सन्तुलित आहार- (BALANCE DIET)

0
182
- Advertisement - Disney + Hotstar  [CPS] IN
  • सन्तुलित आहार क्या है ?

वे भोज्य पदार्थ जिसमें मानव की शारीरिक क्षमता तथा कार्यकीय सक्रियता को बनाये रखने के लिए एवं उसमें अभिवृध्दि करने के लिए आवश्यक सभी अवयव/तत्व उपलब्ध हों, सन्तुलित आहार कहलाता है।

वह भोजन जिससे कैलोरी, खनिज लवण, विटामिन एवं अन्य पोषक तत्व समुचित मात्रा में मानव शरीर को प्राप्त हो सकें, सन्तुलित आहार कहलाता है।

  •  सन्तुलित आहार के आवश्यक तत्व कौन-कौन हैं ?

सन्तुलित आहार के मुख्यतया 06 अवयव/तत्व  हैं जो निम्नवत हैंः

- Advertisement - Disney + Hotstar  [CPS] IN
  • प्रोटीन।
  • वसा।
  • कार्बोहाइड्रेट।
  • खनिज लवण।
  • विटामिन।
  • जल।

(1) प्रोटीन 

प्रोटीन जीवद्रव्य का मुख्य अवयव है जो कि अमीनो अम्ल का बना होता है तथा शारीरिक वृध्दि, जीवद्रव्य की उत्पत्ति एवं क्षतिग्रस्त ऊतकों का मरम्मत करता है। मानव शरीर के लिए कुल 20 अमीनो अम्ल की आवश्यकता पडती है जिनमें से 10 अमीनो अम्ल शरीर के अन्दर ही निर्मित होते हैं तथा शेष 10 अमीनो अम्ल भोजन के माध्यम से उत्पन्न होते हैं।

सीरम एवं अण्डे में अल्बूमिन प्रोटीन, रक्त में ग्लोबीन प्रोटीन, गेहूं में ग्लाइडीन प्रोटीन, दूध में केसीन प्रोटीन, सींग में किरोटिन प्रोटीन एवं अकशेरुक जन्तुओं के रक्त में हीमोसाइनिन नामक प्रोटीन पाया जाता है।

01 ग्राम प्रोटीन के आक्सीकरण से 4.1 कैलोरी ऊर्जा प्रप्त होती है।

प्रोटीन के महत्वपूर्ण श्रोत-  सोयाबीन, दाल, अण्डा, मांस, मछली आदि हैं।

सोयाबीन में लगभग 43.2  प्रतिशत प्रोटीन, दालों मे लगभग 30 प्रतिशत प्रोटीन, गेहूं में 12.1 प्रतिशत प्रोटीन, अण्डा में 13 प्रतिशत प्रोटीन, मांस में 21.4 प्रतिशत प्रोटीन, तथा मछली में 16.6 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है।

मानव शरीर के लिए आवश्यक उर्जा का 15 प्रतिशत भाग प्रोटीन से प्राप्त होता है।

प्रोटीन की कमी से होने वाले रोगः  

  • क्वाशियोर्कर- यह रोग बच्चों में होता है ,जिसमें हाथ पांव दुबला हो जाता है तथा पेट बाहर निकल आता है।
  • मरस्मस- यह रोग बच्चों में होता है जिसमें मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं।

प्रोटीन के मुख्य कार्यः

(1)  ये कोशिकाओं,  जीवद्रव्य तथा ऊतकों के निर्माण में भाग लेते हैं।

(2)  जैव उत्प्रेरक तथा जैविक नियन्त्रक के रूप में कार्य करते हैं तथा अनुवांशिकी लक्षणों के विकास को नियंत्रित करते हैं।

(3) शारीरिक वृध्दि, जीवद्रव्य की उत्पत्ति एवं क्षतिग्रस्त ऊतकों का मरम्मत करता है।

(2) वसाः

वसा का निर्माण कार्बन, हाइड्रोजन एवं आक्सीजन से होता है। वसा का आक्सीकरण होने पर वसीय अम्ल एवं ग्लिसराल प्राप्त होते हैं। वसा का संचय वसा ऊतकों में होता है।

01 ग्राम वसा का आक्सीकरण होने पर लगभग 9.3 कैलोरी उर्जा प्रप्त होती है।

मानव शरीर के लिए आवश्यक उर्जा का 35 प्रतिशत भाग वसा से प्राप्त होता है।

वसा के महत्वपूर्ण श्रोतः  घी, वनस्पित तेल, बादाम, काजू, मांस, मछली, चना आदि वसा के महत्वपूर्ण श्रोत है। बादाम में लगभग 58.9 प्रतिशत वसा, सोयाबीन में 19.5 प्रतिशत वसा, मूंगफली में 40 प्रतिशत वसा, चनें में 5.6 प्रतिशत वसा तथा मछली में 1.4 प्रतिशत वसा पायी जाती है।

