मानव हृदय की संरचना तथा कार्यविधि (Structure and work system of Human Heart)

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मनुष्य का हृदय या दिल एक पेशीय अंग है  जो शरीर के सभी भागों में रक्त पहुंचाने का कार्य करता है । मनुष्य का हृदय एक मिनट में 72 बार धडकता है जो कि एक जीवनकाल (लगभग 66 वर्ष) में 2.5 विलियन बार धडकता है । एक मिनट में 70 मिली लीटर तथा एक दिन में 76 लीटर रक्त  पम्प करता है । मनुष्य का हृदय मनुष्य के शरीर का एक ऐसा अंग है जो  जीवन भर बिना थके कार्य करता रहता है ।

मनुष्य में हृदय वक्षगुहा में अधर तल की ओर मध्य से कुछ बायीं ओर फेफडों के मध्य  स्थित होता है जो शंक्वाकार आकृति एवं लगभग 18 सेंमी0 लम्बा व 09 सेंमी चौडा होता है । हृदय चारों ओर से दोहरे हृदयावरण (Pericardium) से घिरा रहता है जिनके मध्य हृदयावरणीय तरल (Pericardial Fluid) भरा रहता है जो हृदय को नम रखते हुए स्पन्दन के समय घर्षण से तथा बाह्य आघात से हृदय की रक्षा करता है ।

हृदय की दीवार 03 स्तरों क्रमशः एपि-कार्डियम(Epi-Cardium), मायो-कार्डियम(Mayo-Cardium) तथा एण्डो-कार्डियम (Endo-Cardium) की बनी होती है

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मनुष्य का हृदय चारवेश्मी या चारकोष्ठीय या चारकक्षीय होता है  जिसमें ऊपरी 02 कक्ष अलिन्द (Atrium)तथा निचले 02 कक्ष निलय (Ventricle) होते हैं । निलय अन्तरा निलय पट द्वारा दो भागों  दाहिने तथा बांये निलय विभक्त रहता है । निलय का पेशीय स्तर अलिन्द से अधिक मोटा होता है । दायें निलय से पल्मोनरी चाप निकलता है तथा बायों निलय से कैरेटिको सिस्टेमिक चाप निकलता है जो कि सम्पूर्ण शरीर में शुध्द रक्त पहुंचाता है । अलिन्द  अन्तरा अलिन्द पट (Inter Auricular Septum) के द्वारा दो भागों  दाहिना अलिन्द तथा बांया अलिन्द में बंटा होता है । अलिन्द तथा निलय कोरोनरी- सल्कस द्वारा अलग- अलग रहते हैं ।

दाहिने अलिन्द में अग्र महाशिरा (Superior-Vena cava) तथा पश्च महाशिरा (Inferior-Vena cava) एवं कोरोनरी साइनस  (Coronary Sinus) द्वारा रक्त लाया जाता है कोरोनरी साइनस के द्वार पर कोरोनरी कपाट(Coronary valve) तथा पश्च महाशिरा के द्वार पर युस्टेकियन कपाट (Eustechian valve) होते हैं । बायें अलिन्द में दोनो फेफडों से आने वाली पल्मोनरी शिराएं खुलती है ।

दाहिना अलिन्द दाहिने निलय में त्रि-कपाटी वाल्ब (Tricuspid valve) द्वारा खुलता है । बांया अलिन्द बायें निलय में  मिट्रल वाल्ब (Mitral valve) द्वारा खुलता है । ये कपाट रक्त को अलिन्द से निलय में जाने तो देते है परन्तु अलिन्द में वापस नही आने देते हैं ।

दाहिने निलय से निकलने वाला पलमोनरी चाप (Pulmanary Arch) पलमोनरी धमनियों में विभक्त होता है यही पलमोनरी धमनियां रक्त को निलय से फेफडों तक ले जाती है । फेफडों में रक्त का शुध्दीकरण होता है, कार्बन डाई अक्साइड निकल जाती है तथा आक्सीजन घुल जाती है । फेफडों द्वारा शुध्द किया गया आक्सीजनयुक्त रक्त चार फुफ्फुस शिराओं या पल्मोनरी वेन्स द्वारा हृदय के बायें अलिन्द में पहुंचता है । बायें  अलिन्द के सिकुडने पर सारा रक्त  मिट्रल वाल्ब (Mitral valve) द्वारा हृदय के बायें निलय में चला जाता है । जब बायां निलय सिकुडता है तो रक्त महाधमनी के मांध्यम से शरीर के प्रत्येक भाग में पहुंच जाता है । रक्त संचार का यह प्रक्रम जीवन पर्यन्त चलता रहता है ।

