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परमाणु भौतिकी (Atomic Physics)

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Happy schoolgirl holding experimenting model in laboratory
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परमाणु (Atom)

किसी तत्व का  वह छोटा से छोटा कण जो किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग तो ले सकता है परन्तु स्वतन्त्र अवस्था में नही रह सकता है, परमाणु कहलाता है ।

परमाणु तीन  कणों से मिलकर बना हैः

1- इलेक्ट्रान।

2- प्रोटान।

3- न्यूट्रॉन।

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परमाणु की कक्षा में इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटान घूमते रहते हैं एवं नाभिक में न्यूट्रॉन स्थिर रहता है। इलेक्ट्रॉन पर ऋणावेश -1,  प्रोटान पर धनावेश +1 होता है। न्यूट्रॉन  उदासीन होता है अर्थात् इस पर आवेश शून्य होता है। इलेक्ट्रान की खोज जे0 जे0 थॉमसन ने किया था। प्रोटॉन की खोज गोल्डस्टीन ने किया था। न्यूट्रॉन की खोज चैडविक ने  किया था। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.105× 1028 ग्राम (0.0005486 amu), प्रोटॉन का द्रव्यमान 1.6726 × 1024 ग्राम ( 1.0073335 amu) तथा न्यूट्रॉन का द्रव्यमान 1.6749 × 1024 ग्राम ( 1.008724 amu) होता है

कैथोड किरण (Cathod Ray

जब विसर्जन नलिका के सिरों पर 20 किलों वोल्ट का विभावान्तर लगाया जाता है तथा उसका दाब 0.1 मिलीमीटर पारे के स्तम्भ के बराबर होता है तब उसके कैथोड से एक इलेक्ट्रान पुंज निकलता है जिसे कैथोड किरण कहते हैं।

कैथोड किरण के गुणः

1कैथोड किरणें अदृश्य होती हैं जो कि सीधी रेखा में चलती हैं।

2- केथोड किरण का वेग प्रकाश के वेग का 1/10 गुना होता हैं।

3- कैथोड किरण इलेक्ट्रान की बनी होती हैं तथा ऋणात्मक होती है।

4- कैथोड किरण के उत्पादन में विभव का श्रोत प्रेरक कुण्डली होती है।

5- कैथोड किरण गैसों को आयनीकृत कर देती हैं तथा फोटेग्राफिक प्लेट को प्रभावित करती हैं।

6- कैथोड किरण की वेधन क्षमता कम होती है तथा विद्युतीय क्षेत्र से लम्बवत गुजरती हैं।

डायोड बल्ब (Diode Valve)

डायोड बल्ब की खोज वर्ष 1904 ई0 में प्रसिध्द वैज्ञानिक फ्लेमिंग ने किया था । डायोड बल्ब एक ऐसी निर्वात नलिका है जिसमें दो इलेक्ट्रोड होते हैं। इसका तन्तु टंगस्टन धातु का बना होता है जिस पर बेरियम आक्साइड का लेप लगा होता है जिसे बैट्री से गर्म करने पर इलेक्ट्रान निकलते हैं जो कि धनावेशित प्लेट की तरफ प्रवाहित होते है।

डायोड बल्ब का उपयोग प्रत्यावर्ती धारा (A.C) को दिष्ट धारा (D.C) में बदलने के लिए किया जाता है।

vacuum tube

  • ट्रायोड बल्ब  (Triode Valve)

ट्रायोड बल्ब की खोज वर्ष 1907 ई0 में अमेरिका के प्रसिध्द वैज्ञानिक ली0 डी0 फोरेस्ट ने किया था। ट्रायोड बल्ब तीन इलेक्ट्रोड प्लेट, ग्रिड व तन्तु वाली एक निर्वात नलिका है।

  • अर्ध्दचालक (Semi-Conductor

वे पदार्थ जिनकी इलेक्ट्रानिक संरचना इस प्रकार की होती है कि कहीं पर इलेक्ट्रान मुक्त हो जाता है तो कहीं पर रिक्त हो जाता है, अर्ध्चालक कहलाते हैं। जैसे- सिलिकान, जर्मेनियम आदि।

  • बाह्य अर्ध्दचालक (Extrinsic semi conductor

अर्ध्दचालकों में अपद्रव्य मिलाने से प्राप्त ठोस को बाह्य अर्ध्दचालक (Extrinsic semi conductor) कहते हैं।

अपद्रव्य के रूप में आर्सेनिक या एलुमिनियम मिलाया जाता है जिससे अर्धदचालक की चालकता काफी बढ जाती है ।

  • N-प्रकार के अर्ध्दचालकः

वे अर्ध्दचालक जिनमें विद्युत प्रवाह मुक्त इलेक्ट्रानों की संख्या बढ जाने के कारण होता है, उन्हें N-प्रकार के अर्ध्दचालक कहते हैं।

शुध्द अर्ध्दचालक में पंच संयोजी अपद्रव्य जैसे आर्सेनिक मिलाने पर N-प्रकार के अर्ध्दचालक प्राप्त होते हैं।

  • P-प्रकार के अर्ध्दचालकः

वे अर्ध्दचालक जिनमें विद्युत का प्रवाह कोटरों की गति के कारण होता है, P-प्रकार के अर्ध्दचालक कहलाते हैं।

शुध्द अर्ध्दचालक में त्रिसंयोजी अपद्गव्य जैसे एलुमिनियम मिलाने पर P-प्रकार के अर्ध्दचालक प्राप्त होते हैं।

  • दाता (Donor) क्या हैं ?

पंच संयोजी अपद्रव्य को दाता (Donor) कहते हैं।

  • परमाणु ग्राही (Atomic Acceptor) क्या हैं ?

त्रिसंयोजी अपद्रव्य परमाणु ग्राही (Atomic Acceptor) कहलाते हैं।

  • डोपिंग (Doping) क्या हैं  ?

अपद्रव्य मिलाये जाने की क्रिया को डोपिंग (Doping) कहते हैं।

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