01 ग्राम वसा से 9.3 कैलोरी ऊर्जा मिलती है।

शरीर में वसा का संश्लेषण माइटोकाण्ड्रिया में होता है।

वसा के कार्यः  शरीर को ऊर्जा प्रदान करना, शरीर के विभिन्न अंगों की चोटों से रक्षा करना।

वसा की कमी का शरीर पर प्रभावः  शारीरिक विकास रुक जाता है, त्वचा रूखी हो जाती है तथा वजन घट जाता है।

वसा की अधिकता का शरीर पर प्रभावः  शरीर स्थूल हो जाता है, रक्तचाप बढ़ जाते हैं तथा हृदय की बीमारी हो जाती है।

(3)कार्बोहाइड्रेटः

कार्बोहाइड्रेट कार्बन, हाइड्रोजन एवं आक्सीजन से मिलकर निर्मित होता है जिसमें हाइड्रोजन तथा आक्सीजन का अनुपात 2 : 1 होता है।

01 ग्राम कार्बोहाइड्रेट से 4.1 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।

मानव शरीर के लिए आवश्यक कुल ऊर्जा का 50 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त होता है।

कार्बोहाइड्रेट के मुख्य श्रोत-  गेहूं, चावल, गन्ना, मूंगफली आदि हैं। गेहूं में लगभग 79.2 प्रतिशत, मूंगफली में 46.1 प्रतिशत, चावल में 78.2 प्रतिशत, चने में 59.2 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।

कार्बोहाइड्रेट 03 प्रकार के होते हैंः

  • मोनोसैकेराइड।
  • डाइसोकेराइड।
  • पाली सैकेराइड।

मानोसैकेराइड्स मुख्यतया दूध, शहद एवं अंगूर में पाये जाते हैं। शहद की शर्करा को फ्रैक्टोज, दूध की शर्करा को गैलक्टोज एवं अंगूर की शर्करा को ग्लूकोज कहते हैं।

दो मोनोसैकेराइड्स अणुओं के संयोग से डाईसोकेराइड्स का एक अणु निर्मित होता है।

डाईसैकेराइड्स के मुख्य श्रोतः दूध, चुकन्दर, गाजर, गन्ना आदि डाईसैकेराइड्स के मुख्य श्रोत हैं ।

पाली सैकेराइड्स जटिल किश्म के कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं जो कि मोनोसैकेराइड्स के कई अणुओं से मिलकर बने होते हैं तथा जल में अघुलनशील होते हैं।

पाली सैकेराइड्स का मुख्य श्रोत-  आलू, अनाज आदि पाली सैकेराइड्स का मुख्य श्रोत हैं।

आलू एवं अनाज की शर्करा को मण्ड (Starch) कहते हैं।

कोशिकाभित्ति की शर्करा को सेलुलोज कहते हैं।

मानव शरीर में संचित शर्करा को ग्लाइकोजन कहते हैं।

ग्लाइकोजन मानव शरीर  यकृत में संचित होता है।

मध्मक्खियां फूलों का पराग (सुक्रोज) चूस कर उसे शहद (फ्रैक्टोज) में परिवर्तित कर देती हैं।

कार्बोहाइड्रेट के कार्यः

1-बाह्य कंकाल, विटामिन सी तथा न्यूक्लिक एसिड का निर्माण करना।

2-शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करना।

(4) खनिज लवणः

खनिज लवण मनुष्य के भोजन के अकार्बनिक घटक होते हैं जो शरीर की उपापचयी क्रियाओं को नियन्त्रित करते हैं।

मानव शरीर के लिए मुखयतया निम्नांकित खनिज लवणों की आवश्यकता पड़ती हैः

  • कैल्शियम।
  • फास्फोरस।
  • पोटैशियम।
  • लोहा।
  • सोडियम।
  • क्लोरीन।
  • तांबा।
  • आयोडीन।
  • कोबाल्ट।
  • कैल्शियमः  इसके मुख्य श्रोत दूध, घी, हरी सब्जियां, अण्डा, गाजर सन्तरा आदि हैं ।

कैल्शियम का मुख्य कार्य मानव शरीर का कंकाल बनाना, तन्त्रिकाओं को उत्तेजित करना एवं रक्त का थक्का जमनें में मदद करना हैं।

