प्रकाश (LIGHT)

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Christmas lights
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  • प्रकाश (Light)

प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है जो कि विद्युत चुम्बकीय तरंगों के रूप में संचारित होती है जिसका ज्ञान मनुष्य को आंखों के माध्यम से होता है । प्रकाश की तरंग दैर्ध्य 3900 एंगस्ट्राम से 7800 एंगस्ट्राम के मध्य होती है। एंगस्ट्राम  को A से प्रदर्शित करते हैं।

A   =    1010 m    (जहां  m  = मीटर)

प्रकाश के प्राकृतिक स्रोत सूर्य, तारे तथा अन्तरिक्ष के अन्य प्रकाश श्रोत हैं।

सूर्य से पृथ्वी को लगभग 4 × 10 26 जूल प्रति सेकेण्ड की दर से ऊर्जा प्राप्त होती है।

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जीव जन्तुओं से प्राप्त होने वाले प्रकाश को जैव प्रकाश कहते हैं।

प्रकाश एक प्रकार की अनुप्रस्थ तरंग है। प्रकाश की सर्वप्रथम गणना रोमर ने की थी । निर्वात् तथा वायु में प्रकाश का वेग 3 ×108 मीटर प्रति सेकेण्ड होती है जो सर्वाधिक है।

सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकेण्ड का समय लगता है।

चन्द्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं है। चन्द्रमा सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित है। चन्द्रमा से परावर्तित प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में 1.28 सेकेण्ड का समय लगता है।

प्रकाश की चाल माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है। जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होता है उस में प्रकाश की चाल उतनी ही कम होती है।

वायु तथा निर्वात में प्रकाश की चाल सर्वाधिक होती है।

Traffic lights
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  • विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चालः 

माध्यम प्रकाश की चाल (मीटर प्रति सेकेण्ड में )
पानी 2.25 × 108
कांच 2 × 108
निर्वात 3 × 108
नायलान 2.99 × 108
तारपीन का तेल 2.04 × 108

 

  • प्रकाश का परावर्तन   (Reflaction of Light)

प्रकाश किरण के किसी चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन (Reflaction of Light) कहते हैं।

प्रकाश के परावर्तन (Reflaction of Light)  के 2 नियम है– (1) आपतित किरण आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तथा परावर्तित किरण एक ही तल में होते हैं ।  (2) आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है।

  • समतल दर्पण द्वारा प्रकाश का परावर्तन (Reflaction of Light by Plane Mirror

समतल दर्पण प्रकाश का सबसे अच्छा परावर्तक है । परावर्तित पृष्ठ के लम्बवत सीधी रेखा को अभिलम्ब कहा जाता है।

परावर्तक तल पर सीधे आकर गिरने वाली किरण को आपतित किरण कहते हैं।

जो किरण परावर्तन के पश्चात वापस उसी माध्यम में वापस लौट जाती है उसे परावर्तित किरण कहते हैं।

आपतित किरण तथा अभिलम्ब के बीच के कोण को आपतन कोण कहा जाता है।

अभिलम्ब तथा परावर्तित किरण के बीच के कोण को परावर्तन कोण कहा जाता है।

समतल दर्पण में किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब समतल दर्पण के पीछे ठीक उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु समतल दर्पण के सामने रखी होती है । प्रतिबिम्ब काल्पनिक, वस्तु के बराबर तथा पार्श्व उल्टा होता है।

समतल दर्पण में वस्तु का पूरा प्रतिबिम्ब देखने के लिए दर्पण की लम्बाई वस्तु की लम्बाई के कम से कम आधी होनी आवश्यक है।

यदि कोई व्यक्ति V चाल से दर्पण की ओर आता है तो उसे दर्पण में अपना प्रतिबिम्ब दोगुनी चाल अर्थात 2V  चाल से अपनी ओर आता हुआ दिखाई देता है।

यदि आपतित किरण को नियत रखते हुए दर्पण को थीटा डिग्री कोण से घुमा दिया जाए तो परावर्तित किरण टू थीटा डिग्री घूम जाती है।

यदि दो समतल दर्पण थीटा डिग्री कोण पर झुके हो तो उनके बीच रखी वस्तु के प्रतिबिम्बों की संख्या निम्नवत होगीः

(1)900 कोण पर झुके दो समतल दर्पणों  के बीच 3600 / 900 – 1 = 4 – 1 =  3  प्रतिबिम्ब बनेंगे।