हृदय की कार्यविधि-

शरीर का रक्त अग्र महाशिरा (Superior-Vena cava) तथा पश्च महाशिरा (Inferior-Vena cava) एवं कोरोनरी साइनस  (Coronary Sinus) के द्वारा दाहिने अलिन्द में लाया जाता है । दाहिने अलिन्द से त्रि-कपाटी वाल्ब (Tricuspid valve) द्वारा रक्त दाहिने निलय में पहुंचता है तथा दाहिने निलय से रक्त पलमोनरी चाप (Pulmanary Arch) व पलमोनरी धमनियों से होकर फेफडों में जाता है । इस प्रकार हृदय का दाहिना भाग (दायां अलिन्द तथा दायां निलय) रूधिर को पम्प करके फेफडों में पहुंचाता है जिसे पल्मोनरी परिसंचरण (Pulmonary Circulation) कहते हैं । फेफडों से आक्सीजनयुक्त रक्त पल्मोनरी शिराओं के माध्यम से बांये अलिन्द में पहुंचता है तथा बांये अलिन्द से होकर रक्त बायें निलय में पहुंचता है । बांया निलय शुध्द रक्त को पम्प करके महाधमनी के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में पहुंचाता है । इस प्रकार हृदय का बायां भाग (बायां अलिन्द तथा बायां निलय) रूधिर को पम्प करके शरीर के अन्य भागों में पहुंचाता है जिसे सिस्टेमिक – परिसंचरण (Systemic Circulation) कहते हैं । उक्त सम्पूर्ण क्रिया एक हृदय स्पन्दन अवधि में पूर्ण होती है । इस एक चक्र की क्रिया में रक्त दो बार हृदय से होकर गुजरता है जिसके कारण इस परिसंचरण को दोहरा परिसंचरण कहा जाता है ।

हृदय की दर मापने के बिन्दु

1-रेडियल धमनी (कलाई का अंगूठे की तरफ वाला सामने का भाग) ।

2-कैरोटिड धमनी (गर्दन) ।

3-कोंहनी का भीतरी भाग ।

4-फीमोरल धमनी ।

5-पश्च टिवियल धमनी ।

6-घुटने का पीछे ।

7-पेट पर (उदर की महाधमनी) ।

8-वक्ष प्रदेश ।

9-कनपटी ।

10-चेहरे की धमनी ।

हृदय के कार्य क्या कार्य हैं ?

हृदय का मुख्य कार्य शरीर के विभिन्न भागों से आए हुए रक्त को पम्प करके शुध्दीकरण हेतु फेफडों में भेजना तथा फेफडों से प्रप्त आक्सीजन युक्त शुध्द रक्त को पम्प करके शरीर के सभी भागों में पहुंचाना तथा पम्पिंग कार्य को नियन्त्रित करना है ।

कार्डियल साइकिल क्या है ?

जब हृदय से रक्त स्पंदित या दूसरे अंगों की ओर पम्प होता है तो इस क्रिया को कार्डियल साइकिल कहते हैं । यह एक मिनट में 72 बार होता है ।

डायस्टोल तथा डायस्टोलिक क्या है ?

जब हृदय की मांसपेशियां शिथिल होती हैं तब एओर्टिक वाल्ब एवं पल्मोनरी वाल्ब बन्द हो जाते हैं । इस समय धमनियों का दाब न्यूनतम हो जाता है । इस क्रिया को डायस्टोल तथा दाब को डायस्टोलिक कहते हैं ।

हृदय का दर मापने का सर्वाधिक उपयुक्त तरीका क्या है ?

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ (ई0सी0जी0) ।

हृदय की दर क्या है ?

एक मिनट में हृदय के धडकनों की संख्या को हृदय की गति कहते हैं ।

पेरीकार्डियम, मायोकार्डियम तथा एण्डोकार्डियम क्या है ?

हृदयभित्ति की परतें ।

एक वयस्क व्यक्ति के हृदय का वजन कितना होता है ?

वयस्क पुरुष के हृदय का वजन लगभग 250 से 390 ग्राम तथा वयस्क स्त्री के हृदय का वजन लगभग 200 से 275 ग्राम होता है ।

हृदय क्या है ?

हृदय एक पेशीय, खोखला, संकुचनशील तथा शंक्वाकार गहरा लाल व बैगनी रंग का अति महत्वपूर्ण अंग है ।

हृदय की गति को कौन सा यन्त्र नियन्त्रित करता है ?

पेसमेकर ।

मनुष्य के हृदय में कितने कक्ष होते हैं ?

चार कक्ष ।

मछली के हृदय में कितने कक्ष होते हैं ?

दो कक्ष ।

उभयचरों के हृदय में कितने कक्ष होते हैं ?

तीन कक्ष ।

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