कैल्शियम की कमी से मानव कंकाल विकसित नही हो जाता तथा हड्डियों में ओस्टिओपोरोसिस नामक रोग हो जाता है ।

  • फास्फोरसः

मुख्य श्रोत दूध, अण्डा, हरी सब्जी, मछली आदि।

कार्य- वसा उपापचय को नियन्त्रित करना। प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्ल के निर्माण सें सहयोग करना। कंकाल तन्त्र, रक्त तथा दांतों के निर्माण में सहयोग करना।

कमी से होने वाले रोगः हड्डियां लचीली तथा दांतों के मसूड़े कमजोर हो जाते हैं।

  • पोटैशियमः

यह सभी सब्जियों में पाया जाता है ।  इसका कार्य मानव शरीर में परासरण दाब को नियन्त्रित करना है ।

पोडैशियम की कमी से हाइपोकैलेमिया नामक रोग हो जाता है, हृदय ठीक से कार्य नही करता तथा मानसिक सन्तुलन खराब हो जाता है ।

  • लोहाः

लोहा के मुख्य श्रोत- हरी सब्जी, पालक, बथुआ, गन्ना, केला आदि हैं ।

लोहे का मुख्य कार्य लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण करना ।

लोहे की कमी से एनीमिया नामक रोग हो जातात है ।

  • सोडियमः

सोडियम का मुख्य कार्य मानव शरीर में जल नियन्त्रित करना है।

सोडियम का मुख्य श्रोतः  नमक ।

सोडियम की कमी से मानव शरीर में जल-निर्जलीकरण हो जाता है तथा हाइपोनेट्रेमिया नामक रोग हो जाता है।

  • क्लोरीनः

इसका मुख्य श्रोत नमक है।

कार्यः क्लोरीन मानव शरीर में अम्ल,क्षार एवं जल का सन्तुलन नियन्त्रित करता है।

  • तांबाः

तांबा मानव शरीर में एक प्रकार का रक्त घटक होता है जो रक्त एवं एन्जाइम के निर्माण में भाग लेता है।

तांबा की कमी से मानव शरीर का सन्तुलन खराब हो जाता है।

  • आयोडीनः

आयोडीन के मुख्य श्रोत- आयोडीनयुक्त नमक, जल एवं समुद्री नमक।

आयोडीन मानव शरीर में थायराइड ग्रन्थि में थायराक्सिन हार्मोन में पाया जाता है।

आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हो जाता है।

  • कोबाल्टः

कोबाल्ट विटामिन B12 का मुख्य घटक है जो कि मानव शरीर में रक्त निर्माण में सहायक होता है । कोबाल्ट की कमी से एनीमिया नामक रोग हो जाता है ।

(5) विटामिनः  

यह एक कार्बनिक रसायन है ।  इसका आविष्कार सन् 1911 ई0 में फंक ने किया था। इसे शरीर का रक्षात्मक पदार्थ भी कहा जाता है।

विटामिन के प्रकारः
  • जल मे घुलनशील विटामिन- विटामिन B व C।
  • वसा या कार्निक घोल में घुलनशील विटामिन- विटामिन A, D, E एवं K ।
  • विटामिन A

रासायनिक नाम– रेक्टिनाल।

मुख्य श्रोत- दूध, मक्खन, अण्डा, मछली, तेल, पालक, गाजर आदि।

कमी से रोग- रतौंधी, जीरोफ्थैल्मिया, डरमेटोसिस, मन्द वुध्दि, शरीर में पथरी, आंख में सफेदी।

विटामिन ए को वृध्दिकर एवं संक्रमण रोधी विटामिन कहा जाता है।

  • विटामिन B के  समूहः

विटामिन B के 11 समूह हैं जिनमे से 08 मुख्य हैं। ये हैं-  B1,   B2,  B3,  B5,  B6,  B7,   B11 तथा  B12

  • विटामिन B1 

रासायनिक नाम- थाइमिन।

मुख्य श्रोत-  अनाज का छिलके, दूध, दाल एवं यकृत आदि।

कार्य – कार्बोहाइड्रेट का उपापचय करता है ।

कमी से रोग-  मानव में बेरी-बेरी रोग, जानवर में पालीनियूराइटिस रोग।

  • विटामिन B2 

रासायनिक नाम-  रिबोफ्लेविन।

मुख्य श्रोत-  गेहूं, फल, सब्जी, यकृत तथा मांस आदि।

कमी से रोग-  पेलाग्रा या चर्मगाह रोग।

  • विटामिन B3 

रासायनिक नाम- नियासिन।

मुख्य श्रोत-  मांस, मूंगफली, टमाटर, पत्तेदार सब्जी।

कमी से रोग- पेलाग्रा (दाद),4-D  सिन्ड्रोम रोग।

  • विटामिन B5 

रासायनिक नाम-  पैन्टोथैनिक अम्ल।

मुख्य श्रोत-  मांस, दूध, मूंगफली, टमाटर, गन्ना आदि।

कमी से रोग-  मन्दबुद्धि होना, बाल सफेद होना।

  • विटामिन B6

रासायनिक नाम- पायरीडाक्सिन।

मुख्य श्रोत-  यकृत, मांस. दूध, मछली,मटर आदि।

कार्य – प्रोटीन, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट के उपापचय को नियन्त्रित करता है।