(2) 400 कोण पर झुके दो समतल दर्पणों  के बीच 3600 / 400  = 9  प्रतिबिम्ब बनेंगे।

(3) 400 कोण पर झुके दो समतल दर्पणों  के बीच यदि कोई  वस्तु 200 पर रखी जाती है तो प्रतिबिम्बों की संख्या 3600 / 400 – 1 = 9 – 1 =  8  होगी।

(4)यदि 3600 / थीटा डिग्री एक भिन्न संख्या आए तो प्रतिबिम्बों का संख्या उसके पूर्णां के बराबर होगी।

उपरोक्त विष्लेषण से स्पष्ठ है किः

(a) यदि 3600 / थीटा डिग्री एक सम संख्या आए तो सभी परिस्थितियों में वस्तु के प्रतिबिम्बों की संख्या (n)  = 3600 / थीटा डिग्री – 1 होती है।

(b) यदि 3600 / थीटा डिग्री एक विषम संख्या आए तो सभी परिस्थितियों में वस्तु के प्रतिबिम्बों की संख्या (n)  = 3600 / थीटा डिग्री होती है।

(c) यदि 3600 / थीटा डिग्री एक विषम संख्या आए तथा वस्तु दोनों दर्पणों के बीच के कोण के समद्विभाजक पर रखी हो तो वस्तु के प्रतिबिम्बों की संख्या (n)  = 3600 / थीटा डिग्री – 1 होती है।

  • प्रकाश परावर्तन के नियम (Law of Refelaction Light)

(1)आपतित किरण, अभिलम्ब तथा परावर्तित किरण एक ही समतल में होते हैं।

(2)आपतन कोण का मान परावर्तन कोण के बराबर होता है।

  • प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (Total Internal Reflaction of Light

यदि आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से थोड़ा सा अधिक कर दिया जाए तो प्रकाश विरल माध्यम में बिल्कुल ही नहीं जा पाता बल्कि सम्पूर्ण प्रकाश परावर्तित होकर सघन माध्यम में ही वापस लौट आता है,  प्रकाश की इसी घटना को प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (Total Internal Reflaction of Light) कहते हैं।

जैसे- हीरे का चमकना,  कांच में आयी दरार का चमकना,  रेगिस्तान में मरीचिका का बनना तथा जल में पड़ी परखनली का चमकना आदि।

प्रकाश की इस घटना में प्रकाश का अपवर्तन बिल्कुल नहीं होता सम्पूर्ण आपतित प्रकाश परावर्तित हो जाता है।

  • प्रकाश के पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (Total Internal Reflaction of Light) के लिए किन- किन शर्तों का पूर्ण होना आवश्यक है ?

प्रकाश के पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के लिए निम्नांकित शर्तों का पूर्ण होना अत्यन्त आवश्यक हैः

(1)प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश कर रही हो।

(2)आपतन कोण क्रान्तिक कोण से अधिक अर्थात् बड़ा हो।

  • प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light

जब प्रकाश की किरणें एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है तो उक्त दोनों माध्यमों को अलग करने वाले तल पर अभिलम्बवत आपाती होने पर बिना मुड़े सीधे निकल जाती हैं, किन्तु तिरछी आपाती होने पर वह अपनी मूल दिशा से कुछ विचलित हो जाती है अर्थात् मुड़ जाती हैं, प्रकाश की इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

जैसे- (1) द्रव में अंशतः डूबी हुई सीधी छड़ टेढ़ी दिखाई देती है।

(2) पानी के अन्दर पड़ी हुई मछली वास्तविक गहराई से कुछ ऊपर उठी दिखाई देती है।

(3) आकाश में तारे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं।

(4) पानी से भरे हुए पात्र की तली में पड़ा हुआ सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है।

(5) सूर्योदय से पहले तथा सूर्यास्त के बाद भी सूर्य दिखाई पड़ता है।

जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम (जैसे हवा से पानी में) में प्रवेश करती है तो वह दोनों माध्यमों के पृष्ठ पर खींचे गए अभिलम्ब की ओर झुक जाती है। जैसे- हवा से पानी में प्रवेश करना।

जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम (जैसे पानी से हवा में) में प्रवेश करती है तो वह अभिलम्ब से दूर हट जाती है।

प्रकाश की जो किरण अभिलम्ब के समानान्तर प्रवेश करती है उसके मार्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता तथा वह बिना झुके सीधी निकल जाती हैं।

किसी भी माध्यम का अपवर्तनांक भिन्न-भिन्न रंग के प्रकाश के लिए भिन्न भिन्न होता है, तरंगदैर्ध्य बढ़ने पर अपवर्तनांक घट जाता है जिसके कारण लाल रंग का अपवर्तनांक सबसे कम तथा बैंगनी रंग का अपवर्तनांक सर्वाधिक होता है।

ताप बढ़ने पर अपवर्तनांक (Refraction ) घटता है परन्तु यह परिवर्तन बहुत कम होता है।

प्रकाश के परावर्तन के लिए प्रकाश का दो अलग-अलग माध्यमों से होकर गुजरना परम आवश्यक है। ऐसा न होने पर प्रकाश के परावर्तन की घटना नहीं होती

  • प्रकाश के अपवर्तन (Refraction of Light) का क्या नियम है ?

