहते है |यह सदैव धनात्मक

   होती है |

** विस्थापन – किसी निशित दिशा में दो बिन्दुओं के बीच की लम्बवत दूरी को विस्थापन कहते हैं |

** चाल – किसी वस्तु द्वारा प्रति सेकेण्ड तय की गयी दूरी को चाल कहते हैं |  चाल =दूरी/ समय |

** वेग – किसी वस्तु द्वारा  किसी निश्चित दिशा में प्रति सेकेण्ड तय की गयी दूरी को वेग  कहते हैं |

   इसका SI पद्धति में मात्रक मी० /से०  है |

** त्वरण – किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं |   इसका SI पद्धति में मात्रक

   मी० /से०2  है | वेग बढने पर त्वरण धनात्मक तथा वेग घटने पर ऋणात्मक होता है |

** वृत्तीय गति – जब कोई वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है तो उसकी गति को वृत्तीय गति कहते

   हैं | इसमें वेग की दिशा प्रत्येक बिंदु पर बदल जाती है | यह एक त्वरित गति होती है |

** गुरुत्व केंद्र – किसी वस्तु का गुरुत्व केंद्र वह बिंदु है जहाँ पर वस्तु का समस्त भार कार्य कर्ता है |

   वस्तु का भार गुरुत्व केंद्र से ठीक निचे की  ओर कार्य कर्ता है |

** शक्ति – कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं |इसका मात्रक वाट एवं अश्व शक्ति है |

        शक्ति = कार्य / समय |

       1 अश्व शक्ति = ७४६ वाट |

** अभिकेन्द्रीय बल – जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है तो उस पर वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करने वाले बल को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं | इस बल के आभाव में वस्तु वृत्त्कर मार्ग पर गति नही कर सकती है | अभिकेन्द्रीय बल F = mv2 /r (जहाँ m= वस्तु का द्रव्यमान , v = वेग , r = वृत्त की त्रिज्या )|

** अपकेन्द्रीय बल – जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है तो उस पर वृत्त के केंद्र की तरफ से लगने वाले बल को अपकेन्द्रिय बल कहते हैं | इस बल की दिशा अभिकेन्द्रीय बल के विपरीत होती है   |    उदहारणदूध से मक्खन निकालने  की मशीन , कपड़ा सुखाने की मशीन , मौत के कुँए में साइकिल चलाना आदि |

** संवेग – किसी वस्तु  के द्रव्यमान एवं वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं |

** जड़त्व – बाहरी बल के आभाव में किसी वस्तु की विश्रमावस्था या समान गति की अवस्था बनाये रखने की प्रवृत्ति को जडत्व कहते हैं |                                                                 उदहारण (1) ठहरी हुयी मोटर साइकिल , बस या रेलगाड़ी के अचानक चल पड़ने पर उस पर बैठे यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं | (2) चलती हुयी मोटर कार के अचानक रुकने पर उसमे बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं | (3) कम्बल को पकड़ कर डंडे से पीटने पर धूल के कण गिर पड़ते हैं | (4) दौड़ते समय धावक अचानक रुकने पर आगे की ओर झुक जाता है |

न्यूटन के गति के नियम –  न्यूटन ने गति  के 3 नियम बनाये हैं —

(1)-न्यूटन के गति का प्रथम नियम – यदि कोई वस्तु एक समान चाल से एक सीधी रेखा में गतिशील है तो वह वैसी ही गतिशील रहेगी ओर यदि विराम अवस्था  में  तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी जब तक उस पर कोई बाहय बल लगा कर उसकी अवस्था में परिवर्तन न किया जाये | इस नियम को गैलिलियो का नियम या जडत्व  का नियम भी कहते   हैं |

(2)न्यूटन के द्वितीय गति नियमकिसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होती है |    F = ma  (जहाँ F=आरोपित बल , m = द्रव्यमान, a=त्वरण )|

(3)न्यूटन का तृतीय गति नियम – प्रयेक क्रिया के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है |

उदहारण –(1)बंदूक से गोली चलाने पर पीछे को धक्का देती है | (2) रॉकेट उड़ाना |  (3) नौका से नीचे कूदने पर नौका पीछे की ओर हट  जाती है  |

उत्तोलक –यह एक सीधी या टेढ़ी छड होती है जो की एक निश्चित बिन्दु के चारों ओर  स्वतंत्रतापूर्वक घूम सकती है | इसमें तीन बिंदु होते हैं – (1)आलम्ब  (2) आयास (3) भार |

(1)आलम्ब – छड जिस निश्चित बिन्दु के चारों ओर स्वतंत्रतापूर्वक घूम सकती है ,उसे आलम्ब कहते हैं |

