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कंकाल तन्त्र (SKELETAL SYSTEM)

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कंकाल तन्त्र

(SKELETAL SYSTEM)

मानव शरीर का ढांचा अनेक छोटी-बडी हड्डियों से मिलकर बना होता है जो आपस में एक दूसरे से जुडी होती हैं । मानव शरीर का ढांचा बनाने वाले इसी अंग को कंकाल तन्त्र (SKELETAL SYSTEM) कहते हैं।

कंकाल तन्त्र (SKELETAL SYSTEM) दो प्रकार का होता हैः

  • बाह्य कंकाल तन्त्र (EXO-SKELETAL SYSTEM) ।
  • अन्तः कंकाल तन्त्र (ENDO-SKELETAL SYSTEM) ।

बाह्य कंकाल तन्त्र (EXO-SKELETAL SYSTEM)

शरीर की बाह्य सतह पर पाये जाने वाले कंकाल तन्त्र को बाह्य कंकाल तन्त्र (EXO-SKELETAL SYSTEM) कहते हैं जो कि शरीर के आन्तरिक अंगों की रक्षा करता है तथा मृत होता है ।

कछुआ में ऊपरी कवच, पक्षियों में पिच्छ, मछलियों में शल्क तथा स्तनधारियों में पाये जाने वाले बाल बाह्य कंकाल तन्त्र हैं जो कि इन प्राणियों की सर्दी व गर्मी से रक्षा करते हैं।

अन्तः कंकाल तन्त्र (ENDOSKELETAL SYSTEM)

शरीर की अन्दर पाये जाने वाले कंकाल तन्त्र को अन्तः कंकाल तन्त्र (ENDO-SKELETAL SYSTEM)  कहते हैं जो शरीर के ढांचे का निर्माण करता है । अन्तः कंकाल तन्त्र की उत्पत्ति भ्रूणीय मीसोडर्म से होती है।

सभी कशेरूकाओं में अन्तः कंकाल तन्त्र पाया जाता है।

मनुष्य में अन्तः कंकाल तन्त्र पाया जाता है जो मांसपेशियों से ढंका होता है।

अन्तः कंकाल तन्त्र (ENDO-SKELETAL SYSTEM) निम्नांकित दो भागों से मिलकर बना होता हैः

1-अस्थि (BONE)।

2-उपास्थि (CARTILAGE)।

(1)अस्थि (BONE) 

यह एक मजबूत, ठोस एवं कठोर ऊतक होता है जो कि तन्तुओ एवं मैट्रिक्स का बना होता है । मैट्रिक्स में मैग्नीशियम तथा पोटैशियम के लवण पाये जाते हैं जिसके कारण अस्थियां कठोर होती हैं।

अस्थि (BONE) के चारों तरफ तन्तुमय संयोजी ऊतक से निर्मित एक  दोहरा आवरण पाया जाता है जिसे परिअस्थिक (PERIODTEUM) कहा जाता है । परिअस्थिक के द्वारा लिगामेन्ट (LIGAMENT), टेन्डेन्स (TENDENS) तथा अन्य मांसपेशियां जुडी होती हैं।

मोटी तथा लम्बी अस्थियों में एक प्रकार की खोखली गुहा पाए जाती है जिसे मज्जा गुहा (MARROW CAVITY) कहा जाता है । मज्जा गुहा में एक प्रकार का तरल पदार्थ पाया जाता है जिसको अस्थि मज्जा (BONE MARROW) कहते हैं ।

अस्थि मज्जा (BONE MARROW)  दो प्रकार की होती हैः

(a)पीली अस्थि मज्जा (YELLOW BONE MARROW)।

(b)लाल अस्थि मज्जा (RED BONE MARROW)।

लाल अस्थि मज्जा (RED BONE MARROW) लाल रूधिर कणिकाओं का निर्माण तथा पीली अस्थि मज्जा (YELLOW BONE MARROW) श्वेत रूधिर कणिकाओं का निर्माण करती है।

स्तनधारियों में लाल अस्थि मज्जा (RED BONE MARROW)  पायी जाती है।

विकास के आधार पर अस्थियां दो प्रकार की होती हैंः

  • कालाजात अस्थि (INVESTING BONE)।
  • उपास्थिजात अस्थि (CARTILAGE BONE)।

(A)कालाजात अस्थि (INVESTING BONE) यह अस्थि संयोजी ऊतक से बनी होती है जिस मेम्ब्रेन अस्थि (MEMBRANE BONE) भी कहा जाता है । खोंपडी की सारी चपटी अस्थियां कालाजात अस्थि(INVESTING BONE)  हैं।

(B)उपास्थिजात अस्थि (CARTILAGE BONE) ये अस्थियां भ्रूण की उपास्थि को नष्ट करके उन्ही स्थानों पर बनती है जिसके कारण इन्हें रिप्लेसिंग बोन (RECEPLING BONE) भी कहा जाता है । कशेरूक दण्ड तथा पैरों की अस्थियां उपास्थिजात अस्थियां (CARTILAGE BONE होती हैं।

2-उपास्थि (CARTILAGE)

इसका निर्माण ककाली संयोजी ऊतकों से होता है जो अर्ध्दठोस, पारदर्शक एवं लचीले ग्लाएकोप्रोटीन से बने मैट्रिक्स (MATRICS) से बना होता है।

मैट्रिक्स के बीच में रिक्त स्थान में स्थित छोटी-छोटी थैलियों को लैकुनी (LACUNEE) कहा जाता है । लकुनी के अन्दर भरे तरल पदार्थ में कुछ जीवित कोशिकाएं (LIVING CELLS) पायीं जाती हैं जिसे कोन्ड्रियोसाइट (CHONDRIOCYTE) कहते हैं।

उपास्थि के चारों तरफ एक प्रकार की झिल्ली पायी जाती है जिसे पेरीकोन्ड्रियम (PERICHONDRIUM) कहा जाता है।

कंकाल तन्त्र के कार्य(FUNCTION OF SKELETAL SYSTEM)

  • शरीर को एक निश्चित आकार एवं आकृति प्रदान करता है।
  • शरीर के अन्य भागों को भी आलम्बन देता है।
  • शरीर के कोमल अंगों का रक्षा करता है।
  • कंकाल की मज्जा गुहा वसा एकत्रित करने का कार्य करती है।
  • लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण करता है।
  • शरीर को आवश्यकता पडने पर कैल्शियम तथा फास्फोरस प्रदान करता है।
  • कर्ण अस्थियां ध्वनि कम्पनों को आन्तरिक कर्ण तक पहुंचाने में सहायक होती है।
  • श्वसन तथा पोषण में सहायता प्रदान करता है।
  • पेशियों को जोड़ने का आधार प्रदान करना।

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