प्रकाश के अपवर्तन (Refraction of Light) के निम्नांकित नियम हैः

(1)आपतित किरण, अभिलम्ब एवं अपवर्तित किरण तीनों एक ही समतल में स्थित होते हैं।

(2)किन्हीं दो माध्यमों के लिए आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक नियतांक होता है।

अर्थात्   Sine i / Sine r  = k  (नियतांक)

  • प्रतिबिम्ब (Image)

किसी दर्पण के सामने रखी किसी वस्तु से चलने वाली प्रकाश किरणें दर्पण के तल से परावर्तित होकर हमारी आंखों पर पड़ती है जिसे हमें वस्तु की आकृति दिखाई देती है, इसी आकृति को वस्तु का प्रतिबिम्ब कहते हैं।

प्रतिबिम्ब दो प्रकार का होता है- वास्तविक प्रतिबिम्ब तथा आभासी प्रतिबिम्ब।

किसी बिन्दु से चलने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के पश्चात जिस बिन्दु पर मिलती हैं वह उस बिन्दु का वास्तविक प्रतिबिम्ब होता है।

किसी बिन्दु से चलने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के पश्चात जिस बिन्दु पर फैलती हुई प्रतीत होती हैं वह उस बिन्दु का आभासी प्रतिबिम्ब होता है।

वस्तु के प्रतिबिम्ब की लम्बाई तथा उस लम्बाई के अनुपात को प्रतिबिम्ब का रेखीय आवर्धन(Image of Linear Magnification) कहते हैं।

वास्तविक प्रतिबिम्ब पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है जबकि आभासी प्रतिबिम्ब पर्दे पर नहीं प्राप्त किया जा सकता है।

  • प्रकाशित तन्तु (Optical Fibers )

प्रकाशिक तन्तु पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के सिद्धान्त पर आधारित एक ऐसी युक्ति है जिसके माध्यम से प्रकाश सिग्नल को इसकी तीव्रता में बिना क्षय अर्थात्  कमी  किए एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानान्तरित किया जा सकता है मार्ग चाहे कितना भी टेढ़ा मेढ़ा हो।

इस प्रकार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन का प्रयोग करके प्रकाश को एक वक्रीय पथ पर चलाया जा सकता है।

  • प्रकाशित तन्तु के उपयोग ( Uses of Optical Fibers)

(1)मनुष्य के शरीर के अन्दर लेसर किरणे भेजने के लिए।

(2)विद्युत सिग्नल को प्रकाश सिग्नल में बदलकर प्रेषित करने तथा अभी ग्रहण करने के लिए।

(3)प्रकाश सिग्नलों के दूरसंचार के लिए।

(4)मानव शरीर के आन्तरिक भागों का परीक्षण करने के लिए।

  • प्रकाश का वर्ण विक्षेपण (Dispersion of Light) क्या है ?

जब सूर्य का प्रकाश किसी प्रिज्म में से होकर गुजरता है तो वह अपवर्तन के पश्चात प्रिज्म के आधार की तरफ झुकने के साथ-साथ विभिन्न रंगों के प्रकाश में बंट जाता है। इस प्रकार प्राप्त रंगों के समूह को वर्णक्रम (Spectrum) तथा श्वेत प्रकाश को अपने अवयवी रंगों में विभक्त होने की घटना को प्रकाश का वर्ण विक्षेपण (Dispersion of Light) कहते हैं। जैसे- इन्द्रधनुष का बनना आदि।

किसी माध्यम के पदार्थ का अपवर्तनांक आपतित प्रकाश की किरण की तरंगदैर्ध्य (रंग) पर निर्भर करता है। प्रकाश के विभिन्न रंगों की तरंगदैर्ध्य अलग-अलग होती है। लाल रंग की तरंग दैर्ध्य अधिकतम तथा बैगनी रंग की तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होती है जिसके कारण लाल रंग का अपवर्तनांक बैगनी रंग के अपवर्तनांक से कम होता है

बैगनी रंग के प्रकाश का विक्षेपण सर्वाधिक तथा लाल रंग के प्रकाश का विक्षेपण न्यूनतम होता है।

पारदर्शी पदार्थ में ज्यों-ज्यों प्रकाश के रंगों का अपवर्तनांक बढ़ता जाता है त्यों- त्यों उस पदार्थ में उसकी चाल कम होती जाती है।

जैसे-  (1) कांच में बैगनी रंग की प्रकाश का वेग न्यूनतम तथा अपवर्तनांक सर्वाधिक होता है।

(2)लाल रंग के प्रकाश का वेग सर्वाधिक तथा अपवर्तनांक न्यूनतम होता है।

  • इन्द्रधनुष (Rainbow) क्या है ?