(2)आयास –उत्तोलक को उपयोग में लाने के लिए जो बल लगाया जाता है उसे आयास कहते हैं |

(3)भार –उत्तोलक द्वारा जो बोझ या रुकावट हटाई जाती है उसे भार कहते हैं |

उत्तोलक के प्रकार (1) प्रथम श्रेणी के उत्तोलक – इसमें आलम्ब(F), आयास(E) एवं भार(W) के बीच में होता है |  यांत्रिक लाभ 1 या 1 से अधिक या 1 से कम हो सकता है |

उदहारण –(1)कील उखाड़ने की मशीन (2)हैण्ड पम्प (3)साइकिल का ब्रेक (4)शीश झुला (5) कैंची,पिलाश

(2)द्वितीय श्रेणी के उत्तोलक –इसमें भार, आलम्ब  एवं आयास के बीच में होता है |यांत्रिक लाभ 1 से अधिक होता है | उदहारणसरौता, नीबू निचोड़ने की मशीन, एक पहिये  की कूड़ा ढोने की गाड़ी आदि |

(3)तृतीय श्रेणी के उत्तोलक –इसमें आयास , आलम्ब तथा भार के बीच में होता है | इसमें यांत्रिक लाभ सदैव 1 से कम होता है | उदहारणमनुष्य का हाथ , चिमटा आदि |

उर्जा – किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को उस वस्तु की उर्जा  कहते हैं|ये दो प्रकार की होती है –

(1)गतिज उर्जा –किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की जो क्षमता होती है उसे गतिज उर्जा कहते हैं |

(2)स्थितिज उर्जा – किसी वस्तु  में  उसकी विशेष अवस्था या स्थिति के कारण कार्य करने की जो क्षमता होती है उसे उस वस्तु की स्थितिज उर्जा कहते हैं | उदहारणघड़ी की चाभी में संचित उर्जा , तनी हुयी स्प्रिंग की उर्जा , बांध बना कर एकत्र किये गये पानी की उर्जा  आदि |    

उर्जा रूपांतरित करने वाले कुछ उपकरण –

1-डायनेमो – यांत्रिक उर्जा को विद्युत् उर्जा में रूपान्तरित करता है |

2-मायक्रोफोन –ध्वनि उर्जा को विद्युत् उर्जा में |

3 लाउडस्पीकर- विद्युत् उर्जा को ध्वनि उर्जा में |

4- सितार – यांत्रिक उर्जा को –ध्वनि उर्जा में |

5- विद्युत् सेल – रासायनिक उर्जा को विद्युत् उर्जा में |

6- विद्युत् मोटर – विद्युत् उर्जा को यांत्रिक  उर्जा में |

7- विद्युत् बल्ब – विद्युत् उर्जा को प्रकाश एवं ऊष्मा उर्जा में |

8- सोलर सेल – सौर उर्जा को विद्युत् उर्जा में |

9-  मोमबत्ती .-  रासायनिक उर्जा को प्रकाश एवं ऊष्मा उर्जा में |

10- ट्यूबलाइट – विद्युत् उर्जा को प्रकाश  उर्जा में |

उर्जा संरक्षण का नियम – उर्जा  उत्पन्न या नष्ट नही की जा सकती |केवल इसका स्वरूप बदला जा सकता है | जब उर्जा  किसी रूप में लुप्त होती है तो उतनी ही उर्जा दुसरे रूप  में प्रकट होती है | यही उर्जा संरक्ष्ण का नियम है |

          विश्व की सम्पूर्ण उर्जा का परिमाण स्थिर रहता है |

गुरुत्व – वह आकर्षण बल जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है  गुरूत्व कहते हैं | इसी के कारण त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्व जनित त्वरण कहते हैं जिसे g से व्यक्त करते हैं |

  g का मान 9.8 मी० /से०2 होता है |

g के मान में परिवर्तन 1- पृथ्वी की सतह  से उपर या नीचे जाने  पर g का मान घटता है |

