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प्रत्यास्थता तथा श्यानता (ELASTICITY AND VISCOITY)

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Rubber band
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  • प्रत्यास्थता (Elasticity)

किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वस्तु उस पर लगाए बाह्य बल से उत्पन्न आकार या रूप के परिवर्तन का विरोध करती है तथा जैसे ही बल हटा लिया जाता है वस्तु अपनी पूर्व अवस्था में वापस आ जाती है इसे प्रत्यास्थता कहते हैं।

वस्तु पर लगाए गए उक्त बाह्य बल को बिरूपक बल कहते है।

जैसे- रबर के छल्ले को खींचने पर उसका आकार बढ़ता है तो रबर का छल्ला उस पर लगे बल के परिणामस्वरूप उसके आकार में उत्पन्न हुए परिवर्तन का विरोध करता है तथा जैसे ही बल हटा लिया जाता है छल्ला पुन: अपनी  पूर्व अवस्था में वापस आ जाता है। रबर के छल्ले का यह गुण प्रत्यास्थता है।

  • प्रत्यास्थता की सीमाः

बिरूपक बल की वह सीमा जिससे अधिक बल लगाने पर प्रत्यास्थता का गुण समाप्त हो जाता है, प्रत्यास्थता की सीमा कहलाता है। प्रत्येक पदार्थ की प्रत्यास्थता की सीमा अलग-अलग होती है।

  • प्रतिबल क्या है ?

बाह्य बल के कारण वस्तु के एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले आन्तरिक बल को प्रतिबल कहते हैं इसका मात्रक न्यूटन / मीटर2 होता है।

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Roll of decorative elastic ribbon in red and black
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  • विकृति क्या है ?

आरोपित विरूपक बल के कारण वस्तु में होने वाले भिन्नात्मक परिवर्तन को विकृति कहते हैं। यह विरूपक बल एवं बिरूपक बल के कारण वस्तु के आकार में उत्पन्न परिवर्तन का अनुपात होता है। इसका कोई मात्रक नहीं होता।

  • प्रत्यास्थता का यंग मापांक क्या है ?

प्रतिबल तथा विकृति के अनुपात को यंग मापांक कहते हैं। जैसे- यदि प्रतिबल 2 तथा विकृति 3 है तो यंग मापांक 2/3 होगा या 2:3 होगा।

  • हुक का नियम क्या है ?

प्रत्यास्थता की सीमा में प्रतिबल सदैव विकृति के के अनुक्रमानुपाती होता है इसे हुक का नियम कहते हैं।

अर्थात प्रतिबल / विकृति = प्रत्यास्थता गुणांक।

प्रत्येक पदार्थ का प्रत्यास्थता गुणांक अलग-अलग होता है। इसका एस0 आई0 मात्रक न्यूटन / मीटर2 या न्यूटन मीटर-2 है।

  • श्यानता तथा श्यान बल क्या है ?

किसी द्रव् या गैस की दो क्रमागत परतों के बीच उनकी आपेक्षिक गति का विरोध करने वाले घर्षण बल को श्यान बल कहते हैं तथा इस गुण को श्यानता कहते हैं । श्यानता का गुण ठोस में नहीं होता। यह गुण केवल द्रव और गैसों में होता है।

गैसों की श्यानता द्रवों की तुलना में बहुत कम होती है अर्थात द्रवों की श्यानता अधिक तथा गैसों की श्यानता बहुत कम होती है।

एक आदर्श तरल की श्यानता शून्य होती है। द्रव में श्यानता विभिन्न अणुओं के मध्य लगने वाले ससंजक बल के कारण होती है।

गैसों में श्यानता अणुओं के एक परत से दूसरे परत में जाने के कारण होती है। ताप बढ़ने पर गैसों की श्यानता बढ़ जाती है जबकि ताप बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घट जाती है।

श्यानता गाढेपन पर निर्भर करती है द्रव जितना अधिक गाढ़ा होता है उसकी श्यानता उतनी ही अधिक होती है यही कारण है कि शहद तथा ग्लिसरीन की श्यानता पानी से अधिक होती है।

द्रव या गैस की श्यानता को श्यानता गुणांक कहते हैं जिसका मात्रक पास्कल सेकंड ,प्वाइजली तथा डेकाप्वाइज है।

  • श्यानता के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण

(1) वायु की श्यानता जल की श्यानता से कम होने के कारण हम जल की अपेक्षा वायु में अधिक तेजी से दौड़ पाते हैं।

(2)वायु की श्यानता के कारण ही बादल बहुत धीरे-धीरे नीचे आते हैं तथा आकाश में तैरते प्रतीत होते हैं।

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