Saturday, September 19, 2020
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जीवन का उदभव तथा विकास – (THE ORIGIN AND EVOLUTION OF LIFE)

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पृथ्वी पर जीवन के उदभव के प्रमुख सिध्दान्त निम्नवत हैं-

  • धार्मिक सिध्दान्त (Religious Theory)।
  • स्वतः उत्पत्तिवाद या जनन सिध्दान्त (Theory of Spontaneous)।
  • आकस्मिक अकार्बनिक उत्पत्तिवाद या प्रलयवाद (Theory of Sudden Creation From Inorganic Material or Catastrophism)।
  • ब्रह्ण्डवाद या कास्मोजोइक सिध्दान्त (Cosmozoic Theory)।
  • ओपैरिन का आधुनिक सिध्दान्त (Oparins ModernTheory)।

  • धार्मिक सिध्दान्त (Religious Theory)
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सृष्टि का रचना तथा जीवन की उत्पत्ति किसी अलौकिक या दैवीय शक्ति के द्वारा हुई है।

  • स्वतः उत्पत्तिवाद या जनन सिध्दान्त (Theory of Spontaneous)

इस सिध्दान्त के प्रतिपादक प्लेटो के अनुसार जीव जन्तुओं का उद्भव पृथ्वी पर उपस्थित निर्जीव या मृत पदार्थों से हुआ है।

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(3)आकस्मिक अकार्बनिक उत्पत्तिवाद या प्रलयवाद (Theory of Sudden Creation From Inorganic Material or Catastrophism)

इस सिध्दान्त के प्रतिपादक हीकल हैं जिनके अनुसार जीवन की उत्पत्ति प्रकृति में आये प्रलय या क्रान्ति के परिणामस्वरूप पृथ्वी पर उपस्थित अकार्बनिक पदार्थों में पुनः संयोजन के परिणामस्वरूप हुई है।

  • ब्रह्ण्डवाद या कास्मोजोइक सिध्दान्त (Cosmozoic Theory)

जीवन की उत्पत्ति प्रतिरोधी जीवाणुओं या जीव के किसी अन्य स्वरूप के अन्य ग्रहों से पृथ्वी पर पहुंचने से हुई है ।

  • ओपैरिन का आधुनिक सिध्दान्त (Oparins ModernTheory)

इस सिध्दान्त के जनक रूसी वैज्ञानिक अलेक्जेण्डर इवानोविच ओपैरिन हैं । ओपैरिन के आधुनिक सिध्दान्त के अनुसार जीवन की उत्पत्ति जीव रसायन उदभव के परिणामस्वरूप समुद्र में हुई । जीव रसायन का निर्माण कार्वनिक तथा अकार्बनिक पदार्थों के परस्पर सहयोग से हजारों वर्ष पूर्व हुई । जीवद्रव्य के संगठन में भाग लेने वाले मुख्य अवयव अमोनिया, कार्बन, हाइड्रोजन, गन्धक, जल तथा फास्फोरस पृथ्वी पर उपस्थित थें जो कि नदियों के माध्यम से समुद्र में पहुंच गये जटिल कार्बनिक यौगिक जैसे- एथिलेन, ब्यूटेन, एसिटिलीन, प्रोपेन आदि निर्मित हुए । उक्त सभी यौगिक पराबैगनी किरण एवं एक्स रेज के विद्युत उत्सर्जन द्वारा जीव उत्पत्ति के अति अवश्यक तत्वों शर्करा, ग्लिसरीन, एमीनो अम्ल, वसा अम्ल, लैक्टिक अम्ल आदि का निर्माण किए । उक्त सभी सरल यौगिक परस्पर संयोजन करके जटिल योगिक जैसे- न्यूक्लिक अम्ल, जटिल शर्करा, ए0टी0पी0 आदि निर्मित किए तथा ये न्युक्लिओ प्रोटीन उत्परिवर्तन के परिणामस्वरूप नये-नये न्युक्लियोप्रोटीन का निर्माण किए तथा प्रथम सजीव कोशिका निर्मित हुई । उपरोक्त सजीव लक्षण सबसे पहले विषाणु में पाये गये जिसके कारण न्युक्लियोप्रोटीन को प्रारम्भिक जीव माना गया । न्युक्लियोप्रोटीन से कोयसरवेट का निर्माण हुआ । उपरोक्त अवस्था कोशिका निर्माण की प्रथम अवस्था कही जाती है । इसके बाद कोशिका के अन्य अवयव क्लोरोप्लास्ट, लाइसोसोम, माइटोकाण्ड्रिया आदि निर्मित हुए । विभिन्न कार्यों के लिए इन कोशिकाओं में आपस में विभाजन आरम्भ हुए जिसके परिणामस्वरूप साधारण कोशिका से जटिल तन्तु निर्मित हुए । इसी को जैव विकास कहा जाता है । सर्वप्रथम जीव की उत्पत्ति आज से करीब एक अरब वर्ष पूर्व समुद्री जल में हुई थी । माइटोकाण्ड्रिया को कोशिका का विद्युतगृह कहा जाता है । इस प्रकार पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति की काफी जटिल एवं प्राचीन है ।

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