ग्लोबल वार्मिंग (Global warming)

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Global-Warming

ग्लोबल वार्मिंग (Global warming)

पृथ्वी के वातावरण एवं महासागरों के औसत तापमान में निरन्तर हो रही विश्वव्यापी वृद्धि तथा इसके कारण मौसम में होने वाले परिवर्तन को ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है।

पृथ्वी का वायुमंडल कई गैसों से मिलकर बना है जिसमें कुछ ग्रीन हाउस गैसें भी सम्मिलित हैं जो पृथ्वी के ऊपर एक प्राकृतिक आवरण बना लेती है। पृथ्वी सूर्य की किरणों से ऊष्मा प्राप्त करती है। सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमण्डल से गुजरती हुई पृथ्वी की सतह से टकराती है और फिर वही से परावर्तित होकर पुनः लौट जाती हैं। लौटती हुई किरणों के कुछ भाग को पृथ्वी का उक्त ऊपरी आवरण रोक लेता है जो पृथ्वी के वातावरण को गर्म बनाए रखता है। मनुष्यों, प्राणियों तथा पेड-पौधों के जीवित रहने के लिए कम से कम 16 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक होता है। ग्रीन हाउस गैसों में बढ़ोतरी होने पर यह आवरण और भी सघन और मोटा होता जाता है जिसके कारण सूर्य की अधिक किरणों को रोकने लगता है जिससे पृथ्वी का तापमान तेजी से बढने लगता है  यहीं से शुरू होता हैं ग्लोबल वार्मिंग।

शोधकर्ताओं के अनुसारः भारत, चीन, इण्डोनेशिया, ब्राजील, श्रीलंका, आस्ट्रेलिया,न्यूजीलैण्ड आदि देशों की सरकारें जंगलों की अन्धाधुन्ध कटाई रोक दे, तथा पर्यावरण के लिए हानिकारक कृषि पद्धतियों में बदलाव कर दे तथा विकसित देशों का हर पांचवा व्यक्ति 2030 ई0 तक शाकाहारी भोजन करने लगे तो ग्रीन हाउस उत्सर्जन को काफी हद तक सीमित किया जा सकता है और जलवायु परिवर्तन के हानिकारक प्रभावों से बचने की संभावना काफी बढ जाएगी।

इण्टरनेशनल पैनल ऑफ क्लाइमेट चेंज द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसारः बढ़ते तापमान को नियन्त्रित करने के लिए अकेले वाहनों, उद्योगों और पावर प्लान्ट से होने वाले  उत्सर्जन में कटौती करना काफी नहीं होगा, कृषि पद्धतियों में बदलाव खेती और जंगल इसके लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। भूमि एक महत्वपूर्ण संसाधन है जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि उचित प्रबन्धन किया जाए तो पेड़, पौधे और मिट्टी प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड की भारी मात्रा को सोख सकते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण (Due to global warming)

  1. वनों को निरन्तर हो रहे अन्धाधुन्ध कटान एवं कटान के सापेक्ष वृक्षारोंपण न किया जाना।
  2. वन एवं मिट्टी के बेहतर प्रबन्धन न किया जाना।
  3. लगातार बढता हुआ औद्योगीकरण।
  4. लगातार हो रही खाद्य पदार्थों की हो रही बर्बादी।
  5. वाहनों, उद्योगों और पावर प्लान्ट आदि से होने वाला भारी उत्सर्जन।
  6. बन्जर पडी भूमि को कृषि योग्य न बनाया जाना।
  7. प्लास्टिक उत्पादों, रसायनों व पेट्रो उत्पादों का लगातार बढता प्रयोग।

ग्लोबल  वार्मिंग रोंकने के उपाय (Measures to stop global warming)

  1. वनों की कटाई को कम सा कम 70 प्रतिशत कम किया जाय तथा कटान के सापेक्ष पर्याप्त मात्रा में वृक्षारोंपण  किया / कराया जाय।
  2. खेती के तरीकों में बेहतर सुधार किया जाय, रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद, नीम की खाद, जैविक खाद इत्यादि का व्यापक प्रयोग करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाय।
  3. मिट्टी के बेहतर से बेहतर प्रबन्धन किया जाय।
  4. कृषि योग्य भूमि पर पर्याप्त वृक्षारोपण कर के वन प्रबन्धन में व्यापक सुधार किया जाय।
  5. खाद्य पदार्थों की निरन्तर हो रही बर्बादी पर रोंक लगायी जाय।
  6. बन्जर खाली पडी भूमि को कृषि योग्य भूमि बना कर उस पर खेती की जाय तथा अधिकाधिक मात्रा में वृक्षारोंपण किया जाय।
  7. मांसाहारी भोजन के स्थान पर शाकाहारी भोजन को बढावा दिया जाय।
  8. वाहनों, उद्योगों और पावर प्लान्ट आदि से होने वाले उत्सर्जन में कटौती की जाय।
  9. प्लास्टिक उत्पादों, रसायनों व पेट्रो उत्पादों का कम से कम प्रयोग किया जाय।
  10. मानक के अनुसार कुल भू-भाग के कम से कम एक तिहाई भू-भाग पर वृक्षारोंपण किया जाय।

. ग्लोबल वार्मिंग क्या है?

पृथ्वी के वातावरण एवं महासागर के औसत तापमान में निरन्तर हो रही विश्वव्यापी वृद्धि तथा इसके कारण मौसम में होने वाले परिवर्तन को ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है ।

. मनुष्यों, प्राणियों तथा पेड-पौधों के जीवित रहने के लिए कम से कम कितने डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक होता है?

मनुष्यों, प्राणियों तथा पेड-पौधों के जीवित रहने के लिए कम से कम 16 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक होता है।