कमी से रोग-  अरक्तता (एनीमिया) तथा त्वचा रोग।

  • विटामिन B7 

रासायनिक नाम-  बायोटीन ।

मुख्य श्रोत-  मांस, अण्डा, यकृत, दूध आदि ।

कमी से रोग-  लकवा, बालों का गिरना ।

  • विटामिन B11 

रासायनिक नाम- फॉलिक एसिड।

मुख्य श्रोत-  दाल, यकृत, हरी सब्जी, अण्डा आदि।

कमी से रोग- एनीमिया, पेचिस।

  • विटामिन B12 

रासायनिक नाम- साइनोकोबालामिन।

मुख्य श्रोत- मांस, दूध, अण्डा, फल, कलेजी आदि।

कार्य– न्यूक्लिक अम्ल तथा न्यूक्लियोप्रोटीन का संश्लेषण करता र्है।

कमी से रोग- एनीमिया, पांडुरोग।

इस विटामिन में कोबाल्ट नामक तत्व पाया जाता है।

  • विटामिन C

रासायनिक नाम- एस्कार्बिक अम्ल।

मुख्य श्रोत- नीबू, आंवला, सन्तरा, टमाटर, मुसम्मी, इमली आदि।

कार्य– शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृध्दि करता है।

कमी से रोग- स्कर्वी रोग।

विटामिन सी आंवला में सबसे अधिक पाया जाता है।

  • विटामिन D

रासायनिक नाम- कोल्सीफिरोल।

मुख्य श्रोत- सूर्य की किरण, मक्खन, अण्डा, मछली का तेल, यकृत आदि।

कार्य– हड्डियों तथा दांतों को मजबूती प्रदान करता है।

कमी से रोग-  बच्चों में सूखा रोग, वयस्कों में अस्थिमृदुता।

  • विटामिन E

रासाटनिक नाम- टोकोफेरोल।

मुख्य श्रोत- सोयाबीन का तेल एवं सलाद पत्ते, चावल के छिलके का तेल, कपास के बीज का तेल आदि ।

कार्य – प्रजनन अंगों का विकास, त्वचा की सुरक्षा तथा कोशिकाओं में उपस्थित एंजाइमों की रक्षा करना आदि।

कमी से रोग- नपुंसकता।

  • विटामिन  K

रासायनिक नाम- नैप्थाक्विनोन।

मुख्य श्रोत- हरी सब्जियां, गाजर, अण्डा आदि ।

कार्य– खून का थक्का बनाने में मदद करना।

कमी से रोग- चोट लगने पर खून का थक्का नही बनता।

विटामिन के कार्यः

1-उपापचय क्रिया में सहायता करती है।

2-कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के भंजन में सहायक है।

(6) जलः  

जल मानव शरीर में जीवद्रव्य का एक अति महत्वपूर्ण घटक है। मानव शरीर का 65 से  75% भाग जल है जो कि विभिन्न भागों में असमान रूप से वितरित रहता है। मानव मूत्र में 95 प्रतिशत, रक्त प्लाज्मा में 92 प्रतिशत, रक्त में 83 प्रतिशत, मांसपेशियों में 76 प्रतिशत, हड्डियों में 33 प्रतिशत तथा वृक्क में 80 प्रतिशत जल होता है।

मानव शरीर से 12 प्रतिशत जल निर्जलीकरण होने पर घातक सीमा आरम्भ होती है।

जल के कार्यः

1-पसीना तथा वस्तु द्वारा मानव शरीर के ताप को नियन्त्रित रखना ।

2-भोज्य पदार्थों तखा खनिज लवणों के संवहन का कार्य करना ।

3-उत्सर्जी पदार्थों को उत्सर्जन अंगों के माध्यम से शरीर से बाहर निकालने का कार्य करता है ।

 