प्रकाश के परावर्तन पूर्ण आन्तरिक परावर्तन तथा अपवर्तन द्वारा वर्ण विक्षेपण से ही इन्द्रधनुष (Rainbow)  की उत्पत्ति होती है।

इन्द्रधनुष (Rainbow) दो प्रकार का होता है- प्राथमिक इन्द्रधनुष (Primary Rainbow) तथा द्वितीयक इन्द्रधनुष (SecondaryRainbow)।

  • प्राथमिक इन्द्रधनुष (Primary Rainbow)  क्या है ?

वर्षाकाल में जब वर्षा की बूंदों पर आपतित होने वाली सूर्य की किरणों का दो बार अपवर्तन तथा एक बार परावर्तन होता है तब प्राथमिक इन्द्रधनुष (Primary Rainbow) की उत्पत्ति होती है।

प्राथमिक इन्द्रधनुष (Primary Rainbow) में लाल रंग बाहर की ओर तथा बैगनी रंग अन्दर की ओर होता है।

  • द्वितीयक इन्द्रधनुष (SecondaryRainbow) क्या है ?

वर्षाकाल में जब वर्षा की बूंदों पर आपतित होने वाली सूर्य की किरणों का दो बार अपवर्तन एवं एक बार परावर्तन होता है तब वर्षाकाल में जब वर्षा की बूंदों पर आपतित होने वाली सूर्य की किरणों का दो बार अपवर्तन तथा एक बार परावर्तन होता है तब द्वितीयक इन्द्रधनुष (SecondaryRainbow) की उत्पत्ति होती है। यह इन्द्रधनुष, प्राथमिक इन्द्रधनुष की तुलना में कुछ धुंधला दिखाई देता है।

द्वितीयक इन्द्रधनुष (SecondaryRainbow) में बैगनी रंग बाहर की ओर तथा लाल रंग अन्दर की तरफ होता है।

  • प्रकाश तरंगों का व्यतिकरण (Interference of Light) क्या है ?

जब दो समान आवृत्ति तथा समान आयाम की दो प्रकाश तरंगे जो मूलतः एक ही प्रकाश स्रोत से या किसी माध्यम में एक ही दिशा में गमन करती हैं तब उनके अध्यारोपण के परिणामस्वरूप प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन हो जाता है जिसे प्रकाश का व्यतिकरण (Interference of Light) कहते हैं।

व्यतिकरण दो प्रकार का होता है- संपोषी व्यतिकरण (Constructive Interference) तथा विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference)।

माध्यम के जिस बिन्दु पर दोनों तरंगें समान कला में मिलती है वहां पर प्रकाश की परिणामी तीव्रता अधिकतम होती है जिसे संपोषी व्यतिकरण (Constructive Interference) कहा जाता हैं।

माध्यम के जिस बिन्दु पर दोनों तरंगें की विपरीत कला में मिलती है वहां प्रकाश की तीव्रता न्यूनतम या शून्य होती है जिसे विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference) कहा जाता है।

उल्लेखनीय है कि दो स्वतन्त्र प्रकाश स्रोतों से निकली प्रकाश तरंगों में व्यतिकरण की घटना नहीं पाई जाती।

  • प्रकाश तरंगों का ध्रुवण (Polarisation of Waves of Light )क्या है ?

यदि प्रकाश तरंगों के कम्पन प्रकाश संचरण की दिशा के लम्बवत तल में एक ही दिशा में होते हैं तो इस प्रकाश को समतल ध्रुवित प्रकाश कहते हैं तथा प्रकाश सम्बन्धी इस घटना को प्रकाश तरंगों का ध्रुवण (Polarisation of Waves of Light )कहते हैं।

प्रकाश तरंगों के ध्रुवण (Polarisation of Waves of Light ) की खोज वर्ष 1802 ई0 में थामस यंग ने किया था।

ध्रुवण  की घटना अनुप्रस्थ तरंगों में होती है अनुदैर्ध्य तरंगों में नहीं।

सामान्य प्रकाश में विद्युत वेक्टर के कम्पन प्रकाश संचरण की दिशा के लम्बवत तल में प्रत्येक दिशा में समान रूप से होते हैं ऐसे प्रकाश को अध्रुवित प्रकाश (Unpolarised Light) कहा जाता है। जैसे- विद्युत बल्ब, ट्यूबलाइट, मोमबत्ती आदि से उत्सर्जित प्रकाश।

  • क्रान्तिक कोण (Critical Angle) क्या है ?

