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पित्ताशय की संरचना तथा कार्य (FUNCTION AND STRUCTURE OF GALL BLADDER)

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1 पित्ताशय की संरचना तथा कार्य (FUNCTION AND STRUCTURE OF GALL BLADDER)
1.3 पित्ताशय के रोग (Gall Bladder disease)

पित्ताशय की संरचना तथा कार्य (FUNCTION AND STRUCTURE OF GALL BLADDER)

मानव शरीर का वह खोखला अंग जो शरीर में पित्त का सन्तुलन बनाये रखता है तथा पित्त का भण्डारण करता है, पित्ताशय (GALL BLAADDER) कहलाता है।

गाल ब्लैडर में करीब 50 मिलीलीटर पित्त भण्डारित होता है।

गाल ब्लैडर (पित्ताशय) लगभग 04 इंच का नाशपाती के आकार का होता है जो कि लीवर के नीचे तथा पेट के ऊपरी दाहिने भाग में स्थित होता है। पित्ताशय (गाल ब्लैडर) के 03 भाग- बुध्न, काया तथा कंठ होते हैं। कंठ पित्ताशय वाहिनी के माध्यम से पित्तीय वृक्ष से जुड़ता है एवं यकृत वाहिनी से जुड़ कर आम पित्त वाहिनी बन जाता है। पित्ताशय में जेब की तरह खांचे होते हैं तथा त्वचा कवचीय स्तर होता है। त्वचा कवच वाली परत के ऊपर संयोजी ऊतक होता है जिसके ऊपर चिकन पेशीय भित्ति होती है जो कि लध्वांत्राग्र द्वारा रिस गए पेप्टाइड हार्मोन, कोलेसिस्टोकाइनिन की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप सिकुड़ जाती है। इसमें संक्रमण से बचाव के लिए ऊतकों का एक पतला स्तर होता है। जब चर्वीयुक्त भोजन पाचन मार्ग में पहुंचता है तब कोलेसिस्टोकाइनिन का रिसाव होता है जिससे पित्त स्रावित होता है। यह पित्त अर्ध्दपाचित भोजन मे उपलब्ध वसा को पायस बना देता है। पित्ताशय में संचित होने पर पित्त और अधिक गाढ़ा हो जाता है।

पित्ताशय के कार्य (Functions of Gall Bladder)

  1. यकृत द्वारा उत्पादित पित्त रस को संचित कर सुरक्षित रखता है।
  2. वसा के पाचन में सहायता करता है।
  3. सामान्य पित्तवाहिनी के माध्यम से पित्त को छोटी आंत में पहुंचाता है।
  4. शरीर में पित्त का सन्तुलन बनाये रखता है।

पित्ताशय (गाल ब्लैडर) को स्वस्थ रखने के लिए आहार

  1. फाइबरयुक्त ताजे फल व सब्जियां (जामुन, खीरा, अंगूर, चुकन्दर, एवोकैडो, क्रैनबेरी, ब्रोकोली मिर्च आदि) का नियमित सेवन करना चाहिए।
  2. कम से कम वसायुक्त खाद्य पदार्थ (जैसे- मछली, मांस, त्वचा रहित चिकन आदि) का सेवन करना चाहिए।
  3. फाइवरयुक्त रोटी तथा अनाज का नियमित सेवन करना चाहिए।
  4. अंकुरित अनाज के सेवन करना चाहिए।

पित्ताशय के रोग (Gall Bladder disease)

  1. पित्त की पथरी।
  2. गैलस्टान।
  3. कोलेडोकोलिथियासिस।
  4. बिलियरी डिस्केनेसिया।
  5. गालब्लैडर पोलिप्स।
  6. गालब्लैडर गैंग्रीन।
  7. गाल ब्लैडर के कैंसर।
  8. कोलिसिस्टाइसिस (गालब्लैडर का सूजन)।

∙ किन पशुओं में पित्ताशय पाया जाता है?   

रीढ़ की हड्डी वाले पशुओं मे पित्ताशय पाया जाता है।

∙ किन पशुओं में पित्ताशय नहीं पाया जाता है? 

बिना रीढ़ की हड्डी वाले पशुओं में पित्ताशय नही पाया जाता है।

∙ वयस्क व्यक्ति में पित्ताशय का आकार कितना होता है?

वयस्क व्यक्तियों में पित्ताशय की लम्बाई लगभग 08 सेंमी0 तथा व्यास 04 सेंमी0 होता है।

∙ पित्त में क्या-क्या पाया जाता है?

पित्त में मुख्यतया जल तथा नमक पाया जाता है ।

∙ एक स्वस्थ मानव में कितना पित्त पाया जाता है?

करीब 50 मिलीलीटर।

. पित्ताशय की संरचना कैसी होती है?

पित्ताशय की संरचना नाशपाती के आकार की होती है।

. पित्त का भण्डारण कौन करता है?

पित्त का भण्डारण पित्ताशय करता है।

. पित्त का स्राव किस अंग से होता है?

पित्त का स्राव पित्ताशय से होता है।

.  मानव शरीर में पित्त का सन्तुलन कौन बनाये रखता है?

मानव शरीर में पित्त का सन्तुलन पित्ताशय बनाये रखता है।

. पित्त की पथरी, गैलस्टान, कोलेडोकोलिथियासिस. बिलियरी डिस्केनेसिया, गालब्लैडर पोलिप्स, गालब्लैडर गैंग्रीन, गाल ब्लैडर के कैंसर तथा कोलिसिस्टाइसिस (गालब्लैडर का सूजन) मानव शरीर के किस अंग के रोग हैं?

पित्ताशय के रोग हैं।

. पित्ताशय कहां पर पाया जाता है?

लीवर के नीचे तथा पेट के ऊपरी दाहिने भाग में स्थित होता है।

. किस रोग में पित्ताशय में सूजन आ जाती है?

कोलिसिस्टाइसिस रोग में पित्ताशय में सूजन आ जाती है।

. पथरी किस अंग में सबसे अधिक पाई जाती है?

पित्ताशय में।

. पित्ताशय से पथरी कैसे निकाली जाती है?

लैप्रोस्कोपी सर्जरी से।

. मानव शरीर का कौन सा अंग पित्त का उत्सर्जन करता है?

पित्त का उत्सर्जन यकृत करता है।

. पित्ताशय में उपस्थित पत्थर किसका पाचन प्रभावित करता है?

वसा का पाचन प्रभावित करता है।

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