विभिन्न फल एवं उसमें उपलब्ध ऊर्जा (कैलोरी में)-
फल उपलब्ध ऊर्जा फल उपलब्ध ऊर्जा
नीबू (छिलका सहित) 22 कैलोरी सेब 81 कैलोरी
केला (मध्यम आकार) 105 कैलोरी अंजीर 37 कैलोरी
करौंदा (क्रेनबेरी) कच्चा ½ कप 23 कैलोरी लीची 28 ग्राम 29 कैलोरी
सन्तरा 65 कैलोरी पपीता ½ कप 27 कैलोरी
नाशपत्ती 98 कैलोरी अनन्नास 1/2कप 39 कैलोरी
अमरूद ½ कप 42 कैलोरी अंगूर 10 फल 36 कैलोरी
आडू 37 कैलोरी ब्लैकबेरी 37 कैलोरी
टमाटर (बडा)पका हुआ 26 कैलोरी स्ट्राबेरी ½ कप 23 कैलोरी
सूखा किशमिश ½ कप 110 कैलोरी टमाटर चेरी 3 कैलोरी
चीनी ½ कप 180 कैलोरी बेर 36 कैलोरी

 

विभिन्न सब्जियां / अनाज एवं उसमें उपलब्ध ऊर्जा (कैलोरी में)
सब्जियां ऊर्जा सब्जियां ऊर्जा
कच्चा टमाटर 100 ग्राम 17 कैलोरी पालक 100 ग्राम 25 कैलोरी
शकरकन्द 100 ग्राम 115 कैलोरी कद्दू 100 ग्राम 13 कैलोरी
वैगन कच्चा 100 ग्राम 15 कैलोरी सफेद गोभी कच्ची 100 ग्राम 27 कैलोरी
गाजर कच्ची 100 ग्राम 30 कैलोरी चुकन्दर कच्चा 100 ग्राम 36 कैलोरी
अंकुरित फलियां 100 ग्राम 31 कैलोरी चुकन्दर उबला 100 ग्राम 46 कैलोरी
अजवाइन 100 ग्राम 07 कैलोरी फूलगोभी उबला 100 ग्राम 28 कैलोरी
नया आलू उबला 100 ग्राम 75 कैलोरी पुराना आलू कच्चा 100 ग्राम 75 कैलोरी
सौंफ 100 ग्राम 12 कैलोरी कच्चा मटर 100 ग्राम 83 कैलोरी
प्याज कच्चा 100 ग्राम 64 कैलोरी लहसुन कच्चा 100 ग्राम 98 कैलोरी
मशरूम कच्चा 100 ग्राम 13 कैलोरी लाल मूली 100 ग्राम 12 कैलोरी
ककड़ी बिना छिली 100 ग्राम 10 कैलोरी शतावरी कच्ची 100 ग्राम 25 कैलोरी
शतावरी उबला 100 ग्राम 13 कैलोरी ब्रोकली कच्चा 100 ग्राम 33 कैलोरी
चावल उबला 100 ग्राम 130 कैलोरी गेहूं 100 ग्राम 327 कैलोरी
चावल कच्चा 100 ग्राम 365 कैलोरी पकाया हुआ अनाज 100 ग्राम 130 कैलोरी
चिकन 100 ग्राम 239 कैलोरी एक चपाती(रोटी) 80-110 कैलोरी

 

  • सन्तुलित आहार से क्या-क्या लाभ हैं ?

सन्तुलित आहार से निम्नांकित लाभ हैंः

1-शरीर का वजन नियन्त्रित रहता हैं।

2-बीमारियों का खतरा कम रहता है।

3-शरीर को उर्जा मिलती है।

4-शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

5-गहरी नींद आती है।

  • क्या दूध एक सन्तुलित आहार है ?

हां। दूध एक सन्तुलित आहार है।

  • मात्र दूध का ही लगातार सेवन करने से कौन सा रोग हो जाता है ?

एनीमिया (रक्ताल्पता) नामक रोग हो जाता है।

  • दूध का रंग सफेद क्यो होता है ?

केसीन नामक प्रोटीन के कारण दूध का रंग सफेद होता है।

  • गाय का दूध हल्का पीला क्यों होता है ?

राइबोफ्लेविन के कारण हल्का पीला होता है।

  • दूध में मीठापन क्यों होता है ?

लैक्टोज नामक शर्करा के कारण।

  • एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट से कितनी ऊर्जा मिलती है ?

04 कैलोरी।

  • एक ग्राम प्रोटीन से कितनी ऊर्जा मिलती है ?

04 कैलोरी।

  • एक ग्राम वसा से कितनी ऊर्जा मिलती है ?

09 कैलोरी।

- Advertisement - Disney + Hotstar  [CPS] IN