क्रान्तिक कोण किसी सघन माध्यम में बना हुआ वह आपतन कोण है जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण का मान 90 डिग्री होता है।

जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है तो अपवर्तन के कारण आपतित किरण अभिलम्ब से दूर हट जाती है जिससे कारण अपवर्तन कोण सदैव आपतन कोण से बड़ा होता है।

यदि आपतन कोण के एक विशेष मान पर अपवर्तन कोण का मान 90 डिग्री होता है तो इस विशेष मान कोण को क्रान्तिक कोण (Critical Angle) कहते हैं।

क्रान्तिक कोण पानी वायु माध्यम युग्म के लिए 42 डिग्री होता है तथा हीरा वायु माध्यम युग्म के लिए 24 डिग्री होता है।

हीरा के अन्दर जब किसी पृष्ठ पर आपतन कोण 24 डिग्री से कम होता है तब वह प्रकाश हीरे से बाहर निकलता है तथा जब वह प्रकाश हमारी आंखों पर पड़ता है तो हीरा चमकदार दिखाई देता है।

  • प्रतिबिम्ब का रेखीय आवर्धन (Image of Linear Magnification) क्या है ?

वस्तु के प्रतिबिम्ब की लम्बाई तथा उस लम्बाई के अनुपात को प्रतिबिम्ब का रेखीय आवर्धन(Image of Linear Magnification) कहते हैं।

  • वास्तविक प्रतिबिम्ब तथा आभासी प्रतिबिम्ब में क्या अन्तर है ?

वास्तविक प्रतिबिम्ब पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है जबकि आभासी प्रतिबिम्ब पर्दे पर नहीं प्राप्त किया जा सकता है।

  • वस्तुएं कितने प्रकार की होती है ?

वस्तुएं पांच प्रकार की होती है- प्रदीप्ति वस्तुएं (Luminous Bodies), अप्रदीप्ति वस्तुएं (Non- Luminous Bodies), पारदर्शक वस्तुएं (Transparent Bodies), अर्ध्दपारदर्शक वस्तुएं (Translucent Bodies) तथा अपारदर्शक वस्तुएं (Opaque Bodies)।

वे वस्तुएं जो स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित होती है प्रदीप्ति वस्तुएं (Luminous Bodies)कहलाती हैं। जैसे- सूर्य, विद्युत बल्ब, ट्यूबलाइट आदि।

वे वस्तुएं जिनका अपना स्वयं का प्रकाश नहीं होता तथा प्रकाश डालने पर दिखाई देती है अप्रदीप्ति वस्तुएं (Non- Luminous Bodies) कहलाती है ।

वे वस्तुएं जिनके अन्दर से होकर प्रकाश की किरणें निकल जाती है पारदर्शक वस्तुएं (Transparent Bodies) कहलाती हैं ।  जैसे- कांच, शीशा आदि ।

वे वस्तुएं जिन पर प्रकाश की किरणें पड़ने पर उनका कुछ भाग तो अवशोषित हो जाता है तथा कुछ भाग बाहर निकल जाता है, अर्ध्दपारदर्शक वस्तुएं (Translucent Bodies) कहलाती हैं। जैसे- तेल लगा हुआ कागज आदि ।

वे वस्तुएं जिनसे होकर प्रकाश की किरणें बाहर नहीं निकल पाती अपारदर्शक वस्तुएं (Opaque Bodies) कहलाती है। जैसे- विभिन्न धातुएं।

  • प्रकाश का प्रकीर्णन क्या है ?

जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम से होकर गुजरता है जिसमें धूल तथा अन्य पदार्थों के सूक्ष्म कण होते हैं तो प्रकाश सभी दिशाओं में प्रसारित हो जाता है इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।

आकाश का रंग नीला प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण ही दिखाई देता है।

लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे कम तथा बैंगनी रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है।
  • प्रकाश का विवर्तन क्या है ?

जब प्रकाश अवरोध के किनारों पर थोड़ा सा मुड़ कर उसकी छाया में प्रवेश करता है तो इस घटना को प्रकाश का विवर्तन कहते हैं।

  • प्रकाश का फोटान सिद्धान्त क्या है ?

प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे बण्डलों या पैकिटों के रूप में चलता है जिन्हें फोटान कहते हैं।

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