मानव में होने वाले अनुवांशिक, हेलमेन्थस व अन्य महत्वपूर्ण रोग (GENETIC, HELMENTHIS AND OTHERS DESEAS IN HUMAN BODY)

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  • मनुष्य में होने वाले अनुवांशिक रोगः

मनुष्य में होने वाले प्रमुख अनुवांशिक रोग हीमोफीलिया, वर्णान्धता, टर्नर सिन्ड्रोम, क्लीनफेल्टर सिन्ड्रोम, डाउन सिन्ड्रोम तथा पटाऊ  सिंड्रोम हैं।

  • हीमोफीलियाः   

यह रोग मुख्यतया पुरुषों में होता है । इस रोग से प्रभावित व्यक्ति को चोट लगने पर काफी देर तक रक्त का थक्का नहीं बनता है।  यह रोग स्त्रियों में तभी होता है जब उनके दोनों गुणसूत्र (XX) प्रभावित हो।

  • वर्णांन्धताः   

इस रोग की वाहक स्त्रियां हैं।  यह रोग पुरुषों में होता है। इस रोग में लाल व हरा रंग पहचानने की क्षमता नहीं होती। यह रोग स्त्रियों में तभी होता है जब उनके दोनों गुणसूत्र (XX) प्रभावित हो।

  • टर्नर सिंड्रोमः   

यह रोग मुख्यतया स्त्रियों में होता है जिसमें स्त्रियों का शरीर अल्पविकसित, कद  छोटा, वक्ष चपटा तथा जननांग अविकसित होते हैं। इसमें स्त्रिया बांझ जाती है।  इस रोग से पीड़ित स्त्रियों में गुणसूत्रों की संख्या 45 होती है।

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  • क्लीन फिल्टर सिंड्रोमः  

यह रोग पुरुषों में होता है जिसमें पुरुषों का वृषण अल्पविकसित तथा स्तन स्त्रियों के समान विकसित हो जाता है। इस रोग से ग्रसित पुरुषों में गुणसूत्रों की संख्या 47 होती है। इस रोग से ग्रसित होने पर पुरुष नपुंसक हो जाता है।

  • पटाऊ सिंड्रोमः  

इसमें रोगी मन्दबुद्धि, नेत्र रोग प्रभावित हो सकता है, ओंठ बीच से कट जाता है तथा तालू में दरार हो जाती है। 

  • डाउन सिंड्रोमः   

इस रोग से ग्रसित व्यक्ति  में मंदबुद्धि, जीभ मोटी, आंखों टेंढी तथा शारीरिक विकास अनियमित हो जाता है

  • हेल्मिन्थस द्वारा होने वाली बीमारियांः

  • फाइलेरिया या हाथीपांवः 

यह रोग फाइलेरिया बैंन्कोफ्टाई नामक क्रिमि से होता है जिसका संचालन क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से होता है। इस रोग में वृषणकोषों, पैरों तथा शरीर के अन्य भागों में सूजन आ जाती है। इस रोग को हाथीपांव भी कहा जाता है।

  • अतिसारः  

यह रोग मनुष्य की आंत में मौजूद एस्केरिस लुम्र्बीकाइडीज नामक अंतः परजीवी प्रोटोजोआ (निमिटोड) द्वारा होता है जो घरेलू मक्खी द्वारा फैलता है। इस रोग में आंतों में घाव हो जाता है तथा प्रोटीन पचाने वाला  ट्रिप्सिन नामक एन्जाइम नष्ट हो जाता है ।

  • मनुष्य में होने वाली कुछ अन्य महत्वपूर्ण बीमारियांः

  • चिकनगुनियाः    

यह एक संक्रामक रोग है जो मादा एडिस मच्छर के काटने चिकनगुनिया वायरस के कारण होता है।

  • पक्षाघात या लकवाः 

अत्यधिक रक्त दाब के कारण मस्तिष्क की किसी धमनी के फट जाने या मस्तिष्क को रक्त की पर्याप्त आपूर्ति न हो पाने के कारण तंत्रिकाएं निष्कृय हो जाती है जिसके कारण चन्द समय में ही शरीर का कोई भाग  पक्षाघात या लकवा मार जाता है।

  • मिर्गी या आपस्मारः

यह रोग मस्तिष्क के आंतरिक रोगों के कारण होता है। मिर्गी का दौरा पड़ने पर रोगी के मुंह से झाग निकलता है।

  • कैंसरः

शरीर के किसी भी भाग में कोशिका वृद्धि अनियन्त्रित हो जाने पर अनियमित कोशिकाओं के गुच्छे बन जाते हैं इन्हीं गुणों को कैंसर कहते हैं। कैंसर स्थापित होने में लगे समय को लाइट एन्ड पीरियड कहते हैं । इस रोग के इलाज में रेडान गैस का प्रयोग किया जाता है । रोगी को कीमोथेरेपी की जाती है ।

कैंसर मुख्यतया 04 प्रकार का होता है– कार्सीनोमास, सार्कोमास, ल्यूकीमियास तथा लिम्पोमास।

कार्सीमोस कैंसर की उत्पत्ति उपकला ऊतक से होती है।

लिम्फोपास कैंसर प्लीहा एवं लसीका गांठों में होता है।

सोर्कोमास कैंसर अस्थियों, उपास्थियों, पेशियों तथा संयोजी ऊतकों में होता है।

ल्यूकीमियास कैंसर ल्यूकोमाइट्स में असाधारण वृध्दि के कारण होता है।

  • सीजोफ्रीनियाः 

यह एक मानसिक रोग है जो कि प्रायः युवाओं में होता है। इस रोग से पीड़ित वयक्ति आवेशहीन, आलगावहीन, तथा आलसी हो जाता है और वास्तविकता को सत्य न समझ कर कल्पना को ही सत्य समझता है।

  • डिप्लोपियाः 

यह रोग आंखों का मांसपेशियों के पक्षाघात के कारण होता है।

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