                    2- पृथ्वी के ध्रुव पर g का मान महत्तम/अधिकतम होता है |

                   3- विषुवत रेखा पर g का मान न्यूनतम होता है |

                  4 – पृथ्वी की घूर्णन गति घटने पर g का मान बढ़ जाता है | 

                  5-  पृथ्वी की घूर्णन गति बढने  पर g का मान घट जाता है |

                 6-  चन्द्रमा पर g का मान पृथ्वी की सतह पर स्थित g के मान का 1/6 होता है | 

अर्थात यदि किसी वस्तु का  भार  पृथ्वी पर 30 किलोग्राम है तो चन्द्रमा पर

                  पर उसका भार = 30 × 1/6 =30/6 = 5 किलोग्राम होगा \

 ग्रहों की गति से  सम्बन्धित कैपलर के नियम – (1) प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करता है | (2) प्रत्येक ग्रह का क्षेत्रीय वेग नियत रहता है | ग्रह जब सूर्य के निकट होता है तो उसका वेग बढ़ जाता है और जव दूर होता है तो उसका वेग  कम हो जाता है |(3) किस ग्रह को सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में लगे समय को उस ग्रह का परिक्रमण काल कहते है | सूर्य के निकटतम ग्रह बुध का परिक्रमण काल ८८ दिन तथा दूरस्थ ग्रह वरुण का परिक्रमण  काल १६५ वर्ष है |

नोट – पहले सूर्य से दूरस्थ ग्रह ,”यम “ था जिसे ग्रह की श्रेणी से निकाल दिया गया है | वर्तमान में दूरस्थ ग्रह ,”वरुण “ है |

उपग्रह – किसी ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करने वाले पिण्ड को उस ग्रह का उपग्रह कहते हैं |              जैसे चन्द्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है |

उपग्रह की कक्षीय चाल उपग्रह की कक्षीय चाल उसकी पृथ्वी तल से ऊँचाई पर निर्भर करता है  उपग्रह पृथ्वी तल से जितनी अधिक दूर होगा उसकी चाल उतनी ही कम होगी |                                        पृथ्वी तल के अति निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 8 किलोमीटर/सेकेण्ड  होता है |

पृथ्वी तल के अति निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह का परिक्रमण काल 1 घंटा 24 मिनट होता है |

पलायन वेग वह न्यूनतम वेग जिससे किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह से उपर फेंके जाने पर गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है और पृथ्वी पर वापस नही आता है , उसे पलायन वेग कहते हैं |                          पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान 11.2 किमी०/से० है |

वायुमंडलीय दाब – इसका SI पद्धति में मात्रक,” बार” होता है |  1 बार = 105 N / m2      |

** पृथ्वी की सतह से उपर जाने पर वायुमण्डलीय दाब घटता है जिसके कारण –(1) जहाज में बैठे यात्री की पेन की स्याही रिस जाती है | (2) पहाड़ों पर खाना पकाने में कठिनाई होती है |

** वायुमण्डलीय दाब को बैरोमीटर से मापा जाता है |

** बैरोमीटर का पाठयांक/पारा जब अचानक नीचे गिरता है तो आंधी आने की सम्भावना होती है |

** बैरोमीटर का पाठयांक/पारा जब धीरे धीरे  नीचे गिरता है तो वर्षा होने  की सम्भावना होती है |

** बैरोमीटर का पाठयांक जब धीरे धीरे उपर उठता है तो मौसम साफ  की सम्भावना होती है |

ससंजक बल – एक ही पदार्थ के अणुओं के मध्य लगने वाले आकर्षण बल को ससंजक बल कहते हैं | ठोसों में ससंजक बल  का मान सबसे अधिक, द्रवों में कम तथा गैसों में नगण्य होता है |

आसंजक बल –दो भिन्न पदार्थों के अणुओं के मध्य लगने वाले आकर्षण बल को आसंजक बल कहते हैं इसी बल के ही कारण एक वस्तु दूसरी वस्तु से चिपकती है |

पृष्ठ तनाव – द्रवों द्वारा स्वतंत्र पृष्ठ में कम क्षेत्रफल घेरने की प्रवृत्ति को पृष्ठ तनाव कहते हैं | इसका SI पद्धति में मात्रक न्यूटन/मीटर होता है |

** द्रव का ताप बढ़ाने पर पृष्ठ तनाव कम हो जाता है और क्रांतिक ताप पर शून्य हो जाता है |

** घुलनशील नमक मिलाने पर  पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है |

केशिकात्व – केशनली में द्रव के उपर चढने या नीचे दबने की घटना को केशिकात्व कहते हैं |

केशिकात्व के उदहारण ** ब्लाटिंग पेपर स्याही को शीघ्र सोख लेता है |

** लालटेन या लैंप की बत्ती में तेल उपर चढ़ता है |

** पेड़ पौधों की शाखाओं , तनों , पत्तियों में जल एवं भोज्य पदार्थ केशिकात्व क्रिया से ही पहुचते है

पृष्ठ तनाव के उदहारण – ** पतली सुई  पृष्ठ तनाव के कारण पानी पर तैराई जा सकती है |

** साबुन या डिटर्जेंट मिलाने पर जल का पृष्ठ तनाव कम  हो जाता है जिससे कपड़े ज्यादा साफ होते हैं |

 

 

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