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सूक्ष्मदर्शी तथा दूरदर्शी या दूरबीन (MICROSCOPE AND TELESCOPE)

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Digital Microscope
Digital Microscope
  • सूक्ष्मदर्शी (Microscope)

सूक्ष्मदर्शी (Microscope) वह यन्त्र है जिसकी सहायता से मनुष्य की आंख से न दिखायी देने वाले सूक्ष्म वस्तुओं का अवलोकन तथा जांच की जाती है।

अथवा

मनुष्य द्वारा निर्मित वह यन्त्र जिसकी सहायता से सूक्ष्म से सूक्ष्म वस्तुओं (जैसे- अणु, परमाणु, वाइरस आदि) का अवलोकन, अध्ययन तथा जांच की जाती है , सूक्ष्मदर्शी (Microscope) कहलाता है।

सूक्ष्मदर्शी (Microscope) 02 प्रकार की होती हैः

(1) सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope)।

(2) संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope)।

  • सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope)

सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope)  में कम फोकस दूरी का एक उत्तल लेन्स होता है जिसमें वस्तु का आकार वस्तु द्वारा नेत्र पर बनाए गए दर्शंन कोण पर निर्भर करता है । दर्शन कोण जितना छोटा होता है, वस्तु उतनी ही छोटी दिखायी दोती है । दर्शन कोण जितना बड़ा होता है, वस्तु उतनी ही बड़ी दिखायी देती है । इस सूक्ष्मदर्शी के लेन्स को आवर्धक (Magnifying) कहते हैं

सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता (M) = 1 + D / f

( D = 25 cm,  f = फोकस दूरी,   M = आवर्धन क्षमता )

सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता जितनी अधिक होती है, वस्तु उतनी ही बड़ी दिखायी देती है ।

उदाहरण- एक सरल सूक्ष्दर्शी की फोकस दूरी 2 सेन्टीमीटर है, आवर्धन क्षमता बताओ –

हल- सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता (M) = 1 + D / f  = 1 + 25 / 2 = 13.2

Working with microscope
Working with microscope
  • संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope)

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) में एक ही अक्ष पर दो उत्तल लेन्स लगे होते हैं- अभिदृश्यक लेन्स (Objective Lens) तथा अभिनेत्र लेन्स (Eye Lens) ।

जो लेन्स वस्तु की ओर होता है उसे अभिदृश्यक लेन्स (Objective Lens) कहते हैं ।

जो लेन्स आंख के समीप होता है उसे अभिनेत्र लेन्स (Eye Lens) कहते हैं ।

अभिदृश्यक लेन्स (Objective Lens) की फोकस दूरी कम तथा अभिनेत्र लेन्स (Eye Lens) की फोकस दूरी अधिक होती है ।

अभिदृश्यक लेन्स (Objective Lens) की फोकस दूरी अभिनेत्र लेन्स (Eye Lens) की फोकस दूरी से कम होती है ।

अभिदृश्यक (Objective) तथा अभिनेत्र (Eye) में प्रयुक्त लेन्स की फोकस दूरी जितनी कम होती है संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) की आवर्धन क्षमता उतनी ही अधिक होती है ।

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscop) की आवर्धन क्षमता जितनी अधिक होती है वस्तु उतनी ही बड़ी दिखायी देती है ।

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscop) की आवर्धन क्षमता सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope) की आवर्धन क्षमता से काफी अधिक होती है ।

  • दूरदर्शी (Telescope)

दूरदर्शी (Telescope) वह प्रकाशीय उपकरण है जिसका प्रयोग दूर स्थित वस्तुओं को देखने के लिए किया जाता है । इस यन्त्र से दूर की वस्तुएं आकार में बड़ी तथा स्पष्ट दिखायी देती हैं । दूरदर्शी को दूरबीन भी कहा जाता है ।

दूरदर्शी का सर्वप्रथम निर्माण सन् 1608 ई0 में हालैण्ड के निवासी हैंसलिपरशे ने किया था । आगे चलकर दूरदर्शी का विकास प्रसिध्द वैज्ञानिक गैलीलियो ने किया जिसके कारण गैलीलियो को ही दूरदर्शी का आविष्कारक माना  जाता है ।

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) की तरह दूरदर्शी (Telescope) में भी दो उत्तल लेन्स होते हैं – अभिदृश्यक लेन्स (Objective Lens) तथा अभिनेत्र लेन्स (Eye Lens) ।

अभिनेत्र लेन्स (Eye Lens) को नेत्रिका भी कहा जाता है ।

अभिदृश्यक लेन्स (Objective Lens) की फोकस दूरी अधिक तथा अभिनेत्र लेन्स (Eye Lens) की फोकस दूरी कम होती है । अर्थात् अभिदृश्यक लेन्स (Objective Lens) की फोकस दूरी अभिनेत्र लेन्स (Eye Lens) की फोकस दूरी से अधिक होती है ।

दूरदर्शी तीन प्रकार की होती है- प्रकाशीय दूरदर्शी, एक्स-रे दूरदर्शी तथा रेडियो दूरदर्शी ।

रेडियो दूरदर्शी एक प्रकार का दिशिक रेडियो एन्टीना (direction redio antenna) है जिसका उपयोग रेडियो खगोलिकी के क्षेत्र में किया जाता है ।

रेडियो दूरदर्शी को खगोलीय दूरदर्शी भी कहा जाता है जिसकी खोज 1911 ई0 में कैप्लर ने किया था ।

एक्स-रे दूरदर्शी दो प्रकार की होती है- अपवर्तन दूरदर्शी (Refracting Telescope) तथा परावर्ती दूरदर्शी (Reflecting Telescope) ।

  • सूक्ष्मदर्शी (Telescope) का उपयोगः

सरल सूक्ष्मदर्शी का उपयोग फिंगरप्रिन्ट की जांच करने, स्केल के छोटे-छोटे खानों के बीच की दूरी मापने, जीवाणुओं को देखने आदि में किया जाता है ।

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का उपयोग प्रयोगशाला में सूक्ष्म जन्तुओं, वनस्पतियों आदि के आकार को बड़ा करके देखनें आदि में किया जाता है ।

  • दूरदर्शी (दूरबीन) का उपयोगः

दूरदर्शी का उपयोग आकाशीय पिण्डों ( जैसे- तारे, चन्द्रमा आदि) तथा पृथ्वी की सतह पर स्थित दूर की वस्तुओं को देखनें आदि में किया जाता है ।

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